हमने हीरो होंडा में बेचने की सलाह दी और यह स्टॉक गिर गया जो साबित करता है कि दोपहिया वाहनों की इस भीमकाय कंपनी तक के बारे में हमारी अंतर्दृष्टि कितनी गहरी है। हमने कल ही इस्पात इंडस्ट्रीज से निकल जाने की सलाह दी, जबकि हल्ला था कि जेएसडब्ल्यू स्टील के साथ उसकी डील 30 से 33 रुपए पर हो सकती है। यहां तक कि आज के इकनॉमिक टाइम्स ने भी 30 से 33 रुपए की खबरऔरऔर भी

उम्मीद के मुताबिक एक और उतार-चढ़ाव से भरा दिन। सेंसेक्स बंद तो हुआ 24 अंक बढ़कर, लेकिन दिन भर में इसने 295 अंकों की पेंग भरी। वैसे, आज के स्टार परफॉर्मर रहे – हीरो होंडा और इस्पात इंडस्ट्रीज। इन दोनों की शिनाख्त में हम सबसे आगे रहे हैं। इस्पात ने कहानी को मुकाम पर पहुंचाने में पूरे बारह महीने लगा दिए। लेकिन हम खुश हैं क्योंकि इस स्टॉक ने 30 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया हैऔरऔर भी

लंबे समय की बात छोड़िए, आपको तो थोड़े समय के लिए भी बाजार की दशा-दिशा को लेकर फिक्र करने की जरूरत नहीं है। अगर हम वित्त वर्ष 2011-12 के अनुमानित लाभ को आधार बनाएं तो भारतीय बाजार अभी 16 के पी/ई अनुपात पर चल रहा है जो इक्विटी मूल्यांकन के वैश्विक मापदंड से काफी नीचे है। इसलिए उन लोगों को कहने दीजिए, जो कहते हैं कि भारतीय बाजार महंगा हो चला है और इसमें अब गिरावट आनीऔरऔर भी

बाजार अब भी विश्वास के संकट से गुजर रहा है। इसलिए भावों में तेज उतार-चढ़ाव जारी है। लोग निफ्टी के ऑप्शन सौदों में 5600 व 5400 पर सक्रिय हैं जो साफ दिखाता है कि हर बढ़त का इस्तेमाल बिकवाली के लिए किया जा रहा है। दूसरे तमाम भूत धीरे-धीरे गायब हो रहे हैं तो अब नई अफवाह फैलाई जा रही है कि डीएमके केंद्र सरकार से समर्थन वापस ले लेगी। यह एकदम बकवास है क्योंकि इस समयऔरऔर भी

आज निफ्टी के 5920 के पार जाते ही बाजार ने पहली जंग जीत ली। अब कम से कम इतना तय हो गया है कि बाजार इससे ज्यादा नीचे नहीं जाएगा। बुधवार,15 दिसंबर एक ऐसा दिन है जिस पर मैं दो वजहों से जमकर दांव लगा रहा हूं। एक, मॉयल की लिस्टिंग और दो, एडवांस टैक्स जमा करने का आखिरी दिन। एडवांस टैक्स के आंकड़ों से शेयरों के मूल्यों को आवेग मिलेगा क्योंकि तीसरी तिमाही में अभी तकऔरऔर भी

बुधवार को सरकारी कंपनी मॉयल लिमिटेड (पुराना नाम मैगनीज ओर इंडिया लिमिटेड) की लिस्टिंग होनी है। बुधवार को बीएसई सेंसेक्स 20,000 अंक के ऊपर चला जाएगा। आपके लिए इस पर भरोसा करना कठिन है। लेकिन यह सच है। बाजार में बनी पोजिशन में जितना इधर-उधर होना था, हो चुका है। ऑपरेटर अब पूरे सुकून की स्थिति में आ चुके हैं। इसका अंदाजा करुतुरी ग्लोबल के ऊपरी सर्किट तक पहुंचने और के एस ऑयल के ऊपर में 41.70औरऔर भी

हालांकि बाजार का सबसे बुरा वक्त या कहिए कि राहुकाल बीत चुका है, लेकिन अब भी दो और आसान मोहरे हैं जिनके दम पर चालबाज बाजार में उठापटक पैदा कर सकते हैं। फिलहाल बाजार से ऑपरेटर की अवधारणा ही खत्म होने जा रही है। इसलिए आगे से हमें दो नई अवधारओं पर केंद्रित करने की जरूरत है – एक, मार्केट मेकर (सेबी की इजाजत मिल चुकी है, लेकिन अमल में नहीं) और दो, बाजार के चालबाज याऔरऔर भी

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के शासन वाली एनडीए सरकार को भी घसीट लिया है और 2001 से ही जांच कराने की बात की है। इसके बाद लगता है कि राजनीतिक गतिरोध आखिरकार अब खत्म हो जाएगा। घोटाले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की विपक्ष की मांग ठंडी पड़ जाएगी। थोड़ी आस बनने लगी है कि संसद में कामकाज शुरू हो जाएगा और इस मसले पर बहस हो सकेगी। लेकिन बाजारऔरऔर भी

खबर आ जाती तो अच्छा था। लेकिन यहां तो कानोंकान सुनी और कही गई बातें फैलाई जा रही हैं। कहा गया कि आईबी की रिपोर्ट में रुचि सोया और केएस ऑयल के शेयर-भावों के साथ धांधली की बात है और रुचि सोया को 27 फीसदी व केएस ऑयल को 14.69 फीसदी फटका लग गया। निवेशक घबराए हुए हैं। ऐसे में सेबी को चाहिए कि सामने आकर स्थिति साफ करे कि आईबी की ऐसी कोई रिपोर्ट है किऔरऔर भी

दुनिया और घरेलू बाजार को लेकर जितनी भी चिंताएं जताई जा रही हैं, वे सभी अतिरंजित हैं, काफी ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर उन्हें पेश किया जा रहा है। पूंजी बाजार में घोटाले का शोर है, लेकिन यह घोटाला कितने का है, इसका कोई बड़ा आंकड़ा सामने नहीं आया है। हां, इतना जरूर हुआ है कि आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर ने बाजार के माहौल को बड़ा संगीन व डरावना बना दिया है। आखिर पुराने फ्रॉड और घोटालों पर चर्चा करनेऔरऔर भी