भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. दुव्वरि सुब्बाराव का तीन साल का कार्यकाल सितंबर में खत्म हो रहा है। इसलिए सरकारी हलकों में उनकी जगह नए गवर्नर को लाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक इस दौड़ में तीन लोगों का नाम सबसे आगे हैं। ये हैं – शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाहकार रघुराम राजन, आर्थिक मामलों के सचिव आर गोपालन और कार्नेल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व वित्त मंत्रालयऔरऔर भी

लगता है प्याज की बढ़ती कीमतों के राजनीतिक असर से सरकार परेशान हो गई है। इसिलए प्याज की आसमान छूती कीमतों को नीचे लाने के लिए वह खटाखट कदम उठा रही है। पहले निर्यात पर बंदिश लगाने के बाद सरकार ने अब प्याज आयात पर सीमा शुल्क समाप्त कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में प्याज की कीमत 80 से 85 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गयी है। इसमें कमी लाने के इरादे से सरकार ने प्याजऔरऔर भी

देश की आर्थिक विकास दर चालू वित्त वर्ष 2010-11 की दूसरी तिमाही में भी पहली तिमाही में हासिल विकास दर 8.8 फीसदी के आसपास रहने की उम्मीद है। यह कहना है वित्त सचिव अशोक चावला। सोमवार को राजधानी दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने यह उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि यह (सितंबर 2010 की तिमाही में जीडीपी विकास दर) पहली तिमाही से काफी करीब होगी।” बता दें कि सकल घरेलू उत्पाद याऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने कहा है कि डीजल की कीमतों को नियंत्रण-मुक्त करने का फिलहाल उसका कोई इरादा नहीं है। सरकार के इस बयान से ट्रांसपोर्टरों के साथ डीजल का इस्तेमाल करने वाले अन्य वर्ग के लोगों को राहत मिली है। वित्त सचिव अशोक चावला ने एक प्रमुख टेलिविजन चैनल पर एक परिचर्चा के दौरान कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि डीजल की कीमतों को नियंत्रण-मुक्त किए जाने का यह सही समय है और न ही यह उचित होगा।’’औरऔर भी

कहां तो विश्लेषक मानकर चल रहे थे कि मई में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक 16 फीसदी बढ़ेगा और कहां असल में यह 11.5 फीसदी ही बढ़ा है। यह पिछले सात महीनों का सबसे निचला स्तर है। लेकिन इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वित्त सचिव अशोक चावला का कहना है कि किसी को भी यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि औद्योगिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लंबे समय तक असामान्य दरों पर बढ़ता रहेगा। इसके सामने क्षमता की सीमाएं हैं।औरऔर भी

भारत बंद की व्यापक सफलता के बीच सरकार के आला अधिकारी मुद्रास्फीति पर जल्द ही काबू पा लेने का दावा कर रहे हैं। पहले योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोटेंक सिंह आहलूवालिया ने ऐसी बात कही। उसके बाद वित्त सचिव अशोक चावला ने कहा कि खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति कुछ महीनों के भीतर 5-6 फीसदी के स्वीकार्य स्तर पर आ जाएगी। अशोक चावला ने सोंमवार को राजधानी में राज्य राजमार्गों पर आयोजित एक सम्मेलन के दौरान अलग सेऔरऔर भी