रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के बायबैक प्रस्ताव ने काफी निराश कर दिया। उसका शेयर तो बायबैक की घोषणा के पहले ही 15 फीसदी की बड़ी बढ़त ले चुका था। ऐसे में शुक्रवार के बंद भाव पर महज 10 फीसदी का प्रीमियम निवेशकों को मंजूर नहीं है। खासकर तब, जब कंपनी के तीसरी तिमाही के नतीजे बाजार की अपेक्षा से भी काफी कमजोर रहे हैं। निवेशकों की इसी निराशा को दर्शाते हुए आरआईएल का शेयर आज 2.66 फीसदी गिरकरऔरऔर भी

डाई अमीन्स एंड केमिकल्स वडोदरा की कंपनी है। 1982 से विशिष्ट किस्म के रसायन बना रही है। देश के इथाइल अमीन्स के संगठित बाजार की वह इकलौती खिलाड़ी है। इथाइल अमीन्स के एक सेगमेंट पिपराज़ाइन के घरेलू बाजार का लगभग 40 फीसदी हिस्सा उसके कब्जे में है। बहुत सारे उत्पाद उसने देश में पहली बार बनाकर बाजार में उतारे हैं। इस समय वह करीब 20 रसायन बनाती है जिनकी मुख्य खपत दवा उद्योग में होती है। कंपनीऔरऔर भी

उम्मीद के मुताबिक 5050 पर पहुंचकर निफ्टी की सांस फूलती नजर आई। जाने को वह सवा तीन बजे के आसपास ऊपर में 5064.15 तक चला गया। पर बंद हुआ 0.60 फीसदी की बढ़त के साथ 5048.60 पर। वैसे, यह अब भी 5140 तक जा सकता है। लेकिन अगर यह सीधे-सीधे वहां तक चला गया तो बाजार में लांग बने रहने का कोई तुक नहीं रहेगा क्योंकि करेक्शन के बिना कोई अच्छी चीज टिकती नहीं है। मेरा तर्कऔरऔर भी

इंडसइंड बैंक, लगता है जैसे सीधे सिंधु घाटी सभ्यता से निकला चला आ रहा हो। ऊपर से हिंदुजा समूह से वास्ता। 1994 में शुरुआत हुई अनिवासी भारतीयों से जुटाई गई 100 करोड़ रुपए की पूंजी के साथ, जिसमें से 60 करोड़ रुपए प्राइवेट प्लेसमेंट और बाकी 40 करोड़ रुपए सीधे सहयोग से आए। बैंक लगातार बढ़ रहा है। बड़े ग्राहकों के चुनिंदा समूहों को पकड़ने की उसकी रणनीति है। मसलन, देश के दोनों प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों बीएसईऔरऔर भी

ब्लूमबर्ग ने स्टोरी चलाई है कि अमेरिकी शेयर बाजार से संबद्ध स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड पी) सूचकांक में तेजी आ रही है। यह विश्लेषण के आधार पर निकला निष्कर्ष है जो मीडिया अब पेश कर रहा है, जबकि हम तो आपको 2008 से ही समय-समय पर एस एंड पी में लक्ष्य देते रहे है। हमने अनुमान जताया था कि 1250 को पार करते ही एस एंड पी भागने लगेगा। अब ऐसा हो रहा है और हरऔरऔर भी

रिलायंस इंडस्ट्रीज को बाजार का किंग यूं ही नहीं कहा जाता। धीरूभाई के जमाने से ही कंपनी अपने शेयरों को ज्यादा दबने नहीं देती। इसलिए उसके लाखों शेयरधारक हमेशा खुश ही रहते आए हैं। इधर उसका शेयर चालू वित्त वर्ष 2011-12 की तीन तिमाहियों में 35.5 फीसदी का गोता लगा गया तो यह रिलायंस की शेयरधारक संस्कृति के खिलाफ था। सो, धीरूभाई की विरासत के अनुरूप मुकेश अंबानी ने तय कर लिया कि कंपनी अपने शेयर वापसऔरऔर भी

बाजार चंद ऑपरेटरों की मुठ्ठी में कैद है और विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) इन्हीं ऑपरेटरों की मिलीभगत से काम करते हें। इस बात को आधार बनाकर हमने जो कॉल्स पेश की हैं, उन पर एक नजर डालने से ही इसकी सत्यता साबित हो जाती है। एक तरफ एफआईआई ब्रोकरेज हाउस सार्वजनिक तौर पर कहते रहे कि बाजार सेंसेक्स को 13,000 की दिशा में लिए जा रहा है। दूसरी तरफ उनके निशाने पर चढ़े तमाम स्टॉक्स कैश सेटलमेंटऔरऔर भी

जब सारे लोग यूरोपीय देशों के डाउनग्रेड के असर और एफआईआई ब्रोकरेज हाउसों की तरफ से लगातार घटाई जा रही रेटिंग के परेशान थे और इनके आधार पर निफ्टी के 4000 तक गिरने का निष्कर्ष निकाल रहे हैं जिसका साथ मीडिया के तमाम विश्लेषक भी दे रहे थे, तब इकलौता एक शख्स था जिसका मानना था कि जनवरी में ऐसा कतई नहीं होगा। और, वह शख्स था मैं। मैंने आपको बताया था कि मेरे आकलन के हिसाबऔरऔर भी

बौद्धिक संपदा के मामले में हैदराबाद की दवा कंपनी सुवेन लाइफ साइंसेज बड़ी समृद्ध कंपनी है। वह बायोफार्मा कंपनी है। सीधे बाजार में नहीं, बल्कि नई-नई दवाएं खोजकर उनके व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए दुनिया भर की कंपनियों को बेचती है। वह खोजे गए नए-नए रासायनिक यौगिकों के पेटेंट लेती रहती है। पिछले ही महीने उसे ऑस्ट्रेलिया व कनाडा से चार उत्पादों के पेटेंट मिले हैं। ये उत्पाद अल्ज़ाइमर, अटेंशन डेफिसिएंट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर, पार्किन्सन, सिज़ोफ्रेनिया व हटिंग्टनऔरऔर भी

फ्रांस के डाउनग्रेड के बाद बाजार में एक बार फिर हल्की-सी सिहरन दौड़ गई। लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के सुधरते मूलाधार यूरोपीय कारकों को बेअसर करने के लिए काफी हैं। दिसंबर में मुद्रास्फीति की दर 7.47 फीसदी पर आ चुकी है। यह साफ संकेत इस बात का है कि ब्याज दरों में कटौती अब ज्यादा दूर नहीं है। मुद्रास्फीति की दर पर हमारा अनुमान 7.5 फीसदी से 8 फीसदी का था। वास्तविक आंकड़े का इससे कम रहना बाजारऔरऔर भी