रसायन उद्योग हुआ एकदम चमाचम

डेरिवेटिव सौदों के सेटलमेंट का आखिरी दिन। एक्सायरी का दिन। कल 78,000 करोड़ रुपए का रोलओवर हुआ और इस महीने का ओपन इंटरेस्ट था 76,000 करोड़ रुपए। अब तक किसी भी सेटलमेंट के लिए ये सबसे बुरे आंकड़े हैं। इस 78,000 करोड़ रुपए के रोलओवर में जुलाई के ऑप्शंस ट्रेड की भी काफी रकम शामिल है जो  इन आंकड़ों को और खोखला कर देती है। इन आंकड़ों में बदतर हालात की आहट है। वैसे, यहां से बाजार अगर 5 से 10 फीसदी भी गिर जाए तब भी कोई बड़ी तबाही नहीं होगी क्योंकि रिटेल निवेशक तो इससे बाहर निकला हुआ है और हाल-फिलहाल उसके इसमें वापस कूदने के आसार भी नहीं है।

उधर, टाटा स्टील के कल आए बेहतर नतीजों ने आज बाजार के मूड को उठा दिया। टाटा स्टील आज सुबह-सुबह 3.25 फीसदी बढ़ गया था। वैसे, बाजार को उभारने का अहम तत्व है रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) जो काफी वक्त से गर्दिश में चल रहा है। कावेरी बेसिन के डी-6 ब्लॉक को लेकर लंबे समय से सरकार इधर-उधर कर रही थी। अब सरकार ने आरआईएल को गैस का ज्यादा दाम लेने की इजाजत दे दी है। इसलिए लगता है कि इस स्टॉक का सबसे बुरा वक्त अब बीत चला है। आज इसमें 2.93 फीसदी तक बढ़त दर्ज की गई है।

असल में आरआईएल का सूचकांकों में काफी वजन है। बाजार में सुधार के लिए आरआईएल की चाल काफी मायने रखती है, खासकर तब, जब सेंसेक्स के दो अन्य स्तंभ एसबीआई व इनफोसिस लहूलुहान हुए पड़े हैं और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां होने के कारण ओएनजीसी व बीएचईएल मंदड़ियों के निशाने पर हैं क्योंकि एफआईआई नहीं चाहते कि सरकार को इनके एफपीओ का बेहतर मूल्य मिल सके। सरकार को जिस दिन इस बात का अहसास हो जाएगा कि एफआईआई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के स्टॉक्स को हमेशा दबाने-नचाने में लगे रहते हैं, वह इनसे बेहद कड़ाई से पेश आएगी।

रसायन उद्योग की हालत एकदम चमाचम चल रही है। इसे इस क्षेत्र की कंपनियों के नतीजों और शेयरों की चाल से समझा जा सकता है। कनोरिया केमिकल्स की एक डिवीजन आदित्य बिड़ला समूह ने इसीलिए खरीद ली क्योंकि उसकी मांग है। गुजरात अल्कलीज के शुद्ध लाभ में 200 फीसदी इजाफा हुआ और उसका सकल लाभ मार्जिन 8 फीसदी से बढ़कर 25 फीसदी हो गया है। डाईअमीन्स एंड केमिकल्स ने जबरदस्त नतीजे पेश किए हैं। इंडो बोरैक्स के परिणाम भी अच्छे रहे हैं और हिंदुस्तान कंपोजिट ने इस कंपनी में 6 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली है। विनति ऑर्गेनिक्स ने फिर शानदार-जानदार नतीजे हासिल किए हैं।

हालांकि कैम्फर एंड एलायड प्रोडक्ट्स ने अभी तक चौथी तिमाही ने परिणाम घोषित नहीं किए हैं, लेकिन पिछले दो महीनों में कपूर के दाम 15 फीसदी बढ़ जाने के कारण कंपनी का धंधा एकदम चौकस चल रहा है। इसका शेयर पिछले एक महीने में 255 रुपए से गिरकर 225 रुपए पर आ चुका है। यकीनन यह काफी दबा हुआ है क्योंकि इसका भाव बुक वैल्यू से महज 1.5 गुना है। इसमें दो साल तक बने रहने का नजरिया रखना चाहिए। मेरा मानना है कि तब तक कंपनी की सालाना आय 1000 करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच जाएगी। विष्णु केमिकल्स और भगीरथ केमिकल्स का धंधा भी जबरदस्त चल रहा है। रसायन इस समय का उभरता हुआ उद्योग बन गया है।

खैर, कल हमने कहा था कि बाजार अब जमीन पकड़ चुका है और मैं फिर दोहराता हूं कि बाजार एकदम जमीन पर आ चुका है। सेंसेक्स कल नीचे में 17,786 तक चला गया था। अब इसको यहां से नीचे नहीं जाना है। सेटलमेंट के अंत में सारे पाप जमीन के नीचे गाड़ दिए जाते हैं और आज हम यही देख रहे हैं। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में एक फीसदी से ज्यादा बढ़त दर्ज की जा चुकी है। शाम होते-होते तेजी का जोश बढ़ गया है। असल बाजार को सेटलमेंट के आखिर दिन चाहे इधर या चाहे उधर, किसी भी तरफ मिल रहे मौके पर दोबारा सोचने की आदत नहीं है।

रिलांयस का उभार बाजार में सुधार का एकसूत्रीय एजेंडा है। बाजार में यह भी चर्चा है कि दबाव से गुजर रहा अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) अपने 1,01,577 करोड़ रुपए की औसत आस्तियों (एयूएम) वाले रिलायंस म्यूचुअल फंड की कुछ हिस्सेदारी बेच सकता है। इससे उसे समूह की कंपनियों में जान डालने के लिए नकद रकम मिल जाएगी। यह भी संभव है कि समूह थोड़े एफसीसीबी (विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांडों) को शेयरों में बदल दे।

इंसान हमेशा अपनी हदों को तोड़कर बढ़ा सकता है। यह उसकी सबसे बहुमूल्य निधि है।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का फीस-वाला कॉलम है, जिसे हम यहां मुफ्त में पेश कर रहे हैं)

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