विदा लेते साल 2010 के दौरान देश में भ्रष्टाचार और घोटालों के कई मामले सामने आए। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था नौ फीसदी की तेज रफ्तार के साथ आगे बढती दिखाई दी। पहले राष्ट्रमंडल खेल आयोजन में भ्रष्टाचार, फिर कॉरपोरेट जगत के लिये जनसंपर्क का काम करनेवाली नीरा राडिया के नेताओं, अधिकारियों और पत्रकारों के साथ बातचीत के टेप के सार्वजनिक होने और 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से उठा तूफान। इन सब विवादों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था नौ फीसदीऔरऔर भी

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले पर विपक्ष संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) बनाने की मांग पर डटा हुआ है। लोकसभा सचिवालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, अब तक संसद ने बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों की जांच के लिए चार बार जेपीसी का गठन किया है। 987 में बोफोर्स तोप सौदे में दलाली के आरोपों की जांच के लिए पहली बार जेपीसी गठित की गई थी। इसके बाद हर्षद मेहता घोटाले की जांच के लिए 1992 में, केतन पारेख के घोटालेऔरऔर भी

वक्त की जरूरत है कि देश में वित्तीय सुधार लागू किए जाएं और निवेशकों के हितों की हिफाजत की जाए। इस समय हमारे शेयर बाजार में करीब 1600 कंपनियां सस्पेंड पड़ी हैं। लेकिन उनके खिलाफ सेबी या कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे बेहद गलत संकेत जा रहा है। सच कहें तो यह काफी बड़ा घोटाला है। इन सस्पेंड कंपनियों में रिटेल निवेशकों के करीब 58,000 करोड़ रुपए फंसे हैं।औरऔर भी

एक तरफ 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की मांग पर बीजेपी की अगुआई में विपक्ष संसद से बाहर भी सरकार से भिड़ा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के ही वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) ने इस मुद्दे पर विचार और सलाह मांगी है। श्री जोशी ने इस मुद्दे पर सोमवार, 27 दिसंबर को पीएसी की बैठक बुलाई है जिसमें लोगों कीऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय को निर्देश दिए है कि वे 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में 2001 से लेकर 2008 तक की अवधि की पूरी जांच करें। इस निर्देश के साथ ही एनडीए और यूपीए दोनों के शासनकाल की दूरसंचार नीतियां अब जांच के दायरे में आ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जी एस सिंघवी और ए के गांगुली की पीठ ने स्पष्ट किया कि जांच में सरकारी खजाने को हुए नुकसानऔरऔर भी

कल बाजार डीएमके से जुडे नेताओं पर सीबीआई के छापों के कारण गिर गया। लेकिन इसे तूल देना एकदम गलत है क्योंकि डीएमके सत्ता से बाहर रहना गवारा नहीं कर सकती। विपक्ष ठीक ही कह रहा है कि इतनी देर से छापे मारना महज दिखावा है क्योंकि इस बीच गुनहगारों को इतना वक्त मिल गया कि वे तमाम कागकाज इधर से उधर कर चुके होंगे। इसलिए छापों से सीबीआई को काम का कुछ नहीं मिला होगा। असलऔरऔर भी

सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज (अभी की महिंद्रा सत्यम) के खातों में 7136 करोड़ रुपए की भयंकर घपलेबाजी जब हुई थी, तब उसके ऑडिट का काम अंतरराष्ट्रीय स्तर की फर्म प्राइस वॉटरहाउस देख रही थी। देश के कॉरपोरेट जगत को हिला देनेवाले इस घोटाले में पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने प्राइस वॉटरहाउस के खिलाफ पहला कारण बताओ नोटिस 14 फरवरी 2009 को जारी किया था और मामले की सुनवाई 30 मार्च 2010 को शुरू हुई थी। लेकिन प्राइसऔरऔर भी

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के शासन वाली एनडीए सरकार को भी घसीट लिया है और 2001 से ही जांच कराने की बात की है। इसके बाद लगता है कि राजनीतिक गतिरोध आखिरकार अब खत्म हो जाएगा। घोटाले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की विपक्ष की मांग ठंडी पड़ जाएगी। थोड़ी आस बनने लगी है कि संसद में कामकाज शुरू हो जाएगा और इस मसले पर बहस हो सकेगी। लेकिन बाजारऔरऔर भी

बाजार में अफवाहों का चक्र घूम रहा है कि पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी केतन पारेख (केपी) से जुड़े स्टॉक्स के खिलाफ आदेश सुनाने जा रही है। ऐसे स्टॉक्स में रेलिगेयर, सुज़लॉन, डीबी रीयल्टी, गोदरेज प्रॉपर्टीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंस, जेएसडब्ल्यू पावर, पैंटालून, अडानी एंटरप्राइसेज, बीजीआर एनर्जी और आशापुरा माइनकेम का नाम लिया जा रहा है। बड़ी चालाकी से कोई ये सारी कहानियां प्लांट करा रहा है ताकि बाजार में भागमभाग मचे और वो अपना खेल करऔरऔर भी

डाउ जोंस 11,300 के ऊपर बढ़कर बंद हुआ। यह ब्रेक-आउट का साफ संकेत है और यह अब 15,000 की तरफ बढ़ेगा। पहला पड़ाव 11,800 का है। यह तेजी अमेरिका में दूसरी क्वांटिटेटिव ईजिंग (क्यूई-2) का असर है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था को दिए जानेवाले इस प्रोत्साहन की तारीख घोषित हो चुकी है। इसका आकार 3.3 लाख करोड़ डॉलर का हो सकता है। हालांकि अमेरिकी सीनेट ने पहले 60 करोड़ डॉलर की राशि ही पारित की थी। आप इसकी अहमियतऔरऔर भी