हर दिन उछलते दामों के चलते सोने में निवेश बढ़े या न बढे, लेकिन गोल्ड ईटीएफ में निवेश बढ़ रहा है। देश के सबसे बड़े शेयर बाजार नेशनल स्टाक एक्सचेंज में गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) का कारोबार पिछले साल दोगुने से अधिक हो गया। गोल्ड इटीएफ में निवेशकों को सोने को इलेक्ट्रानिक रूप में खरीदने और बेचने की अनुमति होती है। एनएसई में गोल्ड ईटीएफ का कुल कारोबार 2010-11 में बढ़कर 4074.30 रुपए हो गया जोऔरऔर भी

देश में म्यूचुअल फंडों की संख्या बढ़ते-बढ़ते 41 पर पहुंच गई है। लेकिन इनकी आस्तियों का आधे से ज्यादा, 55 फीसदी हिस्सा पांच बड़े म्यूचुअल फंडों के पास है। मार्च 2011 तक के आंकड़ों के मुताबिक म्यूचुअल उद्योग की कुल आस्तियां (एयूएम) 7 लाख करोड़ रुपए की हैं। इसमें से 4 लाख करोड़ की आस्तियां रिलायंस म्यूचुअल फंड, एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, आईसीआईसीआई म्यूचुअल फंड, यूटीआई म्यूचुअल फंड और बिड़ला सनलाइफ म्यूचुअल फंड के पास हैं।और भीऔर भी

आलोचकों की आलोचनाओं को धता बताते हुए बाजार में बजट का उत्साह कायम है। मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी साढ़े तीन फीसदी बढ़ गए। वैसे, सच कहूं तो हमें इस बात की कतई परवाह नहीं करनी चाहिए कि कोई बजट के बारे में क्या कह रहा है क्योंकि हकीकत यही है कि इस बार का बजट पिछले साल से बेहतर है और ऐसे सुधारों से भरा हुआ है जो शेयर बाजार को नई ऊंचाई पर ले जाऔरऔर भी

चालू खाते के बढ़ते घाटे से परेशान सरकार देश में विदेशी पूंजी को खींचने की हरचंद कोशिश कर रही है। इसी के तहत 2011-12 के बजट में जहां कॉरपोरेट बांडों को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निवेश सीमा बढ़ाकर 40 अरब डॉलर कर दी गई है, वहीं म्यूचुअल फंडों को अपनी इक्विटी स्कीमों में सीधे विदेशी निवेशकों से अभिदान या सब्सक्रिप्शन लेने की इजाजत दे दी गई है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने यह घोषणा करते हुएऔरऔर भी

18 फरवरी, शुक्रवार को यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक यू के सिन्हा पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के नए चेयरमैन बनने जा रहे हैं। लेकिन लगता है कि उनके स्वागत की तैयारियों में सेबी ने अभी से ही म्यूचुअल उद्योग के प्रति अपना नजरिया बदलना शुरू कर दिया है। कम से कम वह यह दिखाने की कोशिश में है कि उसने हमेशा म्यूचुअल फंड उद्योग का भला सोचा है और अब भी उसकेऔरऔर भी

लगातार खराब खबरों के वार के बाद बाजार रेपो और रिवर्स रेपो की बढ़त भी झेल गया। इससे आगे क्या? कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजे भी अच्छे चल रहे हैं। उनके लाभ में औसत वृद्धि 20 फीसदी के ऊपर निकल जाएगी, जबकि बाजार में चर्चा 13 फीसदी के आसपास की चल रही थी। रोलओवर का सिलसिला अभी तक बड़ा दयनीय है। गुरुवार को डेरिवेटिव सेटलमेंट का आखिरी दिन है। इसलिए रोलओवर के लिए केवल एक दिनऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने अनिल अंबानी व उनके चार सहयोगियों – सतीश सेठ, एस सी गुप्ता, ललित जालान और जे पी चलसानी से कुल 50 करोड़ रुपए लेकर विदेशी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) और एफसीसीबी (विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांडों) से जुटाई गई राशि के दुरुपयोग के आरोप से मुक्त कर दिया है। सेबी ने शुक्रवार को जारी एक कन्सेंट ऑर्डर के तहत ऐसा किया है। इसमें अनिल अंबानी व उनके सहयोगियों ने न तो आरोप कोऔरऔर भी

1 जनवरी 2011 से कोई भी नेता या अफसर म्यूचुअल फंड में निवेश करते वक्त अपनी पहचान नहीं छिपा सकता। उसे साफ-साफ बताना होगा कि वह एमपी, एमएलए या एमएलसी है कि नहीं। और, यह भी कि वह अगर नौकरशाह है तो सरकार के किस विभाग में काम करता है। यहां तक कि देश के वर्तमान व पुराने प्रधानमंत्री और राज्यों के वर्तमान व पूर्व मुख्यमंत्रियों या राज्यपालों तक को म्यूचुअल फंड में निवेश करते वक्त अपनेऔरऔर भी

अगस्त 2009 में पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी द्वारा एंट्री लोड खत्म कर देने से म्यूचुअल फंडों की आस्तियां जरूर घटी हैं, लेकिन उनका शुद्ध लाभ बहुत ज्यादा बढ़ गया है। निवेश संबंधी रिसर्च से जुड़ी फर्म मॉर्निंगस्टार की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2009-10 में म्यूचुअल फंडों को संचालित करनेवाली एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) का औसत शुद्ध लाभ तीन गुना या 300 फीसदी बढ़ गया है। 2009-10 में देश के सभी म्चूचुअल फंडों काऔरऔर भी