रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी), भारत सरकार की नवरत्न कंपनी। करीब साढ़े तीन साल पहले फरवरी 2008 में 105 रुपए पर आईपीओ आया था। लेकिन उसी साल वैश्विक मंदी का प्रकोप आ गया। लेहमान संकट के समय इसका शेयर नवंबर 2008 में 53 रुपए तक गिर गया। लेकिन फिर उठा तो साल भर पहले 11 अक्टूबर 2010 को 413.80 रुपए की चोटी तक जा पहुंचा। इसके बाद फिर गिरने लगा तो पिछले महीने 26 अगस्त 2011 को 162.51औरऔर भी

अरविंद कुमार आज बहुत खुश होंगे क्योंकि उन्होंने एसबीआई के शेयर 1890 रुपए के भाव से खरीद रखे है, जबकि कल ही यह 2.8 फीसदी बढ़कर 2005.90 रुपए तक चला गया। सेंसेक्स से लेकर निफ्टी तक में शामिल इस स्टॉक में डेरिवेटिव सौदों भी जमकर होते हैं। कल इसके सितंबर फ्यूचर्स के भाव 2000.50 रुपए पर पहुंच गए। हालांकि अक्टूबर फ्यूचर्स का भाव 1999.25 रुपए और नवंबर फ्यूचर्स का 2004.65 रुपए चल रहा है। शेयर का हालऔरऔर भी

इंड-स्विफ्ट लिमिटेड और इंड-स्विफ्ट लैबोरेटरीज दोनों ही एक समूह से वास्ता रखती हैं। चंडीगढ़ इनका मुख्यालय है। दवाएं बनाती हैं। लेकिन अलग-अलग लिस्टेड हैं। इंड-स्विफ्ट 1986 में बनी तो इंड-स्विफ्ट लैब्स 1995 में। धंधा दोनों का दुरुस्त चल रहा है। इंड-स्विफ्ट लिमिटेड ने बीते वित्त वर्ष 2010-11 में 894.16 करोड़ रुपए की आय पर 43.45 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था। वहीं इंड-स्विफ्ट लैब्स ने इस दौरान 1031.21 करोड़ रुपए की आय पर 87.62 करोड़ रुपएऔरऔर भी

आपको याद होगा कि जब 30 जून 2010 को हमने जीआईसी हाउसिंग में पहली बार निवेश की सलाह दी थी तब उसका शेयर 104 रुपए के आसपास था। ठीक एक दिन पहले उसने तब तक के पिछले 52 हफ्तो का शिखर 106.45 रुपए पर बनाया था। फिर भी हमने कहा था कि इसे 150 रुपए तक पहुंचना चाहिए। और, वो चार महीने के भीतर 25 अक्टूबर 2010 को 161.55 रुपए के शिखर पर जा पहुंचा। चार महीनेऔरऔर भी

शेयर बाजार में कैश सेगमेंट में कारोबार घटता जा रहा है और इसी के साथ ब्रोकरों के वजूद पर लटकी तलवार नीचे आती जा रही है। शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में कुल वोल्यूम 2644.44 करोड़ रुपए का रहा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में 12,042.85 करोड़ रुपए का। इस तरह दोनों एक्सचेंजों को मिलाकर कुल वोल्यूम 14,687.29 करोड़ रुपए का रहा है। यह हाल अभी का नहीं है, बल्कि पिछले पांच महीनों से शेयर बाजारऔरऔर भी

अंदेशा था डाउ जोंस के 200 अंक और निफ्टी के 100 अंक गिर जाने का। लेकिन लगता है कि जैसे अपने यहां भाई लोग भरे बैठे थे। अमेरिका में फेडरल ओपन मार्केट कमिटी ने ऐसा कोई फैसला नहीं किया जिसकी अपेक्षा नहीं थी। सबको पता था और हमने भी लिखा था कि ऑपरेशन ट्विस्ट आना है और क्यूई-3 की गुंजाइश नहीं है। लेकिन मौका मिलते ही उस्तादों ने बाजार को धुन डाला। बीएसई सेंसेक्स का 704 अंकऔरऔर भी

दुनिया के सन्नाम निवेशक जॉर्ज सोरोस का कहना है, “निवेश का फैसला किसी वैज्ञानिक परिकल्पना को बनाने और उसे व्यवहार में परखने जैसा है। फर्क इतना है कि निवेश के फैसले से जुड़ी परिकल्पना का मसकद धन बनाना होता है, कोई सर्वमान्य सत्य स्थापित करना नहीं।” यह फैसला हर इंसान को खुद करना होता है। आपके लिए फैसला न तो कोई ब्रोकर और न ही कोई विशेषज्ञ कर सकता है। वे तो बस सूचना पाने के माध्यमऔरऔर भी

इक्विटी शेयर एकमात्र आस्ति है जिसका मूल्य मूलतः कंपनी द्वारा निरंतर बनाए जाते मूल्य को दर्शाते हुए बढ़ता जाता है। बाकी दूसरी आस्तियां या माध्यम या तो शेयर बाजार से ही कमाई करते हैं या ताश के पत्तों की तरह नोट को इस हाथ से उस हाथ तक पहुंचाते रहते हैं। इक्विटी पूंजी कमाती है तो शेयर का भाव बढ़ता है। इसी अनुपात को दर्शाता है मूल्य/अर्जन या पी/ई अनुपात। लेकिन जहां अर्जन शून्य है, वहां मूल्यऔरऔर भी

पहले स्वराज माज़्दा थी। इस साल 4 जनवरी से एसएमएल इसुज़ु हो गई। पहले स्वराज ब्रांड था। अब एसएमएल और इसुज़ु हो गया है। बस, ट्रक व अन्य व्यावसायिक वाहन बनाती है। भारत के अलावा नेपाल, बांग्लादेश, केन्या, तंजानिया, रवांडा, सीरिया व जॉर्डन जैसे तमाम देशों में अपने वाहन बेचती है। 1984 में सरकारी कंपनी पंजाब ट्रैक्टर्स व जापान की माज़्दा कॉरपोरेशन व सुमितोमो कॉरपोरेशन से साथ मिलकर शुरुआत की। फिलहाल सुमितोमो कॉरपोरेशन की सब्सिडियरी है क्योंकिऔरऔर भी

धीरे-धीरे साफ होता जा रहा है कि सब शेयरों को थोक के भाव एक ही तराजू में नहीं तौला जा सकता। उसी तरह जैसे सब धान पाइस पसेरी नहीं तौलते। लांग टर्म या दो से दस साल के लिए अलग, मीडियम टर्म या दो महीने से दो साल तक के लिए अलग, शॉर्ट टर्म या हफ्ते दस दिन से दो महीने तक के लिए अलग और एकाध दिन की ट्रेडिंग के लिए अलग। फंडामेंटल्स के आधार परऔरऔर भी