शेयर बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि बीते सप्ताह मामूली सुधार के बाद 25 जनवरी को बहुप्रतीक्षित भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक से इस सप्ताह बाजार की दिशा निर्धारित होगी। रेपो व रिवर्स रेपो दर 0.25 फीसदी बढ़ सकती है, जबकि सीआरआर को 6 फीसदी पर यथावत रखे जाने की उम्मीद है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में 21 जनवरी को समाप्त सप्ताह में उतार-चढ़ाव का रूख दिखाई पड़ा और सप्ताहांत में यह 0.77औरऔर भी

गुरुवार को शेयर बाजार खुलने के एकाध घंटे बाद ही अफवाह फैल गई कि सिविल एविएशन सेक्टर में भी सीबीआई किसी घोटाले का पर्दाफाश करनेवाली है। दिन भर यह सनसनी चलती रही। फिर कहा गया कि बाजार बंद होने के बाद ऐसा खुलासा हो सकता है। इस चक्कर में बढ़े बाजार में भी जेट एयरवेज, किंगफिशर और स्पाइसजेट के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। लेकिन देर शाम तक ऐसी कोई खबर नहीं आई है। हां, इसऔरऔर भी

शुक्रवार को सूत्रों के हवाले दिन भर खबर आती रही कि पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी इस बात की जांच कर रही है कि हाउसिंग लोन घोटाले में शामिल लोगों व फर्मों ने कुछ कंपनियों के शेयरों में इनसाइडर ट्रेडिंग तो नहीं की है। असल में इसमें एलआईसी के सचिव (निवेश) नरेश चोपड़ा पर यही आरोप है कि वह मनी मैटर्स फाइनेंशियल से रिश्वत लेकर उन कंपनियों की जानकारी दिया करता है जिनमें एलआईसी निवेश करनेवाली है।औरऔर भी

हाउसिंग लोन घोटाले में सीबीआई ने 17 कंपनियों को नोटिस भेजा है। इनमें से पांच कंपनियों के बारे में सीबीआई का कहना है कि इन्होंने बैंक अधिकारियों को घूस देकर हासिल करीब 1000 करोड़ रुपए के कर्ज की रकम शेयर बाजार में लगा दी। दो प्रमुख बिजनेस चैनलों ने सूत्रों के हवाले यह खबर दी है। उनका कहना है कि इसमें से एक कंपनी ने 560 करोड़, दूसरी ने 300 करोड़ और बाकी तीन ने 50-60 करोड़औरऔर भी

संवेदनाशून्यता और बेशर्मी की हद है ये बाजार। कॉरपोरेट प्रॉफिट उन जांबाज लुटेरों की लूट की तरह है जो यूरोप के देशों से जहाजों में निकल कर शेष महाद्वीपों से लाया करते थे। आज तकनीक के आविष्कार ने उस लूट को जरा सभ्यता का जामा पहना दिया है। तलवार और तोप के स्थान पर कागज और कैल्क्यूलेटर या लैपटॉप आ गए हैं। दुनिया भर की आर्थिक विषमता इस बात का सबूत है। इधर जुही चावला का कुरकुरे का एक विज्ञापनऔरऔर भी

हमें यकीन नहीं था कि बाजार खुद को ऊपरी स्तर पर टिकाए रख पाएगा, फिर भी हमने शॉर्ट सौदे काटने को क्यों कहा? यह एक बड़ा सवाल है और आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों है? तो जवाब है कि बारिश ने भारत की विकासगाथा को धुंधला कर दिया है। राष्ट्रमंडल खेलों की भयंकर खामियों व घपलों ने विदेश में भारत और भारतीय राजनीति की छवि को दागदार बना दिया है। अभी देश के जीडीपी कीऔरऔर भी

हिन्डेनबर्ग की अशुभ छाया का डर बरकरार है। पूरे सितंबर भर रहेगा। दुनिया के बाजार गिरेंगे तो स्वाभाविक रूप से भारत पर भी असर पड़ेगा। वैसे भी हमारे एक बड़े फंड हाउस के प्रमुख कह चुके हैं कि बाजार में 10 फीसदी करेक्शन आना है। लेकिन कौन बेचेगा जिसके चलते यह करेक्शन आएगा? बीते शुक्रवार को बाजार (बीएसई सेंसेक्स) 1.25 फीसदी गिर गया। इस हिसाब से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सौदों के ओपन इंटरेस्ट में कमी आनी चाहिएऔरऔर भी

laxmi and begum

आपने भी देखा होगा। मैंने भी देखा है। सड़क के किनारे, गली के नुक्कड़ पर, बस अड्डों के पास, ट्रेन के डिब्बों में कभी-कभी एक आदमी नीचे बैठा ताश के छह पत्तों को उल्टी तरफ से दो-दो की जोडियों में खटाखट तीन सेट में रखता जाता है। आसपास कम से कम तीन लोग खड़े रहते हैं जो उसे घेरकर दांव लगाते हैं। दांव यह होता है कि जिसके बताए पत्ते के पलटने पर बेगम निकलेगी, उसके सौऔरऔर भी

जैसी कि उम्मीद थी, जोश से भरे स्टॉक अब थकते नजर आ रहे हैं। ट्रेडरों और निवेशकों की दिलचस्पी भी इनमें घट गई है। दूसरी तरफ अभी तक किनारे पड़े शेयरों, खासकर मिड कैप व स्मॉल कैप स्टॉक्स में अच्छी-खासी दिलचस्पी दिखने लगी है। यह दिलचस्पी भी सच्चे दीर्घकालिक निवेशकों की तरफ से आ रही है, न कि रिटेल निवेशकों की तरफ से। रिटेल निवेशक तो आखिरकार रिटेल ही हैं। वे तो बस रोना-धोना ही जानते हैं।औरऔर भी

कल माइक्रोसॉफ्ट के अच्छे नतीजों ने अमेरिकी बाजार को टॉप गियर में पहुंचा दिया। लेकिन आज सुबह से ही ईमेल आने शुरू हो गए कि स्पेन के 18 बैंक स्ट्रेस टेस्ट (प्रतिकूल हालात से निपटने की क्षमता की परीक्षा) में फेल हो गए हैं। चेतावनी दी गई कि मेटल सेक्टर गिरनेवाला है। ऐसी तमाम सारी हाय-हाय मचाई गई। आप अच्छी तरह समझ लें कि ये सब मंदड़ियों की कुंठा व हताशा है जो इस तरह की खबरोंऔरऔर भी