म्यूचुअल फंड इतने नाकारा क्यों?

लगातार खराब खबरों के वार के बाद बाजार रेपो और रिवर्स रेपो की बढ़त भी झेल गया। इससे आगे क्या? कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजे भी अच्छे चल रहे हैं। उनके लाभ में औसत वृद्धि 20 फीसदी के ऊपर निकल जाएगी, जबकि बाजार में चर्चा 13 फीसदी के आसपास की चल रही थी।

रोलओवर का सिलसिला अभी तक बड़ा दयनीय है। गुरुवार को डेरिवेटिव सेटलमेंट का आखिरी दिन है। इसलिए रोलओवर के लिए केवल एक दिन बचा है क्योंकि कल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर बाजार बंद है। शुक्रवार से हम बजट के महीने वाले सेटलमेंट में प्रवेश कर जाएंगे। संसद में कामकाज सामान्य तरीके से चलेगा। यह अच्छी खबर है। लेकिन ऑपरेटर बी ग्रुप के शेयरों के लिए फंड जुटाने में संघर्ष कर रहे हैं। यह बुरी खबर है। रिटेल निवेशक बाजार में भरोसा, पूंजी और इच्छा-शक्ति तक सब कुछ गंवा चुके हैं। अब तो रिटेल निवेशकों का केवल वही तबका बचा है जिसकी रोजी-रोटी शेयर बाजार से चलती है।

नितांत आवश्यकता इस बात की है कि भारत सरकार रिटेल निवेशकों को शेयर बाजार में वापस लाने और लोगों की बचत को पूंजी बाजार की तरफ मोड़ने के लिए कुछ उपाय घोषित करे। हमारा म्यूचुअल फंड उद्योग भले ही आकार के लिहाज से परिपक्व हो गया हो, लेकिन बाजार को संतुलित करने में वह नाकारा है। वह कॉरपोरेट क्षेत्र के हाथ की कठपुतली बन गया है। इसलिए उसने अपनी दृष्टि और स्वतंत्र हैसियत खो दी है। सेंसेक्स अगर 20 फीसदी बढ़ जाए, तब भी आप किसी भी म्यूचुअल फंड से पूंजी पर 20 फीसदी रिटर्न (आरओआई) की उम्मीद नहीं कर सकते। जबकि आम तौर पर होना यह चाहिए कि सेंसेक्स 20 फीसदी बढ़े तो म्यूचुअल फंड कम से कम 40 फीसदी का रिटर्न दे। लेकिन यह भारत में अभी संभव नहीं है।

इन तमाम कड़वी सच्चाइयों के बावजूद मैं इस समय भारतीय शेयर बाजार में गरदन फंसाने के पक्ष में हूं क्योंकि बहुत सारे स्टॉक्स के साथ इतना बुरा हो चुका है कि आगे कोई गुंजाइश ही नहीं बचती। वैसे, इतने ज्यादा करेक्शन या गिरावट की वजह मेरी समझ से बाहर है। भारतीय स्टॉक्स भी भारतीय अवाम की तरह दो ध्रुवों में बंटे हैं। कुछ बहुत अमीर हैं तो कुछ बहुत गरीब।

डर आपको सुन्न कर देता। जिज्ञासा आपको अदम्य ऊर्जा से भर देती है। इसलिए डरने के बजाय जानने में ज्यादा दिलचस्पी रखें। सब कुछ चकाचक हो जाएगा।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा। यह कॉलम मूलत: सीएनआई रिसर्च से लिया जा रहा है)

1 Comment

  1. अनिल जी, चक्री अभी तक नहीं आई, स्वास्थ तो ठीक है, आपका?

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