सरकार देश में विदेशी पूंजी को खींचने के हरसंभव उपायों पर गौर कर रही है। यह कहना है वित्त मंत्रालय के एक उच्चाधिकारी का। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने जिस तरह भारत के स्थानीय व विदेशी मुद्रा बांडों की रेटिंग एक कर दी है, उससे देश से विदेशी पूंजी के बाहर निकलने के सिलसिले को थामने में मदद मिलेगी। बता दें कि बुधवार को मूडीज ने भारत के देशी व विदेशी बांडों कीऔरऔर भी

रिजर्व बैंक के मुताबिक भारतीय बैंकों के करीब 9 लाख करोड़ रुपए के ऋण जोखिम से घिरे क्षेत्रों में फंसे हुए हैं। इन क्षेत्रों में टेलिकॉम, बिजली, रीयल एस्टेट, एविएशन व मेटल उद्योग शामिल हैं। ये सभी उद्योग किसी न किसी वजह से दबाव में चल रहे हैं। जैसे, मेटल सेक्टर अंतरराष्ट्रीय कीमतों व मांग के गिरने से परेशान है तो बिजली क्षेत्र बढ़ती लागत व ऊंची ब्याज दरों का बोझ झेल रहा है। धंधे पर दबावऔरऔर भी

देश की नई पीढ़ी हो सकता है कि वित्तीय रूप से हम से कहीं ज्यादा साक्षर हो। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) स्कूलों में अगले शैक्षणिक वर्ष से वित्तीय साक्षरता को अलग विषय के रूप में पढ़ाने की तैयारी में जुटा हुआ है। यह नैतिक विज्ञान की तरह एक अलग विषय होगा। वित्तीय साक्षरता के तहत विद्यार्थियों को शेयर बाजार की ट्रेडिंग, ऑप्शंस व फ्यूचर्स जैसे डेरिवेटिव्स की जटिलता के साथ इनसाइडर ट्रेडिंग का भी ज्ञान करायाऔरऔर भी

सरकार ने अपने अनुमानों को जमीनी हकीकत से मिलाने की कोशिश की है। उसने अर्थव्यवस्था की छमाही समीक्षा में चालू वित्त वर्ष 2011-12 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के बढ़ने का अनुमान 7.25 फीसदी से 7.50 फीसदी कर दिया है। फरवरी में बजट पेश करते वक्त इसके 9 फीसदी बढ़ने का अनुमान लगाया गया था। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को संसद में देश के आर्थिक हालात की मध्य-वार्षिक समीक्षा पेश की। इस समीक्षा रिपोर्ट मेंऔरऔर भी

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सफाई दी है कि सरकार रुपए को गिरने से बचाने के लिए विदेशी मुद्रा की आवाजाही पर कोई नियंत्रण नहीं लगाने जा रही है। इससे पहले इस तरह की खबरें आई थीं कि रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव की अध्यक्षता में वित्तीय स्थायित्व विकास परिषद (एफएसडीसी) की गुरुवार, 8 दिसंबर को होनेवाली बैठक में भारतीय कंपनियों के विदेशी निवेश और बाहरी ऋणों की पूर्व अदायगी पर बंदिश लगाई जाऔरऔर भी

भारत सरकार का प्राथमिक घाटा चालू वित्त वर्ष 2011-12 में अप्रैल से सितंबर तक के पहले छह महीनों में 1,58,311 करोड़ रुपए रहा है, जबकि पूरे वित्त वर्ष के 12 महीनों के लिए बजट में इसका निर्धारित लक्ष्य 1,44,831 करोड़ रुपए का है। इस तरह साल के छह महीने में ही देश का प्राथमिक घाटा पूरे साल के लिए निर्धारित लक्ष्य का 109.3 फीसदी हो चुका है। यह इसलिए भी चिंता की बात है क्योंकि पिछले वित्तऔरऔर भी

वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को कुल मिलाकर 2126 करोड़ रुपए मूल्य के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के 18 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। जिन कंपनियों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है उनमें डिश टीवी व एमसीएक्स शामिल है, जबकि यूनिटेक वायरलेस के आवेदन को कैबिनेट के पास विचार के लिए भेज दिया गया है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की सिफारिशों को देखते हुए यह फैसला किया गया है। इसकेऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया जिसमें पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के चेयरमैन के पद पर यू के सिन्हा की नियुक्ति को चुनौती दी गई है। यह याचिका भारतीय वायुसेना के पूर्व प्रमुख एस कृष्णास्वामी, रिटायर्ड आईपीएस अफसर जुलियो रिबेरो और सीबीआई के पूर्व निदेशक बी आर लाल की तरफ से दायर की गई है। याचिका पर गौर करते हुए मुख्य न्यायाधीश एस एच कापड़िया की पीठ नेऔरऔर भी

सरकार को देश के रिटेल व छोटे निवेशकों को शेयर बाजार में खींचकर लाने में भले ही कामयाबी न मिल रही हो, लेकिन हमारा वित्त मंत्रालय विदेश के रिटेल व छोटे निवेशकों को यहां ट्रेड करने की इजाजत देने पर विचार कर रहा है। इससे पहले चालू वित्त वर्ष 2011-12 के बजट में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने विदेशी निवेशकों को म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों में निवेश की अनुमति देने का ऐलान किया था। इस परऔरऔर भी

देश का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष 2011-12 में सितंबर तक के छह महीनों में ही पूरे साल के बजट अनुमान का लगभग 71 फीसदी हो चुका है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2010-11 की पहली छमाही में यह बजट अनुमान का 34.9 फीसदी ही था। वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार राजकोषीय घाटा अप्रैल-सितंबर 2011 के बीच 1.92 लाख करोड़ रुपए रहा है, जबकि पूरे वित्त वर्ष का बजट लक्ष्य 4.13 लाख करोड़ रुपए रखा गयाऔरऔर भी