अपना देश लगता है उलटबांसियों का देश है। आयात निर्यात जमकर बढ़ रहा है। इस साल अप्रैल से जुलाई के बीच निर्यात 54 फीसदी तो आयात 40 फीसदी बढ़ा है। इससे कंटेनरों को बंदरगाहों तक लाने-ले जाने वाली कंपनियों का धंधा भी बढ़ा है। लेकिन तमाम कार्गो कंपनियों के शेयर पिटे पड़े हैं। सरकारी कंपनी कंटेनर कॉरपोरेपशन (कॉनकोर) की हालत तो कुछ ज्यादा ही खराब है। धंधा बुरा नहीं है क्योंकि जून तिमाही में उसका शुद्ध लाभऔरऔर भी

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में निदेशक बोर्ड के स्तर की भर्तियों के मामले में दिशानिर्देश में संशोधन किया है। इससे केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के कामकाज में सुधार में मदद मिलेगी। लोक उद्यम चयन बोर्ड (पीईएसबी) द्वारा जारी नए दिशानिर्देश के अनुसार निदेशक बोर्ड स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया पद खाली होने की अनुमानित तिथि से 16 महीने पहले शुरू कर दी जाएगी। पहले यह प्रक्रिया एक साल पहले शुरू होती थी। इसके तहतऔरऔर भी

एक 15 दिसंबर 2010 का दिन था जब सरकारी कंपनी मॉयल (पूरा पुराना नाम मैंगनीज ओर इंडिया लिमिटेड) की लिस्टिंग हुई थी और 375 रुपए पर जारी किया गया उसका शेयर पहले ही दिन 591.05 के शिखर पर जा बैठा था। उस दिन उन तमाम पंटरों के कपड़े उतर गए थे जो लिस्टिंग के पहले अनधिकृत बाजार में इन शेयरों को 200-250 रुपए में बेच रहे थे। और, एक कल 23 जून 2011 का दिन रहा, जबऔरऔर भी

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में शेयर हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को चुस्त दुरूस्त बनाने व तेज करने के लिए सरकार ने एक नियमावली (हैंडबुक) पेश की है। यह हैंडबुक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उप्रकमों (सीपीएसई) और इससे जुड़े विभागों के लिए विनिवेश संबंधी नियमावली है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने गुरुवार को राजधानी दिल्ली में इस ‘पब्लिक इश्यू के जरिए विनिवेश पर नियमावली’ शीर्षक की हैंडबुक को जारी किया। उन्होंने कहा कि यह हैंडबुक सीपीएसई, प्रशासित मंत्रालयों औरऔरऔर भी

बाजार लोगों का झुंड नहीं होता, भीड़ नहीं होता। वह आगा-पीछा, भूत-भविष्य देख अपना फायदा सोचकर चलनेवालों का सामूहिक विवेक होता है। ठीक उसी तरह जैसे चुनावों में अवाम का फैसला भीड़ का नहीं, बल्कि सामूहिक विवेक का फैसला होता है। हां, पहले बूथ कैप्चरिंग वगैरह चलती थी तो अवाम की सही चाहत सामने नहीं आ पाती थी। ईवीएम मशीनें आने व चुनिंदा चुनाव सुधारों के बाद हालात पहले से बेहतर हुए हैं। इसी तरह हमारे बाजारऔरऔर भी

सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियरिंग कंपनी बीएचईएल (भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) ने हफ्ते भर पहले सोमवार, 23 मई को घोषित किया कि वित्त वर्ष 2010-11 में उसका टर्नओवर 22.94 फीसदी बढ़कर 43,394.58 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 39.45 फीसदी बढ़कर 6011.20 करोड़ रुपए हो गया है। उसके पास 1.64 लाख करोड़ रुपए के अग्रिम ऑर्डर हैं। लेकिन उसका शेयर शुक्रवार 20 मई के 2074.40 रुपए से भाव से 6.69 फीसदी गिरकर 1935.60 रुपए पर आ गया। इसके बादऔरऔर भी

डेरिवेटिव सौदों के सेटलमेंट का आखिरी दिन। एक्सायरी का दिन। कल 78,000 करोड़ रुपए का रोलओवर हुआ और इस महीने का ओपन इंटरेस्ट था 76,000 करोड़ रुपए। अब तक किसी भी सेटलमेंट के लिए ये सबसे बुरे आंकड़े हैं। इस 78,000 करोड़ रुपए के रोलओवर में जुलाई के ऑप्शंस ट्रेड की भी काफी रकम शामिल है जो  इन आंकड़ों को और खोखला कर देती है। इन आंकड़ों में बदतर हालात की आहट है। वैसे, यहां से बाजारऔरऔर भी

आखिरकार नॉर्थ ब्लॉक में राजनीतिक गतिरोध टूटता हुआ दिख रहा है। आठ सालों बाद वित्त मंत्रालय विनिवेश का पल्लू छोड़कर पूरी तरह निजीकरण की तरफ निर्णायक कदम बढ़ा रहा है। स्कूटर्स इंडिया को बेचने का फैसला हो चुका है। राज्यों के चुनाव नतीजों ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच व कार्रवाई को लेकर सारी उहापोह खत्म कर दी है। संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) इसकी जांच कर ही रही है। डीएमके को अवाम ने सत्ता से बाहरऔरऔर भी

बाजार का जो भी खेल है, यहां अपग्रेड और डाउनग्रेड गलत वक्त पर होते हैं। हमने एसकेएस माइक्रो फाइनेंस को 800 रुपए पर डाउगग्रेड किया था और अब देखिए उसका हश्र क्या है। हमने एसबीआई को 3500 रुपए पर डाउनग्रेड किया था, बाजार अब कर रहा है। हमने मुथूत फाइनेंस के बारे में नकारात्मक राय रखी और लिस्टिंग पर उसका हाल-बेहाल सामने आ गया. है। हमें यकीन है कि यह स्टॉक घटकर 123 रुपए तक आ जाएगाऔरऔर भी

कंपनियों के नतीजों का मौसम खत्म होने को है। अब तक तस्वीर यह बनी है कि जहां इनफोसिस और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी तमाम बड़े स्तर की कंपनियां बाजार की अपेक्षाओं को पूरा करने में नाकाम रही हैं, वहीं पोलारिस, एचसीएल टेक्नो व हिंदुस्तान जिंक जैसे मध्यम स्तर की कंपनियों ने उम्मीद के बेहतर नतीजे हासिल किए हैं। कुल मिलाकर कॉरपोरेट क्षेत्र का लाभार्जन बीते वित्त वर्ष 2010-11 में पहले से 20 फीसदी ज्यादा रहेगा। लेकिन चालू वित्तऔरऔर भी