रिलायंस का शुद्ध लाभ 28.1% बढ़ा, कंपनी के पास 31,829 करोड़ कैश

बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) की बिक्री चालू वित्त वर्ष 2010-11 की तीसरी तिमाही में मात्र 6 फीसदी बढ़ी है, लेकिन शुद्ध लाभ में 28.1 फीसदी इजाफा हुआ है। शुक्रवार को घोषित नतीजों के अनुसार दिसंबर 2010 की तिमाही में आरआईएल ने एक्साइज समेत कुल 62,399 करोड़ रुपए की बिक्री हासिल की है, जो दिसंबर 2009 की तिमाही की बिक्री 58,848 करोड़ रुपए से 6 फीसदी ज्यादा है। इस दौरान उसका शुद्ध लाभ 4008 करोड़ रुपए से 28.1 फीसदी बढ़कर 5136 करोड़ रुपए हो गया है। यह बाजार की 30 फीसदी बढ़त की उम्मीद से थोड़ा कम है।

लेकिन अगर दिसंबर 2010 तक के नौ महीनों की बात करें तो कंपनी की बिक्री 30.9 फीसदी बढ़कर 1,40,133 करोड़ रुपए से 1,83,368 करोड़ रुपए हो गई है और शुद्ध लाभ 29.4 फीसदी बढ़कर 11,526 करोड़ रुपए से 14,910 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। सैद्धांतिक रूप से आरआईएल के शेयर भाव में भी इसी तरह का इजाफा होना चाहिए था। लेकिन अप्रैल 2010 के बाद से वो बढ़ने के बजाय करीब 10 फीसदी घट गया है, जबकि इसी दरम्यान बीएसई सेंसेक्स 7 फीसदी बढ़ा है। शुक्रवार को नतीजे घोषित होने से पहले आरआईएल का शेयर बीएसई में 1.73 फीसदी बढ़कर 986.50 रुपए पर बंद हुआ है।

तीसरी तिमाही के नतीजों पर कंपनी के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी का कहना था, “रिलायंस ने रिफाइनिंग व पेट्रोकेमिकल मार्जिन में सुधार के साथ एक और तिमाही का रिकॉर्ड बना दिया है। कुछ उत्पादों में कंपनी ने ऐतिहासिक स्तर हासिल किया है। घरेलू बाजार की मांग में जबरदस्त वृद्धि और बेहतर आस्तियों के कारण रिलायंस पूरे उद्योग में ऑपरेटिंग लाभ व मार्जिन में सबसे आगे है।” दिसंबर तिमाही में रिलायंस के रिफाइनिंग बिजनेस का मार्जिन 9 डॉलर प्रति बैरल रहा है, जबकि साल भर पहले की इसी अवधि में यह 5.90 डॉलर प्रति बैरल था।

चालू वित्त वर्ष में दिसंबर तक के नौ महीनों में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कर्मचारियों पर 1938 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, जो पिछले वित्त वर्ष के खर्च 1729 करोड़ रुपए से 12.09 फीसदी ज्यादा है। इसी दौरान कंपनी के कच्चे माल की लागत 28.7 फीसदी और अन्य खर्च 33.9 फीसदी बढ़े हैं। इन नौ महीनों में कंपनी सकल ब्याज की लागत 2332 करोड़ रुपए से घटाकर 1986 करोड़ रुपए पर लाने में कामयाब रही है।

31 दिसंबर 2010 को कंपनी पर बकाया ऋण की मात्रा 70,209 करोड़ रुपए है, जबकि नौ महीने पहले 31 मार्च 2010 को यह कर्ज 62,495 करोड़ रुपए का था। रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास इस समय 31,829 करोड़ रुपए का कैश या कैश के समतुल्य रकम है। इसमें बैंकों के एफडी, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड और सरकारी बांडों या प्रतिभूतियों में किया गया निवेश शामिल है।

बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज 3,22,825 करोड़ रुपए के बाजार पूंजीकरण (शेयर के भाव और कुल जारी शेयरों की संख्या का गुणनफल) के साथ देश की सबसे बड़ी कंपनी है। लेकिन सालाना बिक्री के लिहाज इंडियन ऑयल रिलायंस से काफी बड़ी कंपनी है। 2009-10 में रिलायंस की बिक्री 1,92,461 करोड़ रुपए थी, जबकि इसी अवधि में इंडियन ऑयल की बिक्री 2,69,136 करोड़ रुपए थी। पर, इंडियन ऑयल का बाजार पूंजीकरण मात्र 79,515 करोड़ रुपए ही है। एसबीआई तक का बाजार पूंजीकरण इससे कहीं ज्यादा 1,64,969 करोड़ रुपए है।

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