सेषासायी पेपर 51 साल पुरानी तमिलनाडु की कंपनी है। उत्तर भारत की कंपनी होती तो सही नाम शेषाशायी होता। शेषाशायी विष्णु का पर्यायवाची है जिसका शाब्दिक अर्थ है शेषनाग पर शयन करनेवाला। खैर, नाम में क्या रखा है! कंपनी ने पिछले महीने 23 जुलाई को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे घोषित किए। इसके मुताबिक साल भर पहले की समान अवधि की तुलना में उसका बिक्री 9.69 फीसदी बढ़कर 120.08 करोड़ से 131.71 करोड़ रुपएऔरऔर भी

खबर आई है कि पिछले हफ्ते पूंजी बाजार के 13 उस्तादों ने मुंबई में जुहू के फाइव स्टार होटल में एक मीटिंग की जिसमें तय किया गया कि उन्हें आगे कैसे और क्या करना है। इस मीटिंग में कुछ एफआईआई ब्रोकरों से लेकर प्रमुख फंड मैनेजरों व ऑपरेटरों ने शिरकत की। उनके बीच जो भी खिचड़ी पकी हो, लेकिन इससे इतना तो साफ हो गया है कि वे एक कार्टेल की तरफ काम कर रहे हैं जोऔरऔर भी

टेक्निकल एनालिसिस व चार्ट वाले इस समय खुश तो बहुत होंगे क्योंकि वे लंबे अरसे से निफ्टी के 4800 से नीचे जाने की भविष्यवाणी किए पड़े थे और ऐसा हो चुका है। अब इसके 4500 ही नहीं, 4200 तक गिरने की बात कही जा रही है। इधर आप में कुछ लोगों ने हिंदी में टेक्निकल एनालिसिस सिखाना शुरू करने की सलाह दी है। लेकिन टेक्निकल एनालिसिस क्या कोई विज्ञान है, विज्ञान व आस्था का मिलेजुले रूप ज्योतिषऔरऔर भी

मेरा ही नहीं, सभी का अनुभव यही कहता है कि शेयर बाजार में जो सही वक्त पर बेच नहीं पाता, वह कभी सचमुच का धन नहीं बना पाता। हो सकता है कि वह अपना पोर्टफोलियो देख-देखकर मगन होता रहे, लेकिन किसी दिन अचानक उसे पता चलता है कि जहां उसे अच्छा-खासा फायदा हो रहा था, वहां उसे तगड़ा घाटा होने लगा है। बेचना कब है, यह अपनी जरूरत और विवेक के हिसाब से तय करना चाहिए। ब्रोकरोंऔरऔर भी

बजाज इलेक्ट्रिकल्स देश की बड़ी व नामी कंपनी है जिस पर शायद ही कोई दो राय होगी। 72 साल पुरानी कंपनी है। शेखर बजाज इसके चेयरमैन व प्रबंध निदेशक हैं। बीते वित्त वर्ष 2010-11 में इसकी बिक्री 2739.43 करोड़ और शुद्ध लाभ 143.79 करोड़ रुपए रहा है। कंपनी की इक्विटी 19.90 करोड़ रुपए है जो दो रुपए अंकित मूल्य के 9.95 करोड़ शेयरों में विभाजित है। इस तरह सालाना आधार पर उसका ईपीएस (प्रति शेयर मुनाफा) 14.63औरऔर भी

सरकार की नवरत्न कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) को चालू वित्त वर्ष 2011-12 की पहली तिमाही में 3080.26 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। यह घाटा साल भर पहले इसी तिमाही में हुए 1884.29 करोड़ रुपए के घाटे के डेढ़ गुने से ज्यादा है। महज एक तिमाही का यह घाटा बीते पूरे वित्त वर्ष 2010-11 में हुए 1539.01 करोड़ रुपए के शुद्ध लाभ को पचा जाने के लिए काफी है। इस घाटे की सीधी-सी वजह यह है किऔरऔर भी

वीनस रेमेडीज साफ-सुथरी बीस साल पुरानी दवा कंपनी है। कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियमों का बखूबी पालन करती है। आठ सदस्यीय निदेशक बोर्ड के चार सदस्य स्वतंत्र निदेशक हैं। देश की 50 प्रमुख दवा कंपनियों में शुमार है। 75 से ज्यादा उत्पाद हैं। दुनिया के 60 देशों में मौजूदगी है। तीन उत्पादन संयंत्र हैं। एक पंचकुला (पंजाब) में। दूसरा बड्डी (हिमाचल प्रदेश) में। और, तीसरा जर्मनी के शहर वेयरने में। पिछले पांच सालों में बिक्री 141.35 करोड़ रुपएऔरऔर भी

रीको ऑटो इंडस्ट्रीज दोपहिया से लेकर चार-पहिया वाहनों के कंपोनेंट बनानेवाली बड़ी कंपनी है। कितनी बड़ी, इसका अंदाजा कंपनी के धारुहेड़ा, मानेसर व गुड़गांव के संयंत्रों को देखकर लगाया जा सकता है। हीरो मोटोकॉर्प से लेकर मारुति तक की बड़ी सप्लायर है। आज से नहीं, करीब पच्चीस सालों से। लेकिन 2006 से ही उसके सितारे गर्दिश में हैं। पहले मजदूरों की 56 दिन लंबी हड़ताल हुई। फिर दुनिया के वित्तीय संकट ने भारत को आर्थिक सुस्ती मेंऔरऔर भी

एक तरफ केंद्र की यूपीए सरकार अण्णा हज़ारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को न संभाल पाने से परेशान हैं, दूसरी तरफ शेयर बाजार की गिरावट व पस्तहिम्मती ने सरकार के प्रमुख कर्णधार व संकटमोचक वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को हिलाकर रख दिया है। दिक्कत यह भी है कि हमारे शेयर बाजार की गिरावट की मुख्य वजह चूंकि वैश्विक हालात हैं, इसलिए वित्त मंत्री ढाढस बंधाने के अलावा कुछ कर भी नहीं सकते। शुक्रवार को वि‍त्‍त मंत्री प्रणवऔरऔर भी

वैसे तो नाम में कुछ नहीं रखा। लेकिन जानकर आश्चर्य हुआ कि अनिल नाम की भी एक नहीं, दो लिस्टेड कंपनियां हैं। इनमें से एक है अनिल लिमिटेड जिसका नाम करीब साल भर पहले 22 सितंबर 2010 तक अनिल प्रोडक्ट्स लिमिटेड हुआ करता था। अहमदाबाद की कंपनी है। किसी समय इसका वास्ता अरविंद मिल्स वाले लालभाई समूह से हुआ करता था। अब नहीं है। 1939 में कॉर्न वेट मिलिंग के धंधे से शुरुआत की थी। अब तमामऔरऔर भी