प्रस्तावित लोकपाल विधेयक के लगभग सभी 40 मुख्य बिंदुओं पर सरकार और गांधीवादी अण्णा हज़ारे के पक्ष के बीच एक दौर की बातचीत सोमवार को पूरी हो गई। लेकिन प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को इस विधेयक के दायरे में लाने के बारे में अभी कोई सहमति नहीं बन पाई। सरकार हालांकि, करीब आधे बिंदुओं पर सैद्धांतिक रूप से सहमति हो चुकी है। लोकपाल विधेयक का कारगर मसौदा तैयार करने के लिए गठित संयुक्त समिति की वित्त मंत्री प्रणवऔरऔर भी

डाक विभाग इस साल प्रीपेड स्मार्ट कार्ड पेश करेगा। यह कार्ड डेबिट कार्ड जैसा होगा जिसका इस्तेमाल दुकानॆं पर बिल का भुगतान करने और इंटरनेट पर खरीदारी आदि के लिए किया जा सकेगा। यह जानकारी आईटी और संचार मंत्री कपिल सिब्बल ने मंगलवार को राजधानी दिल्ली में दी। सिब्बल के पास टेलिकॉम और एचआरडी मंत्रालय भी है। सिब्बल ने कहा, ‘‘डाक विभाग रिजर्व बैंक से मंजूरी मिलने का इंतजार कर रहा है और 15 मई तक वहऔरऔर भी

अण्णा हजारे के समर्थन में देश भर से भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए उठ रही आवाज का साथ हिंदी के उन साहित्यकारों व बुद्धिजीवियों ने भी दिया है जो अमूमन गोष्ठियों व सेमिनारों में जुगाली करते रहते हैं। उनका कहना है कि लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए बनने वाली समिति में जनता के बीच से 50 फीसदी लोग होने चाहिए। जानेमाने आलोचक डॉ. नामवर सिंह ने कहा, ‘‘अण्णा हजारे की जन लोकपाल संबंधी मांग बहुतऔरऔर भी

भ्रष्टाचार के खिलाफ अण्णा हजारे के आमरण अनशन को मिल रहा जन-समर्थन तीन दिनों में रंग लाने लगा है। दो दिन पहले तक इस अनशन को अनावश्यक व असामयिक बतानेवाली कांग्रेस के स्वर बदल गए हैं और यूपीए सरकार लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए संयुक्त समिति बनाने को तैयार हो गई है। वह इस पर भी तैयार है कि नया लोकपाल विधेयक संसद के आनेवाले मानसून सत्र में पेश कर दिया जाएगा। लेकिन वहऔरऔर भी

दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल का कहना है कि वे देश में उपलब्ध कुल स्पेक्ट्रम का ऑडिट कराने के प्रस्ताव के पक्ष में हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने स्पेक्ट्रम का ऑडिट कराने का प्रस्ताव किया है। कैग द्वारा स्पेक्ट्रम का ऑडिट कराने से यह पता चल सकेगा कि वर्ष 2000 से आगे किस लागत पर निजी दूरसंचार ऑपरेटरों को कितना स्पेक्ट्रम आवटित किया गया। राजधानी दिल्ली में मंगलवार को उद्योग संगठन फिक्की की 83वीं सालाना आमसभाऔरऔर भी

पूर्व दूरसंचार मंत्री अरुण शौरी ने इस आरोप को पूरी तरह मनगढ़ंत करार दिया कि उन्होंने वर्ष 2003 में नए लाइसेंसों के लिए बोली लगाये जाने की प्रक्रिया के विपरीत ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की नीति अपनाने को मंजूरी दी थी। वर्ष 2001 से 2009 के बीच दूरसंचार मंत्रालय द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाओं की पड़ताल कर चुके सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति शिवराज पाटिल की समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2003 में बिना किसी दिशानिर्देशऔरऔर भी

वर्ष 2001-2008 के दौरान मोबाइल फोन सेवा कंपनियों को 2जी सेवाओं के लिए रेडियो स्पेक्ट्रम के आवंटन की प्रक्रिया की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) शिवराज वी पाटिल समिति ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। न्यायमूर्ति पाटिल ने कहा कि उन्होंने आवंटन प्रक्रिया में कुछ खामियां पाई हैं और उन्होंने अपनी रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया है, पर उन्होंने संवाददाताओं को खुद इसका विवरण देने से मना कर दिया। पाटिल नेऔरऔर भी