दुनिया भर में सोने की बिक्री बढ़वाने में लगी विश्व स्वर्ण परिषद का कहना है कि भारत में इस त्योहारी सीजन में सोने के जेवरात की रिटेल ब्रिकी 10 से 15 फीसदी बढ़ सकती है। परिषद के निदेशक शिवराम कुमार ने कोच्चि में संवाददाताओं से कहा कि अब तक सोने की खरीदारी शादी-ब्याह के दौरान ही की जाती थी। लेकिन अब धारणा बदल रही है। उन्होंने कहा कि हमें इस साल त्योहारी सीजन में देश भर मेंऔरऔर भी

इधर हर कोई सोने में चल रही तेजी की वजह यूरोप के ऋण संकट और अमेरिका में आई आर्थिक सुस्ती को बता रहा है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के बाजार विश्लेषक क्लाइड रसेल का कहना है कि इसकी असली वजह दुनिया के केंद्रीय बैंकों की खरीद के अलावा भारत व चीन के ग्राहकों की बढ़ी हुई मांग है जहां सोना खरीदना मुद्रास्फीति के बचाव के साथ-साथ स्टेटस सिम्बल भी बनता जा रहा है। क्लाइड रसेल काऔरऔर भी

उभरते बाजारों में निवेश करने वाले प्राइवेट इक्विटी (पीई) फंडों ने सबसे ज्यादा धन भारत और चीन में लगाया है। उभरते बाजारों में पीई निवेश में इन दो देशों की कुल हिस्सेदारी 68 फीसदी है। इमर्जिंग मार्केट्स प्राइवेट इक्विटी एसोसिएशन द्वारा कराए गए अध्ययन के मुताबिक, इस साल जून तक के छह महीनों में दुनिया में हुए कुल पीई निवेश में चीन और भारत की हिस्सेदारी 68 फीसदी रही। जहां चीन में 5.8 अरब डॉलर का पीईऔरऔर भी

दुनिया की प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने जापान के सरकार ऋणों की रेटिंग घटा दी है। उसने इसे एक पायदान नीचे खिसका कर Aa3 कर दिया है। अभी तक यह Aa2 थी। एजेंसी ने कहा कि 2009 की मंदी के बाद से ही जापान का ऋण बढ़ता जा रहा है और वहां राजनीतिक नेतृत्व बहुत तेजी से बदल रहा है जिससे कारगर आर्थिक रणनीति नहीं अपनाई जा पा रही है। बता दें कि जापान में पांचऔरऔर भी

अगले कुछ महीनों में कई भारतीय और चीनी कारें अमेरिकी बाजार में पेश की जाने वाली हैं। लेकिन एक नई रिपोर्ट में पाया गया कि ज्यादातर अमेरिकी टाटा, महिंद्रा और बीवाईडी जैसी कंपनियों की कारें नहीं खरीदना चाहते। बाजार अनुसंधान कंपनी जीएफके ऑटोमोटिव की एक रिपोर्ट में पाया गया कि चीन और भारत के वाहन निर्माताओं को वही दिन देखने पड़ेंगे जो कोरियाई वाहनों को अमेरिका में लांच किए जाने के बाद देखना पड़े थे। उपभोक्ताओं कोऔरऔर भी

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई है कि उनका देश विज्ञान और गणित के क्षेत्र में तेजी से भारत और चीन जैसे देशों से पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक रूप से इन क्षेत्रों में अमेरिका को तुलनात्मक रूप से बढ़त हासिल थी, लेकिन अब वह भारत और चीन जैसे देशों से पिछड़ता जा रहा है। अमेरिका के ग्रामीण इलाकों की तीन दिन की बस यात्रा के समापन के बादऔरऔर भी

अमेरिका की ऋण सीमा का बवाल भले ही इस महीने उठा हो और स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने उसकी रेटिंग दो हफ्ते घटा दी हो, लेकिन दुनिया भर के देश दो महीने पहले से ही अमेरिकी बांडों में अपना निवेश घटाने लगे हैं। मई में जहां दुनिया के तमाम देशों ने अमेरिकी बांडों में 4516 अरब डॉलर लगा रखे थे, वहीं जून में उनका निवेश घटकर 4499.2 अरब डॉलर रह गया। लेकिन इस दौरान चीन व ब्रिटेन जैसेऔरऔर भी

अमेरिका का ऋण संकट फिलहाल टल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और अमेरिका की दोनों प्रमुख पार्टियों – डेमोक्रेट्स व रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं के बीच सरकार की मौजूदा 14.3 लाख करोड़ डॉलर की ऋण सीमा को बढ़ाने पर सहमति हो गई है जिससे वह जरूरी भुगतान कर सकती है। यह भी तय हुआ है कि अमेरिकी सरकार अगले दस सालों में अपने खर्च में 2.4 लाख करोड़ डॉलर की कटौती करेगी। अब इस सहमति कोऔरऔर भी

अमेरिकी अर्थव्यवस्था ठहराव की शिकार हो चुकी है, जबकि चीन व भारत की अर्थव्यवस्थाएं तेजी से बढ़ रही हैं और इन देशों का मध्यवर्ग भी तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए अमेरिकी कंपनियां अपने देश की सरहदें फलांग कर चीन व भारत के मध्यम वर्ग को पकड़ना चाहती हैं। खुद अमेरिकी सरकार ने अपनी कंपनियों से इन देशों के बढ़ते मध्यम वर्ग का फायदा उठाने को कहा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार मामलों के वाणिज्य उपमंत्री फ्रांसिस्को सांचेज नेऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने जापान व चीन से आयात की जानेवाली इनर्ट या अक्रिय गैसों पर पांच साल के लिए एंटी-डंपिग शुल्क लगा दिया है। ये गैसें आमतौर पर घरेलू रेफ्रीजरेटर या वाहनों के एसी में इस्तेमाल की जाती हैं। इन पर लगाया गया एंडी-डंपिंग शुल्क 0.69 डॉलर से लेकर 1.41 डॉलर प्रति किलो होगा। वित्त मंत्रालय से संबद्ध राजस्व विभाग का कहना है कि यह शुल्क अगर किसी वजह से खत्म नहीं किया गया तो अगले पांचऔरऔर भी