मैं कल करीब दर्जन भर दमदार विश्लेषकों के मिला और वे सभी कच्चे तेल की चढ़ाई को लेकर चिंतित हैं। उन्हें लगता है कि कच्चे तेल के दाम जल्दी ही 130-140 डॉलर प्रति बैरल तक चले जाएंगे। इसलिए वे खुद भी शॉर्ट सेलिंग कर रहे हैं और दूसरों को भी ऐसा करने की सलाह दे रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान लगाने के बारे में मेरा रिकॉर्ड काफी अच्छा रहा है। 2005 में जब यहऔरऔर भी

जो लोग ज़िंदगी को बोझ समझते हैं, वे कुछ न करें तो चलता है। लेकिन जो लोग ज़िंदगी को जमकर जीना चाहते हैं, वे अगर आकस्मिकता की तैयारी नहीं रखते तो वे बिंदास नहीं, बेवकूफ हैं।और भीऔर भी

आदमी को वहीं से उठना चाहिए जहां वह गिरता है। जीवन में यही नियम लागू होता है। जो गिरते कहीं और हैं और उठना कहीं और से चाहते हैं वे कभी खड़े नहीं हो पाते, दौड़ना तो बहुत दूर की बात है।और भीऔर भी

करीब 30 लाख लोगों को बतौर एजेंट रोजगार देनेवाली जीवन बीमा कंपनियां इस समय अपना कमीशन बचाने और एजेंटों को ग्रेच्युटी व नवीनीकरण प्रीमियम से वंचित करने के लिए नया दांव खेल रही हैं। वे हर साल जितने नए एजेंटों की भरती करती हैं, उससे ज्यादा एजेंटों को निकाल देती हैं। बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) की 2009-10 की सालाना रिपोर्ट से यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में वित्त वर्ष 2009-10 में कुलऔरऔर भी

ज़िंदगी में पुराने का जाना और नए का आना रिले रेस की तरह नहीं, समुद्र की लहरों की तरह चलता है। लेकिन हम पुरानी लहर के भीतर बन रही नई लहर को नहीं देख पाते और खामखां परेशान हो जाते हैं।और भीऔर भी

ज़िंदगी की तीखी चढ़ाई में हमेशा आस्था की जरूरत पड़ती है जिसके सहारे आप अंदर-बाहर की हर प्रतिकूलता से निपटते हैं। इस आस्था का प्रतीक गुरु, मित्र, देव, पेड़ या आपका कोई प्रिय भी हो सकता है।और भीऔर भी

हर कोई अपनी ज़िंदगी जीने को स्वतंत्र है। लेकिन जैसे ही आप देश या समाज की सामूहिक जिम्मेदारी संभालते हैं, आपकी निजता खत्म हो जाती है, अपने निजत्व को निर्वासित करना पड़ता है।और भीऔर भी

जिंदगी में जितना वॉयड होता है, चाहतें उतनी लाउड होती हैं। धंधेबाज हमारे इस रीतेपन को अमानवीय होने की हद तक भुनाते हैं। उन्हें बेअसर करना है तो हमें अपना रीतापन भरना होगा, चाहतें अपने-आप सम हो जाएंगी।और भीऔर भी

जीवन की कमियां, कमजोरियां, अधूरापन जब भावनाओं का आधार होता है तो वे अच्छी होती हैं, सच्ची होती हैं। लेकिन अच्छी-सच्ची भावनाएं अक्सर विचारधाराओं की सूली चढ़ जाती हैं। ये कतई अच्छी बात नहीं है।और भीऔर भी

कोटर से रह-रह कर बाहर झांकने से कुछ नहीं होगा। बाहर खिलंदड़ी मची है। हर रंग खिल रहे हैं। सब कुछ है। लेकिन आपके बिना बहुत कुछ अधूरा है। कोटर में आप भी अधूरे हैं तो बाहर छलांग क्यों नहीं लगाते जनाब!और भीऔर भी