एक ही चीज कहीं सस्ती मिल रही हो तो हर किसी को लालच आ सकता है। लेकिन पूंजी बाजार के बारे में लालच हमेशा ही बुरी बला होती है। संदर्भ म्यूचुअल फंड में निवेश का है। अगर एक ही श्रेणी की दो म्यूचुअल फंड स्कीमें हैं, एक पुरानी और एक नई तो निवेशक नई स्कीम को खरीदना पसंद करता है क्योंकि उसकी यूनिटें 10 रुपए अंकित मूल्य पर ही जारी की जाती हैं, जबकि पुरानी स्कीम काऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंडों को निवेशकों के बीच लोकप्रिय बनाने की ठान ली है। इसी कोशिश के तहत उसने तय किया है कि अब म्यूचुअल फंडों को निवेशकों से मिली शिकायतों का पूरा कच्चा-चिट्ठा अपनी व एम्फी (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) की वेबसाइट के साथ अपने सालाना रिपोर्ट में भी प्रकाशित करना होगा। सेबी ने एक नए सर्कुलर में यह व्यवस्था दी है। सेबी का कहनाऔरऔर भी

ज्यादातर भारतीय म्यूचुअल फंड में निवेश करने से घबराते हैं। ऐसा इसलिए कि एक तो उन्हें इसमें भारी जोखिम नजर आता है, दूसरे वे जानते ही नहीं कि निवेश का यह माध्यम काम कैसे करता है। यह बात रिसर्च व विश्लेषण से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय फर्म बोस्टन एनालिटिक्स की ताजा रिपोर्ट से सामने आई है। बोस्टन एनालिटिक्स ने पिछले महीने देश के 15 शहरों में तकरीबन 10,000 लोगों से बातचीत के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। रिपोर्ट काऔरऔर भी

जीवन बीमा कंपनियों के यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) पर नियंत्रण का झगड़ा शुक्रवार को अपने चरम पर पहुंच गया, जब सेबी ने साफ-साफ कह दिया कि उसके पास पंजीकरण कराए बगैर कोई बीमा कंपनी यूलिप या ऐसा कोई भी उत्पाद नहीं ला सकती है जिसमें बीमा के अलावा निवेश का भी हिस्सा हो। पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्णकालिक सदस्य प्रशांत सरन की तरफ से सुनाए गए 11 पेजों केऔरऔर भी

म्यूचुअल फंडों में निवेश के कई फायदे हैं। 1. पेशेवर प्रबंधन: म्यूचुअल फंडों में निवेश से आप अनुभवी और कुशल पेशेवरों की सेवाएं पा सकते हैं। म्यूचुअल फंडों से समिर्पत रिसर्च टीमें जुड़ी होती हैं, जो कम्पनी की निष्पादन क्षमता और सम्भावनाओं का विश्लेषण करती हैं और योजना के उद्देश्य प्राप्त करने के लिए उपयुक्त निवेश विकल्पों का चयन करती हैं। 2. विविधीकरण: म्यूचुअल फंड कई उद्योगों व क्षेत्रों की कम्पनियों में निवेश करते हैं। ऐसे विविधीकरणऔरऔर भी

शुक्रवार को रिजर्व बैंक की घोषणा से पहले ही हमने कह दिया था कि ब्याज दरें बढ़नेवाली है। इसी आधार पर हमने स्टैंडर्ड एंड पुअर्स की तरफ से भारत की रेटिंग में सुधार के बावजूद निफ्टी के लिए ऊपरी सीमा 5280 रखी थी। उसी दिन देर शाम को रिजर्व बैंक ने रेपो और रिवर्स रेपो की दरें बढ़ाकर ब्याज दरों में वृद्धि का आधार तैयार कर दिया। इसके प्रभाव से अनुमान के अनुरूप बाजार आज 200 अंकऔरऔर भी

एक चैनल पर मैं उसी शख्स को देख रहा था जिसने दावा किया था कि निफ्टी 3800 तक गिर जाएगा। मैं उसका चेहरा देखता रह गया क्योंकि वो अब भी कह रहा था कि बाजार में कोई दम नहीं है, तेजी जल्दी ही पिघल जाएगी और अभी कुछ नहीं, बस शॉर्ट कवरिंग चल रही है और बाजार गिरावट के मुहाने पर खड़ा है। अब भी वह शख्स दावे के साथ कह रहा था कि 3800 नहीं तोऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के निर्देश के बावजूद अब भी वितरक/ब्रोकर ग्राहकों के कागजात म्यूचुअल फंड को नहीं दे रहे हैं। सेबी ने बीते दिसंबर माह से ही यह नियम बना दिया हैं कि म्यूचुअल फंड निवेशक को किसी दूसरे ब्रोकर या मध्यस्थ की सेवा लेने के लिए पुराने ब्रोकर से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेने की जरूरत नहीं है। लेकिन ब्रोकर अब भी किसी न किसी बहाने ग्राहक के निवेश संबंधी दस्तावेज देने में आनाकानी करऔरऔर भी