बाजार में ज्यादा गिरने की गुंजाइश अब बची नहीं है। लेकिन हमारा बाजार इतना खोखला है कि यहां डेरिवेटिव्स के जरिए कृत्रिम स्तर बना दिए जाते हैं। यूं तो इस हफ्ते निफ्टी 4742.80 से शुरू होकर आज 4866 पर बंद हुआ। लेकिन सारी अच्छी खबरों के बावजूद इसे गिराकर 4400 से 4000 तक पहुंचा दिया जाए तो मुझे कोई अचंभा नहीं होगा। असल में अपने यहां पिछले 12 महीनों में निचले स्तरों, निफ्टी के औसतन 5000 केऔरऔर भी

शेयर बाजार में भले ही छोटे समय में ऑपरेटरों और उस्तादों की चलती हो, लेकिन लंबे समय में हमेशा निवेशकों की ही चलती है। बस जरूरत है तो मजबूत व संभावनामय कंपनियों के चयन की। और, बाजार में ऐसी कंपनियों की कोई कमी नहीं है। एक ताजा अध्ययन में बाजार में लिस्टेड ऐसी 500 कंपनियों की सूची पेश की गई है, जिन्होंने पिछले दस सालों (नवंबर 2001 से लेकर नवंबर 2011) में निवेशकों को लाभांश व शेयरोंऔरऔर भी

अजीब खींचतान का शिकार रहा बाजार। आईटी सेक्टर नीचे खींच रहा था तो बैंकिंग सेक्टर ऊपर। इनफोसिस ने भविष्य के अनुमान का झटका दिया तो एचडीएफसी के नतीजे बाजार की सोच से कमतर रहे। इस ऊंच-नीच और खींचतान में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की अप्रत्याशित वृद्धि भी बाजार का मूड उठा नहीं सकी। निफ्टी दिन में 11 बजे के आसपास 4869.20 तक उठ गया। लेकिन सवा घंटे के भीतर ही 4803.90 तक गोता लगा गया। अंत में बंदऔरऔर भी

आप सभी से हमारी विनम्र गुजारिश है कि बाजार के तमाम मध्यवर्तियों की तरफ से बिना वजह किए जानेवाले डाउनग्रेड व अपग्रेड को लेकर बहुत चौकन्ने रहें। जैसे, बाजार कल और आज मूडीज द्वारा भारत की विदेशी मुद्रा रेटिंग को अपग्रेड करने पर बहक गया। हकीकत यह है कि भारत सरकार के बांडों की रेटिंग मूडीज ने पिछले महीने 20 दिसंबर को ही बढ़ा दी थी। इसलिए, रुपया जब पिछले छह महीनों में डॉलर के सापेक्ष करीब-करीबऔरऔर भी

शेयर बाजार किसी भी आस्ति वर्ग से ज्यादा रिटर्न देनेवाला माध्यम है। यहां निवेश करने के दो ही रास्ते हैं। एक, अपनी रिसर्च के दम पर सीधे शेयरों को चुनकर निवेश करना और दो, म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश करना। अगर आप अपनी रिसर्च नहीं कर सकते तो आपके लिए एकमात्र रास्ता म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों का है। वैसे, अपने स्तर पर रिसर्च मुश्किल नहीं है। हम इस कॉलम के जरिए यही साबित करने और सिखानेऔरऔर भी

हम निफ्टी में 4650 से ही लांग रहने की सलाह दे रहे थे और निफ्टी वाकई 4820 का बहुप्रतीक्षित प्रतिरोध स्तर पार कर गया है। आज यह 2.25 फीसदी की बढ़त लेकर 4849.55 पर बंद हुआ है। तेजी का एक माहौल परवान चढ़ रहा है। इसके पीछे तमाम कारक हैं। जैसे, दुनिया के बाजारों में सुधार, कमोडिटी के भावों में गिरावट जिससे वहां से निकलकर धन दूसरे माध्यमों में जाने लगा है, भारत में खाद्य मुद्रास्फीति काऔरऔर भी

निश्चित तौर पर बाजार इस समय खुद को जमा रहा है क्योंकि तमाम मिड कैप स्टॉक्स अब पलटकर उठने लगे हैं। निश्चित तौर पर बाजार इस समय खुद को जमा रहा है क्योंकि तमाम मिड कैप स्टॉक्स अब पलटकर उठने लगे हैं। साथ ही बहुत से मिड कैप व स्मॉल कैप स्टॉक्स भी काफी संभावना दिखा रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू), फर्टिलाइजर और अब यहां तक कि चीनी जैसे क्षेत्रों में भी तेजी की दिपदिपऔरऔर भी

जनवरी 2008 में 130.35 रुपए और जून 2009 में 91.75 रुपए पर रहा जीएमआर इंफ्रास्ट्रक्चर का एक रुपए का शेयर जून 2010 में जब 54.40 रुपए तक आ गया तो बाजार के लोगों ने बताया और हमें भी लगा कि यह शेयर जरूर ऊपर जाएगा। 15 जून 2010 को इसके बारे में हमने पहली बार लिखा तो ठीक एक दिन पहले यह 55.40 रुपए पर था और बीएसई व एनएसई को मिलाकर उसमें कुल करीब 35 लाखऔरऔर भी

बाजार में 11 बजे से 12.45 बजे तक का विशेष ट्रेडिंग सत्र। पौने दो घंटे का कारोबार। बाजार लगभग सपाट। निफ्टी व सेंसेक्स में मामूली गिरावट। लेकिन फर्टिलाइजर कंपनियों के शेयर सब्सिडी की खबर के चलते उछल गए। लेकिन उनकी यह उठान समय के साथ थम जाएगी। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में हमने पिछले हफ्ते के शुरू में ही खरीद की सलाह दी थी और हमने जो कहा था, उसे हासिल कर लिया है। शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफऔरऔर भी

बाजार में ढाई बजे तक गिरावट का माहौल रहा। फिर वह उठने लगा। लेकिन 4794.90 तक जाने के बावजूद कमोबेश कल के समान स्तर 4754.10 पर बंद हुआ। वैसे, इस बार की गिरावट भी मुझे बेहतर लग रही है क्योंकि बहुत सारे स्टॉक्स खास किस्म की चमक दिखा रहे हैं जिसका मतलब है कि उनके जमने की प्रक्रिया जारी है। बाजार जमने में जितना ज्यादा वक्त लगाएगा, उसमें बढ़त का लक्ष्य उतना ही उठता जाएगा। खाद्य मुद्रास्फीतिऔरऔर भी