शेयर बाज़ार के निवेशकों में ब्लूचिप-ब्लूचिप की बड़ी चर्चा होती है। भाव यह होता है कि ऐसी कंपनियों के निवेश में कोई रिस्क नहीं है। एक बार ले लो। फिर ज़िंदगी भर वे आपको रिटर्न देती रहती हैं। लेकिन यह एक भयंकर भ्रम है। रिस्क ब्लूचिप कंपनियों में भी भरपूर होता है। कल की ब्लूचिप कंपनी को खाक बनते देर नहीं लगती। इसलिए ब्लूचिप के पीछे भागने से अच्छा है कि ऐसी कंपनी चुनो जिसके बिजनेस मेंऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से घर-परिवार चला लेना आम इंसान के लिए महज़ एक सब्ज़बाग है। अगर कोई घर-परिवार व बच्चों की पढ़ाई से लेकर आकस्मिक खर्चों का इंतज़ाम एफडी की ब्याज या प्रॉपर्टी के किराए जैसे सुरक्षित व नियमित माध्यम से कर लेने की स्थिति में है और कम से कम 50 लाख रुपए ट्रेडिंग के लिए निकाल सकता है, वही यह काम कर सकता है। आज के दौर में मेडिकल जैसी आकस्मिक ज़रूरतों से लेकरऔरऔर भी

नियमित आय का पुख्ता इंतज़ाम न किया तो शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग कभी भी मात दे सकती है। बीमार हुए, घर में कोई समारोह या खास काम आ गया तो ट्रेडिंग नहीं कर पाएंगे। बाज़ार में अफरातफरी मची है, वो गिरता जा रहा है तो ट्रेडिंग करने में भयंकर रिस्क है जो आप नहीं उठा सकते। इस तरह किसी दिन या कई-कई दिन पाच हज़ार क्या, एक-दो हज़ार भी नहीं कमाया तो आगे की सारी गणना गड़बड़ाऔरऔर भी

बड़ा आसान लगता है वित्तीय बाज़ार, खासकर शेयर बाज़ार से कमाना। जहां हर दिन हज़ारों करोड़ों का कारोबार हो रहा हो, वहां से अपने लिए दो-चार हज़ार रुपए निकाल लेना क्या मुश्किल है! दिन के 5000 रुपए कमा लिए तो 20 दिन की ट्रेडिंग में महीने के एक लाख रुपए हो जाएंगे। 20% टैक्स भी चला गया तो महीने के 80,000 रुपए अपने और परिवार के गुजारे के लिए काफी हैं। बड़ा आसान गणित और मासूम गणनाऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में पिछले कुछ महीनों से जिस तरह हाई टाइड चल रहा है, जो निफ्टी पहले दिन में 90-100 अंक ऊपर-नीचे होता था, वो अब दिन में 250-300 अंकों का दायरा तय करने लगा है, उसे देखते किसी भी अनजान व्यक्ति के लिए बाज़ार में घुसना बेहद खतरनाक है। लेकिन मरता क्या न करता? जब हर तरफ काम-धंधे का अकाल है, नौकरियों का टोंटा है तो नौजवान कोई भी रिस्क लेने को तैयार है। इनको लाखऔरऔर भी

दो साल से कोरोना ने जितने लोगों को संक्रमित किया, जितने लोगों की जान ली, उससे कई-कई गुना ज्यादा लोग काम-धंधे के ठप हो जाने, नौकरी चले जाने या वेतन घटा दिए जाने से परेशान हैं। मेरा एक परिचित नौजवान पहले एनजीओ में नौकरी करता था। करीब साल भर पहले उसकी नौकरी चली गई तो उसने बेसब्री से पूछा कि क्या मैं शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से अपना घर-परिवार नहीं चला सकता? इस वक्त देश में ऐसेऔरऔर भी

दुनिया भर के शेयर बाज़ारों के शीर्ष सूचकांकों में हमेशा उस वक्त की अच्छी से अच्छी कंपनियां रखी जाती हैं। कोई कंपनी आज है, हो सकता है कि पांच साल बाद न रहे। साल 1991 में सेंसेक्स में जो कंपनियां थी, 2001 आते-आते उनमें से 18 यानी 60% बदल दी गईं। निफ्टी-50 सूचकांक में तो जैसे 40% कंपनियां एक निश्चित अंतराल के बाद बदल देने का रिवाज़-सा बना हुआ है। इससे एक सबक तो यह है किऔरऔर भी

आम लोग लालच में पड़कर क्रिप्टो ट्रेडिंग की ओर दौड़ सकते हैं। लेकिन हमारी सरकार आम लोगों को क्यों आत्मघाती किस्म का सटोरिया बनाना चाहती है? आखिर क्यों उसने क्रिप्टो से होनेवाली कमाई पर 30% टैक्स लगाकर इसे मान्यता दे दी? गौर करने की बात है कि इसके भाव सिर्फ लालच से उपजी मांग से तय होते हैं। बाकी इसका कोई आधार नहीं। दुनिया भर में कहीं इसका कोई इसका नियंत्रक नहीं। फिर हमारी वित्त मंत्री नेऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में हर स्टॉक के पीछे कोई न कोई बिजनेस और लिस्टेड कंपनी होती है। कंपनी का धंधा सॉलिड है तो उसका शेयर कभी न कभी बम-बम करेगा। हर डेरिवेटिव के पीछे कोई न कोई स्टॉक या सूचकांक होता है। सोने से लेकर हर मेटल या जिंस के फ्यूचर्स व ऑप्शंस के पीछे भी उसका भौतिक आधार होता है। लेकिन क्रिप्टो के पीछे क्या आधार है? कंप्यूटर प्रोग्रामिंग व आईटी के बहुत ऊंचे उस्ताद क्रिप्टो करेंसीऔरऔर भी

सरकार लोगों की कमाई में ‘कट’ लेने का कोई भी मौका नहीं चूकना चाहती। उसने इस बार के बजट में किसी को टैक्स की कोई राहत नहीं दी। न तो इनकम टैक्स की दरों या स्लैब में कोई तब्दीली की गई, न ही शेयर बाज़ार के सौदों पर लगनेवाला सिक्यूरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) हटाने की कोई बात हुई, जबकि इसे कैपिटल गेन्स टैक्स बचाने की हिकमत को खत्म करने के लिए लाया गया था और शॉर्ट-टर्म कैपिटलऔरऔर भी