लालच के बाद अब छा गई अनिश्चितता

आशावाद के बाद बाज़ार में अभी अनिश्चितता का आलम है। जहां बेहतरी की कहानियां शेयर बाज़ार में लालच की भावना को हवा देती रहीं, वहीं अनिश्चितता भय को बढ़ाती जा रही है। बाज़ार से लालच की भावना भाग चुकी हैं। कभी यूक्रेन पर रूस के हमले और जवाब में अमेरिकी कार्रवाई के खतरे तो कभी अमेरिका में ब्याज दर बढ़ाए जाने की आशंका के नाम पर बाज़ार में बिकवाली बढ़ जाती है। इसमें भारत ही नहीं, दुनिया भर के बाज़ारों की उठापटक शामिल है। ऊपर से विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) इस साल 10 जनवरी के बाद से लगातार मुनाफावसूली कर रहे हैं। तब से अब तक वे हमारे शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट से 72,000 करोड़ रुपए से ज्यादा निकाल चुके हैं। अनिश्चितता गहराती जा रही है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…

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