बीएचईएल पड़ेगी एल एंड टी पर भारी

सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियरिंग कंपनी बीएचईएल (भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) ने हफ्ते भर पहले सोमवार, 23 मई को घोषित किया कि वित्त वर्ष 2010-11 में उसका टर्नओवर 22.94 फीसदी बढ़कर 43,394.58 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 39.45 फीसदी बढ़कर 6011.20 करोड़ रुपए हो गया है। उसके पास 1.64 लाख करोड़ रुपए के अग्रिम ऑर्डर हैं। लेकिन उसका शेयर शुक्रवार 20 मई के 2074.40 रुपए से भाव से 6.69 फीसदी गिरकर 1935.60 रुपए पर आ गया। इसके बाद गिरते-गिरते अगले तीन दिन में यह नीचे में 1892 रुपए तक चला गया है। बीते शुक्रवार, 27 मई को यह बीएसई (कोड – 500103) में 1936 रुपए और एनएसई (कोड – BHEL) में 1936.90 रुपए पर बंद हुआ है।

अच्छे नतीजों के बावजूद ऐसी गिरावट क्यों? सब उम्मीदों और अपेक्षाओं का खेल है। असल में 23 मई को नतीजों की घोषणा के साथ ही बीएचईएल के निदेशक बोर्ड ने कंपनी में सरकार की 5 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी और बेचने की सिफारिश की। अब सरकार को तय करना है कि कंपनी का एफपीओ (फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर) कब आएगा। चूंकि एफपीओ में मूल्य बाजार भाव से कम रखा जाता है और रिटेल निवेशकों व कंपनी कर्मचारियों को 5 फीसदी का डिस्काउंट भी दिया जाता है, इसलिए बीएचईएल के शेयर को उस्ताद लोग पीटकर 26 मई को उसे 52 हफ्ते के न्यूनतम स्तर 1892 रुपए तक गिरा ले गए। देश में कार्यरत विदेशी निवेशक (एफआईआई) व उनसे जुड़े ब्रोकर इस खेल में माहिर हैं।

बाजार में इन खिलाड़ियों की ताकतवर स्थितियों को देखते हुए हमें भी कंपनी के एफपीओ का इंतजार करना चाहिए और जब भी आए, उसमें जरूर निवेश करना चाहिए। वैसे, लंबी अवधि के लिहाज से देखें तो उसका शेयर अब भी आकर्षक स्तर पर है। स्टैंड-एलोन रूप से उसका ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 122.80 रुपए है। इस तरह उसका शेयर अभी 15.76 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, जबकि खुद सेंसेक्स, जिसमें यह खुद भी शामिल है, 19.37 के पी/ई अनुपात पर है।

इंजीनियरिंग क्षेत्र में बीएचईएल के आसपास ठहरनेवाली निजी क्षेत्र की एक ही कंपनी है और वो है – लार्सन एंड टुब्रो। बीएचईएल ने मार्च 2011 की तिमाही में 18,623.42 करोड़ की बिक्री पर 2798.04 करोड़ का शुद्ध लाभ कमाया है। वहीं, एल एंड टी ने इसी अवधि में 15,384.21 करोड़ की बिक्री पर 1686.21 करोड़ का शुद्ध लाभ कमाया है। बीएचईएल का परिचालन लाभ मार्जिन (ओपीएम) 24.25 फीसदी और शुद्ध लाभ मार्जिन (एनपीएम) 15.22 फीसदी है, जबकि एल एंड टी का ओपीएम 19.09 फीसदी और एनपीएम 10.96 फीसदी है।

जाहिरा तौर पर बीएचईएल एल एंड टी से बेहतर स्थिति में है। फिर भी जहां एल एंड टी का शेयर 23.5 के पी/ई के अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, वहीं बीएचईएल का शेयर 15.76 के पी/ई अनुपात। यह है अपेक्षाओं व उम्मीदों के साथ-साथ बाजार शक्तियों के अपरिपक्व होने का असर। कुछ खिलाड़ी सार्वजनिक क्षेत्र के स्टॉक्स को चांपकर बैठे रहते हैं और उठने नहीं देते। जैसे-जैसे यह जग-जाहिर हकीकत जन-जाहिर होती जाएगी, सरकार को इस विसंगति को दूर करना ही होगा।

ब्रोकिंग व निवेश फर्म आईसीआईसीआई सिक्यूरिटीज की एक ताजा रिसर्च रिपोर्ट का आकलन है कि चालू वित्त वर्ष 2011-12 में बीएचईएल का ईपीएस 142.3 रुपए और इसके अगले साल 2012-13 में 154.4 रुपए रहेगा। इस तरह साल भर बाद के ईपीएस को ले तो बीएचईएल का शेयर अभी 13.60 और दो साल बाद के ईपीएस को तो लें तो 12.54 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। अगर हम दो साल बाद 15 का पी/ई अनुपात पकड़े तो बीएचईएल का शेयर 2316 रुपए पर होना चाहिए। यानी, दो साल में कम से कम 20 फीसदी वृद्धि की उम्मीद बीएचईएल में निवेश पर हमें करनी चाहिए। वैसे भी यह शेयर 2007 के बाद से लेकर अब तक इस समय न्यूनतम पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। यह नवंबर 2007 में 61.50 तक के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो चुका है। पिछले महीने अप्रैल 2011 तक में इसका पी/ई अनुपात 26.31 तक गया है, जबकि अभी 15.76 पर है।

कंपनी की कुल इक्विटी अभी 489.52 करोड़ रुपए है जो 10 रुपए अंकित मूल्य के शेयरों में विभाजित है। अब हर शेयर को इसे 2 रुपए अंकित मूल्य के पांच शेयरो में बांटने का फैसला हो चुका है। जब भी इसे लागू किया जाएगा, शेयर का भाव इसी अनुपात में एक बटे पांच हो जाएगा। कंपनी में सरकार की मौजूदा इक्विटी हिस्सेदारी 67.72 फीसदी है, जबकि पब्लिक के पास इसके बाकी 32.28 फीसदी शेयर हैं। 5 फीसदी विनिवेश के बाद सरकार की हिस्सेदारी घटकर 62.72 फीसदी और पब्लिक की बढ़कर 37.28 फीसदी हो जाएगी। इस समय कंपनी में एफआईआई की हिस्सेदारी 12.90 फीसदी और डीआईआई की हिस्सेदारी 12.72 फीसदी है।

इस तरह एफआईआई व डीआईआई को घटा दें तो पब्लिक के पास कंपनी के केवल 6.66 फीसदी शेयर हैं। इसे निश्चित रूप से बढ़ना चाहिए और इसके लिए हमें आगे बढ़कर इस कंपनी में निवेश करना चाहिए। लेकिन थोड़ा अभी और काफी ज्यादा एफपीओ के आने पर। कुछ जानकारों का कहना है कि सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के स्टॉक्स में एफआईआई के निवेश पर रोक लगा देनी चाहिए। लेकिन ऐसा संभव नहीं है क्योंकि ऐसा हो गया तो एफआईआई हल्ला मचाकर पूरे बाजार को ही धूल चटा सकते हैं। फिर भी देर-सबेर तो एफआईआई को उनकी औकात बतानी ही पड़ेगी न!!!

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