दावोस की चिंता: विकास है, पर रोजगार नहीं

दुनिया भर के करीब ढाई हजार नेता, उद्योगपति और आर्थिक विश्लेषक अगले पांच दिन (26 से 30 जनवरी) तक बर्फ से ढंके आल्प्स पहाड़ियों के बीच स्विटजरलैंड के दावोस रिजॉर्ट में विश्व अर्थव्यवस्था के भविष्य पर चर्चा करेंगे। सभी की चिंता इस बात को लेकर है कि खासकर अमीर राष्ट्रों में आर्थिक वृद्धि रोजगार के समुचित अवसर क्यों नहीं पैदा कर पा रही है।

जिनेवा का वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) इन पांच दिनों के दौरान दुनिया की शीर्ष 1000 कंपनियों के 1400 अधिकारियों, 30 देशों की सरकारों के प्रमुखों, प्रख्यात शिक्षाविदों, कलाकारों और धार्मिक नेताओं की मेजबानी करेगा। भारत के 130 लोग इस बैठक में भागीदारी कर रहे हैं, जिनमें दिल्ली के चिन्मय मिशन के प्रमुख भी हैं।

दुनिया के प्रमुख उद्योगपतियों, नेताओं, धार्मिक नेताओं और बुद्धिजीवियों की यह बैठक ऐसे समय हो रही है कि जब वैश्विक अर्थव्यवस्था 2008 और 2009 में मिले झटकों से पूरी तरह उबर नहीं पाई है। विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था की हालत में जो सुधार आया है उसकी मुख्य वजह घरेलू मांग है, पर पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के पटरी पर लौटने की रफ्तार काफी धीमी है।

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