पिछले कुछ महीनों से उठे गुबार के बाद थोड़े-से भी जानकार निवेशकों में यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पोडक्ट) को लेकर इतनी हिकारत पैदा हो गई है कि वे इसमें पैसा लगाना सरासर बेवकूफी समझते हैं। आम धारणा यही है कि बीमा लेना हो तो टर्म इंश्योरेस लेना चाहिए और निवेश का लाभ लेना हो तो सीधे म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना चाहिए। इन दोनों के घालमेल यूलिप में पैसा लगाने का मतलब सिर्फ एजेंट की जेब भरनाऔरऔर भी

अपनी राजनीतिक पहुंच और शेयर बाजार के निवेश में बीमा कंपनियों की बड़ी अहमियत के कारण यूलिप पर नियंत्रण में सेबी को पछाड़ने के बाद बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) बड़ी तेजी से यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी) को दुरुस्त बनाने में लग गई है। सोमवार को इरडा के चेयरमैन जे हरिनारायण ने दिल्ली में एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि जल्दी यूलिप के बारे में नए दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे ताकि इसे पॉलिसीधारकों केऔरऔर भी

अब 8 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में यूलिप विवाद पर सुनवाई का कोई मतलब नहीं रह गया है क्योंकि सरकार ने इससे जुड़े चार के चार कानूनों – आरबीआई एक्ट 1934, इश्योरेंस एक्ट 1938, सेबी एक्ट 1992 और सिक्यूरिटीज कांटैक्ट रेगुलेशन एक्ट 1956 में संशोधन कर दिया है। शुक्रवार 18 जून को देर रात राष्ट्रपति की तरफ से इन संशोधनों को अध्यादेश के रूप में जारी करवा दिया गया है। जब तक संसद के दोनों सदन किसीऔरऔर भी

हमारे यहां अभी तक का चलन यही है कि बीमा खरीदा नहीं जाता बल्कि यह बेचा जाता है। लिहाजा बीमा एजेंट जहां भावी ग्राहकों को आधी-अधूरी जानकारियां देता है वहीं कॉरपोरेट एजेंट से भी ग्राहकों को काफी शिकायतें हैं। बीमा पॉलिसी की ऑनलाइन खरीदारी का रास्ता कांटों से भरा हुआ है तो टेलीसेल्स यानी टेलीफोन के जरिए बीमा उत्पादों की बिक्री की प्रक्रिया से ग्राहक समुदाय नाखुश है। शिकायतें बहुत: एक अनुमान के अनुसार भारतीय बीमा उद्योगऔरऔर भी

बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) के चेयरमैन जे हरिनारायण तहेदिल से बीमा एजेंटों के साथ हैं। दुनिया भले ही कहे कि बीमा एजेंट भारी-भरकम कमीशन लेते हैं, खासकर यूलिप प्लान में। लेकिन इरडा प्रमुख मानते हैं कि अभी हमारे बीमा उद्योग में एजेंट का जितना कमीशन है, उससे सस्ते में बीमा उत्पादों के बेचने का कोई दूसरा तरीका नहीं। और, उन्होंने यह बात आंकड़ों से साबित की है। मंगलवार को मुंबई में भारतीय बीमा संस्थान (आईआईआई) केऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए या इरडा) द्वारा हाल में उठाए गए तमाम कदमों की तारीफ की है और भरोसा जताया है कि यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेस पॉलिसी) पर उठे विवाद को जल्द ही सुलझाया लिया जाएगा। वित्त मंत्री मंगलवार को मुंबई के बांद्रा कुरला कॉम्प्लेक्स में भारतीय बीमा संस्थान (आईआईआई) के नए परिसर के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। बता दें कि यूलिप के निवेश के हिस्से पर नियंत्रणऔरऔर भी

जीवन बीमा कंपनियों का धंधा चौचक चल रहा है। अप्रैल, 2010 में उन्होंने कुल 5746.33 करोड़ रुपए का प्रीमियम इकट्ठा किया है। यह रकम अप्रैल, 2009 के कुल 3601.58 करोड़ रुपए के प्रीमियम से 59.55 फीसदी अधिक है। देश में कुल 23 जीवन बीमा कंपनियां सक्रिय हैं। 22 निजी क्षेत्र की और एक एलआईसी। लेकिन अकेले एलआईसी बाकी 22 पर भारी है। अप्रैल 2010 में उसका प्रीमियम संग्रह 4173.69 करोड़ रुपए रहा है जो सारी बीमा कंपनियोंऔरऔर भी

पिछले महीने पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी की तरफ से यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी) पर कसे गए शिकंजे ने लगता है हमारी बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) को झकझोर कर रख दिया है। अब वह एक-एक कर ऐसे कदम उठा रही है जो सेबी की तरफ से उठाए गए एतराज का जवाब लगते हैं। इरडा ने यूलिप उत्पादों व कालातीत या लैप्स हो चुकी पॉलिसियों को लेकर नया रेगुलेशन लाने की पेशकश की है। इसमें खासऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भरोसा जताया है कि यूलिप के अधिकार क्षेत्र को लेकर पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी और बीमा नियामक संस्था आईआरडीए (इरडा) के बीच उठा विवाद जल्दी ही सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने एक निजी बिजनेस चैनल के साथ बातचीत में यह विश्वास व्यक्त किया। वित्त मंत्री ने कहा कि मैं जानता हूं कि क्या हो रहा है, मुझे पूरा विश्वास है कि मामले को जल्द सुलझा लिया जाएगा। बता दें कि यूलिप (यूनिटऔरऔर भी

पहली जुलाई 2010 या उसके बाद किसी भी यूलिप (यूनिट लिंक्ड इश्योरेंस पॉलिसी) के पेंशन प्लान में सुरक्षा कवच या सम-एश्योर्ड रखना जरूरी होगा। बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए ने सोमवार को सभी जीवन बीमा कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों को एक सर्कुलर भेजकर यह निर्देश दिया है। अभी तक पेंशन प्लान में जीवन बीमा कंपनियां कुछ भी सम-एश्योर्ड नहीं देती हैं। पॉलिसी काल में अगर बीमाधारक की मृत्यु हो जाती है तो उसे तब तक अपना जमा प्रीमियमऔरऔर भी