अमेरिका का डाउनग्रेड होना चाहिए था या नहीं, यह अब बहस का नहीं, इतिहास का मसला बन चुका है क्योंकि एस एंड पी उसकी संप्रभु रेटिंग को डाउनग्रेड कर एएए से एए+ पर ला चुकी है। हो सकता है कि एएए रेटिंग वाले दूसरे देशों को भी बहुत जल्द ही डाउनग्रेड कर दिया जाए। लेकिन क्या इस तरह के डाउनग्रेड से सब कुछ खत्म हो जाता है? ऐसा कतई नहीं है। दुनिया और बाजार चलते रहे हैं,औरऔर भी

इस्पात इंडस्ट्रीज को कर्ज और घाटे के बोझ से मुक्त होने की राह मिल गई और जेएसडब्ल्यू स्टील इस सौदे के बाद मार्च 2011 तक देश में स्टील की सबसे बड़ी उत्पादन बन जाएगी। उसकी सालाना उत्पादन क्षमता हो जाएगी 143 लाख टन यानी सेल से भी ज्यादा। टाटा समूह भी यह गौरव नहीं हासिल कर सका। आर्सेलर को खरीदनेवाले लक्ष्मी निवास मित्तल भी भारत में यह हैसियत नहीं हासिल कर सके। उनके ही भाइयों – प्रमोदऔरऔर भी

बालासोर एलॉयज (बीएसई कोड – 513142) कल 8.59 फीसदी बढ़कर 35.40 रुपए पर बंद हुआ। औसत वोल्यूम जहां 1.86 लाख शेयरों का रहता था, वहीं कल 4.96 लाख शेयरों में सौदे हुए और जिसमें से 65 फीसदी से ज्यादा डिलीवरी के लिए थे। कंपनी बीएसई में ही लिस्टेड है, एनएसई में नहीं। उसके शेयर ने 16 सितंबर से नए चक्र में प्रवेश किया है। तब यह 27.55 रुपए पर बंद हुआ था। अब तक करीब 28.5 फीसदीऔरऔर भी

हम साबित करने बैठे हैं कि बाजार के लिए हिन्डेनबर्ग या कोई दूसरा अपशगुन कभी कोई मायने नहीं रखता। न ही चार्टों के आधार पर की गई टेक्निकल एनालिसिस, खरीद-बिक्री की सलाह, ज्योतिष के नुस्खे और वैल्यूएशन के बारे में मंदी के आख्यान कोई काम आते हैं। आप खुद ही देखिए कि होंडा के अलग होने की खबर आ जाने के बाद भी सफेदपोश एनालिस्ट हीरो होंडा को मूल्यवान स्टॉक बताकर खरीदने की सलाह दिए जा रहेऔरऔर भी

सही स्टॉक, सही वक्त और सही ट्रिगर – ये तीन सही चीजें किसी भी शेयर की चाल के लिए बाजार के तीन तिलंगों से भी बेहतर संयोग का काम करती हैं। आईटीआई आज 10.7 फीसदी बढ़कर 46 रुपए पर पहुंच गया और बंद हुआ 5.42 फीसदी की बढ़त के साथ 43.80 रुपए पर। इस्पात इंडस्ट्रीज में तकरीबन छह महीनों से हम पूरे धैर्य के साथ इंतजार कर रहे थे और अब अंततः इस स्टॉक से सहवाग जैसीऔरऔर भी

1947 में आजाद हुआ देश और 1947 में ही बनी अतुल लिमिटेड। यह अरविंद मिल्स के लालभाई समूह की कंपनी है। इसके छह बिजनेस डिवीजन हैं – एग्रो केमिकल, एरोमैटिक्स, बल्क केमिकल व इंटरमीडिएट, रंग, फार्मा संबंधी उत्पाद व पॉलिमर और सभी स्वतंत्र रूप से धंधा बढ़ाने में लगे रहते हैं। कंपनी के 36,000 से ज्यादा शेयरधारक हैं। उसके दफ्तर अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, चीन व वियतनाम तक में हैं जहां से वह अपने विदेशी ग्राहकों की जरूरतेंऔरऔर भी

पिछले तीन महीनों में वीसा स्टील का शेयर 45 रुपए से करीब 15% घटकर 38 रुपए के आसपास आ गया है। 7 अप्रैल 2010 को यह ऊपर में 45.80 और नीचे में 43.70 तक जाने के बाद 44.15 रुपए पर बंद हुआ था। कल 7 जुलाई 2010 को इसका बंद भाव बीएसई में 38.55 और एनएसई में 38.40 रुपए रहा है। सवाल उठता है कि क्या ढलान पर लुढकते इस शेयर से पैसा बनाया सकता है? जानकारऔरऔर भी