शरीर है। क्रिया-प्रतिक्रिया की लीला ही जीवन है, उसकी चमक है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अंदर चमक देनेवाली कोई वस्तु अलग से बैठी है। सूरज जो इस सृष्टि के जीवन का आधार है, उसमें रौशनी फेंकने वाली कोई आत्मा नहीं विराजती।और भीऔर भी

कर्ता बाहर का नहीं, अंदर का ही कोई जीव-अजीव है। संतुलन हासिल करने के क्रम में सचेत-अचेत कर्म ही हर घटना के कारक हैं। बाकी सब समझने की सुविधा के लिए हम जैसे इंसानों द्वारा गढ़े गए पुतले हैं।और भीऔर भी

स्तरीय स्टॉक्स का ग्रेड गिराने का दौर बीत रहा है और रेटिंग उठाने का दौर शुरू हो रहा है। एक प्रमुख एफआईआई ब्रोकिंग हाउस ने इनफोसिस को अपने आदर्श पोर्टफोलियो में शामिल किया है। कृपया याद करें कि हमने इनफोसिस में 3300 रुपए पर बेचने और 2200 पर खरीदने की कॉल दी थी। टॉप पर बेचने और बॉटम पर खरीदने की यह सलाह दर्शाती है कि हमें भारतीय बाजार से पैसा बनाने के लिए फिरंगियों से उल्टाऔरऔर भी

भाषण लफ्फाजी में कब बदल जाते हैं, इसका पता बोलनेवालों को नहीं चलता, लेकिन सुननेवाले ताड़ लेते हैं। नेताओं को मालूम हो कि क्रिया से दूर ज्ञान और करनी से दूर कथनी ज्यादा नहीं चलती।और भीऔर भी

निफ्टी में 5000 का स्तर अपने अंदर हरसंभव नकारात्मकता को सोखे हुए हैं। फिर भी गिरावट से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि लंबी कूद के लिए कुछ कदम पीछे तो जाना ही पड़ता है। जैसा कि सामने आ चुका है कि निफ्टी में 4800 की सीरीज में जमकर पुट ऑप्शन सौदे हुए है जो दिखाता है कि ज्यादातर मंदड़िए चाहते हैं कि अंततः रुख पलटने से पहले बाजार 4800 तक चला जाए। आज तो मंदड़ियों काऔरऔर भी

जब तक सब कुछ हासिल है, हम खुद को भगवान का राजकुमार माने बैठे रहते हैं। भूल जाते हैं कि यहां कुछ भी अपने-आप नहीं मिलता। हमें जो भी मिला है, वह हमारे अग्रजों-पूर्वजों के कर्मों का फल है।और भीऔर भी

अच्छी बात है कि निफ्टी अब गिरकर बाजार के उस्तादों के मनोवांछित टेक्निकल स्तर पर आ गया है। फिलहाल बाजार ओवरसोल्ड अवस्था में है। यह तेजडियों के लिए सुनहरा मौका है कि वे निफ्टी को 200 अंक तक उठाकर जबरदस्त मुनाफा कमाने की सूरत निकाल लें। हमें निफ्टी की इस गति का अहसास था और हमने खुद को खास-खास सूचनाओं वाले चुनिंदा स्टॉक्स पर केंद्रित किया। ये स्टॉक गिरते बाजार में भी निश्चित रूप से बढ़ रहेऔरऔर भी

हिसाब लगाएं तो पता चलेगा कि हम तीन चौथाई से ज्यादा जीवन प्रतिक्रिया में जीते हैं। लेकिन प्रतिक्रिया नहीं, क्रिया-प्रधान जीवन होना चाहिए हमारा। दूसरे नहीं, हम ही तय करें कि हमें क्या करना है।और भीऔर भी

हमने पूरे पांच दिन पहले चेताया था कि स्पीक एशिया के बैंक खाते फ्रीज होने लगे हैं। तभी से तमाम तथाकथित ‘स्पीकएशियंस’ टिप्पणियों में कोहराम मचाए हुए थे कि सब झूठ है, बकवास है। लेकिन अब खुद स्पीक एशिया ने आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया है कि सिंगापुर तक में उसके खाते बंद कर दिए गए हैं। उसने यह भी माना है कि कुछ बैंकों ने भारत में उसके एजेंटों के खातों को ‘तात्कालिक रूप’ सेऔरऔर भी

जहां हाथ को हाथ सुझाई नहीं देता, वैसे कुहासे व अंधेरे से घिरे भविष्य में विचार हमारे लिए जुगनू का काम करते हैं। वे खटाक से अपनी टॉर्च जलाकर हमें कम से कम कुछ दूर तक का रास्ता दिखा देते हैं।और भीऔर भी