हमने इसी जगह एक बार नहीं, कई बार कहा था कि चाहे कुछ हो जाए, बाजार 5735 तक जाएगा। यह हो गया। महज दो हफ्तों में एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशकों) ने 10,000 करोड़ रुपए की खरीद कर डाली। अहम सवाल है कि आगे क्या होगा? क्या यह क्षणिक आवेग है या बाजार नई छलांग की तैयारी में है? मंदी और तेजी के खेमे की राय स्वाभाविक तौर पर अलग-अलग है। कुछ कहते हैं कि यह महज फुलझड़ीऔरऔर भी

भगवान ने इंसान को बनाया या इंसान ने भगवान को – यह बात मैं दावे के साथ नहीं कह सकता। लेकिन इतना दावे के साथ जरूर कह सकता हूं कि दस के चक्र/क्रम में चलनेवाली गिनतियों को इंसान ने ही बनाया है। इंसान की दस उंगलियां है तो यह चक्र दस का है। उन्नीस होतीं तो यह चक्र उन्नीस का होता। ज्योतिष और अंकों में दिलचस्पी रखनेवाले इस पर सोचें। हम तो फिलहाल यह देखते हैं किऔरऔर भी

विदेशी निवेशक फर्म मॉरगन स्टैनले ने जहां एक तरफ देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) को डाउनग्रेड कर दिया है, वहीं सड़क व बांध वगैरह बनाने में लगी और उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार की करीबी मानी जानेवाली कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स का स्तर बढ़ा दिया है। यहीं नहीं, मुंबई की रीयल एस्टेट कंपनी ओबेरॉय रीयल्टी के बारे में भी उसकी राय काफी अच्छी है। मॉरगन स्टैनले ने अपनी ताजा रिपोर्ट में आरआईएल को ओवर-वेट सेऔरऔर भी

निफ्टी 5740 तक जाने के बाद लगभग 80 अंक नीचे आकर 5660.65 पर गया। इसकी दो वजहें रहीं। एक, मॉरगन स्टैनले ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को डाउनग्रेड कर ओवर-वेट से इक्वल-वेट कर दिया और इसका लक्ष्य 1206 रुपए से घटाकर 956 रुपए कर दिया। नतीजतन, रिलायंस 1.83 फीसदी गिरकर 854.40 रुपए पर आ गया। दूसरी वजह थी – रॉयल्टी व लाभ में हिस्सेदारी वाला नया खनन विधेयक, जिसका संसद में पास हो पाना मुश्किल है। इसमें खनन विधेयकऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति ठंडी पड़ी, दयानिधि मारन का इस्तीफा हुआ और बाजार तेजी से झूम उठा। किसी को भी भान नहीं था कि निफ्टी यूं 5740 के एकदम करीब तक चला जाएगा। मुझे दुनिया को खुद के सही होने का सबूत देने की जरूरत नहीं है। हालांकि जिंदगी जब तक है, तब तक आलोचक भी रहेंगे। बिग बी तक के आलोचक हैं और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के भी। आपको किसी व्यक्ति की उपलब्धिऔरऔर भी

बाजार अगर थोड़ा इधर-उधर हो भी रहा है तो चिंता करने की कोई बात नहीं। यह बाजार के जमने का दौर है। अभी वह जितना ज्यादा खुद को जमाएगा, उतना ही ज्यादा उसके तेजी से उठने के आसार बढ़ जाएंगे। अगर निफ्टी 5500 के नीचे जाता है, तभी मंदी की धारणा पालिए और अगर यह 5780 को पार कर जाता है तो जबरदस्त तेजी के मूड में आ जाइए। आज तो यह महज 6.65 अंक गिरकर 5625.45औरऔर भी

निफ्टी ने भले ही थोड़ी कमजोरी दिखाई हो, लेकिन बी ग्रुप के शेयरों में अच्छी-खासी खरीद हुई है। यह मेरी अपेक्षा के अनुरूप है। निफ्टी जब तक खुद को 5600 से 5700 के बीच जमाता है, तब तक बी ग्रुप के शेयरों का मूल्यांकन सुधरने लगा है। निफ्टी 5659.85 तक जाने के बाद 5632.10 पर बंद हुआ है जो मुझे लगता है कि अच्छा स्तर है। इसके आगे यह कभी भी धमाके के साथ 5715 तक पहुंचऔरऔर भी

बीएसई सेंसेक्स में शामिल 30 शेयरों में पांच ऐसे हैं जिन्होंने चालू साल 2011 की पहली छमाही में बाजार को मात दी है। 3 जनवरी 2011 को बाजार में कारोबार के पहले दिन और छमाही के आखिरी दिन 30 जून 2011 को सेंसेक्स और इन शेयरों के बंद भाव के अंतर को देखकर साफ हो जाता है कि कैसे इन्होंने बाजार की दिशा से अलग हटकर बढ़त हासिल की है। सेंसेक्स के ये पांच पांडव है –औरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट का विशेष जांच दल (एसआईटी) अगले महीने अगस्त के तीसरे हफ्ते तक अपनी पहली रिपोर्ट पेश कर देगा। इससे विदेशी बैंकों में रखे भारतीयों के काले धन पर तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी। इससे तमाम चिंताओं पर विराम लग जाएगा। और, सुप्रीम कोर्ट की फटकार सहने के बावजूद यूपीए सरकार को यह कहने का मौका मिलेगा कि उसने अपना काम कर दिखाया है। इधर, सरकार के एजेंडे में आर्थिक सुधार फिर से केंद्रऔरऔर भी

कोई चीज बहुत जल्दी, बहुत आसानी से हो जाए तो बहुतों के लिए उसे पचा पाना बहुत मुश्किल होता है। शेयर बाजार जिस तरह से सुधरा है, निफ्टी 5180 और सेंसेक्स 17,770 से जिस तेजी से उठा है, उससे कभी-कभी डर भी लगता है कि कहीं सब फिर से पटरा न हो जाए। वैसे, आपको याद होगा कि बाजार के इन स्तरों पर पहुंचने पर हमने साफ कहा था कि वह अब तलहटी पकड़ चुका है औरऔरऔर भी