शेयर बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि बीते सप्ताह मामूली सुधार के बाद 25 जनवरी को बहुप्रतीक्षित भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक से इस सप्ताह बाजार की दिशा निर्धारित होगी। रेपो व रिवर्स रेपो दर 0.25 फीसदी बढ़ सकती है, जबकि सीआरआर को 6 फीसदी पर यथावत रखे जाने की उम्मीद है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में 21 जनवरी को समाप्त सप्ताह में उतार-चढ़ाव का रूख दिखाई पड़ा और सप्ताहांत में यह 0.77औरऔर भी

बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) की बिक्री चालू वित्त वर्ष 2010-11 की तीसरी तिमाही में मात्र 6 फीसदी बढ़ी है, लेकिन शुद्ध लाभ में 28.1 फीसदी इजाफा हुआ है। शुक्रवार को घोषित नतीजों के अनुसार दिसंबर 2010 की तिमाही में आरआईएल ने एक्साइज समेत कुल 62,399 करोड़ रुपए की बिक्री हासिल की है, जो दिसंबर 2009 की तिमाही की बिक्री 58,848 करोड़ रुपए से 6 फीसदी ज्यादा है। इसऔरऔर भी

मंत्रालयों के फेरबदल ने बाजार को कुछ संदेश दिए हैं। यह जानामाना सच है कि उद्योगपति मंत्रालय व मंत्रियों के साथ रिश्ते बना लेते हैं जिनकी बदौलत उन्हें सरकारी नीतियों के बारे में पहले से पता चल जाता है और इसका इस्तेमाल वे अपने धंधे में करते हैं। इसलिए मंत्रालय में मंत्री बदल जाने से कभी-कभी कंपनियों का नसीब भी इधर से उधर हो जाता है। शरद पवार को कृषि मंत्री बनाए रखना सत्तारूढ़ पार्टी की राजनीतिकऔरऔर भी

बाजार में कल 337 अंक के तेज सुधार के बाद मंदड़ियों की तरफ से बिकवाली का आना लाजिमी था। फिर इनफोसिस के नतीजे भी चौंकानेवाले नहीं निकले। 30-32 के पी/ई अनुपात पर अगर आप इनफोसिस द्वारा बाजार को पीछे छोड़ देने की बात सोचते हैं तो यह भारत की दूसरे नबंर की आईटी कंपनी से वाकई कुछ ज्यादा ही अपेक्षा करना हो जाएगा। हालांकि निवेशकों का एक वर्ग इस स्टॉक को तब तक पसंद करता रहेगा जबऔरऔर भी

भारतीय शेयर बाजार में बाजार के शातिर उस्तादों और राजनेताओं का क्या खेल हो सकता है? उनके बीच क्या कोई दुरभिसंधि है? वह भी तब जब पूरा बाजार, खासकर डेरिवेटिव सेगमेंट बेहद खोखले आधार पर खड़ा है? शेयर बाजार में होनेवाले कुल 1,70,000 करोड़ रुपए के कारोबार में से बमुश्किल 15,000 करोड़ कैश सेगमेंट से आता है। इस कैश सेगमेंट से अरबों डॉलर का बाजार पूंजीकरण एक झटके में उड़ जाता है, जबकि वास्तविक स्थिति यह हैऔरऔर भी

कल भारी वोल्यूम के साथ निफ्टी के 5800 अंक से नीचे चले जाने के साथ बाजार ने ट्रेडरों और निवेशकों के विश्वास को डिगाकर रख दिया है। मुझे उम्मीद थी कि निफ्टी 5820 के बाद वापस उठेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका कारण मुद्रास्फीति और ब्याज दरों के बढ़ने का अंदेशा बताया जा रहा है। पर यह बाजार के इस तरह धराशाई हो जाने का असली कारण नहीं हो सकता। जब वित्त मंत्री ऑन रिकॉर्ड कह रहेऔरऔर भी

2010 में बाजार से तेज रफ्तार से भागने वाले स्टॉक्स को भूल जाओ। वो साल पीछे छूट चुका है। अब तो साल 2011 में बाजार को पछाड़ने वाले नए दबंग स्टॉक्स बनेंगे। इस साल मंच संभालने वाले सेक्टर होंगे – इंफ्रास्ट्रक्चर, रीयल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल, चाय और फर्टिलाइजर। निफ्टी 5700 तक नीचे जाने के बाद वापस 6200 के करीब पहुंच चुका है जहां से उसकी नई ऊंचाई ज्यादा दूर नहीं है। आखिर निफ्टी इतनी तेजी से नई ऊंचाईऔरऔर भी

साल 2010 के बाकी चार दिन इसी तरह रंग-तरंग में मनाते रहिए। 30 दिसंबर को रोलओवर होना है और 31 दिसंबर म्यूचुअल फंडों द्वारा अपने एनएवी (शुद्ध आस्ति मूल्य) को दुरुस्त करने का दिन होगा। सेंसेक्स 180 अंकों की पेंग मारने के बाद 45 अंक गिरकर बंद हुआ है, जबकि निफ्टी में साढे तेरह अंकों की गिरावट आई है। अगले चार दिनों में कुछ भी खास नहीं होने वाला है। हां, एक बात अच्छी तरह दिमाग मेंऔरऔर भी

कुछ लोग इसे धर्मांध मुसलमानों का तुष्टीकरण बता सकते हैं, लेकिन बिजनेसवालों के लिए यह ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने दायरे में लाकर धंधा बढ़ाने या वित्तीय समावेश का तरीका है। जी हां, सोमवार 27 दिसंबर से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) इस्लाम धर्म की मान्यताओं पर खरा उतरनेवाला एक सूचकांक शुरू कर रहा है। उसने इसे तक़वा एडवाइजरी एंड शरीया इनवेस्ट सोल्यूशंस (तासिस) के सहयोग से बनाया है। इनका नाम है बीएसई तासिल शरीया 50 इनडेक्स।औरऔर भी

मौज-मस्ती भरे क्रिसमस के लिए मेरी बधाई स्वीकार करें। बाजार भी लगता है कि बधाई देने के मूड में आ गया है क्योंकि इसे रफ्तार देनेवाले तो छुट्टी पर जा चुके हैं। आज खास कुछ होना-हवाना था नहीं। वैसे, बीएसई सेंसेक्स 90.78 अंक बढ़कर 20073.66 और एनएसई निफ्टी 31.60 अंक बढ़कर 6011.60 पर बंद हुआ है। अब हम बाजार पर गंभीरता से निगाह सोमवार को ही डालेंगे। आसार तो यही हैं कि यह सेटलमेंट तूफान के साथऔरऔर भी