चालू वित्त वर्ष 2011-12 में अप्रैल से जुलाई तक के चार महीनों में देश में संवेदनशील वस्तुओं का आयात 37.6 फीसदी बढ़ गया है। वहीं सभी जिसों का कुल आयात 36.18 फीसदी बढ़ गया है। इस साल संवेदनशील वस्‍तुओं का कुल आयात 31,692 करोड़ रुपए का हुआ है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 23,039 करोड़ रुपए का आयात किया गया था। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार चालू वर्ष के पहले चार महीनों में सभी जिंसोंऔरऔर भी

यूरोप व अमेरिका में भले ही वित्तीय व आर्थिक संकट चल रहा हो, लेकिन भारत के निर्यात के बढ़ते जाने का कमाल जारी है। देश का निर्यात कारोबार पिछले कई माह से बढ़ता रहा है और अगस्त में भी साल भर पहले की तुलना में 44.25 फीसदी बढ़कर 24.31 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस दौरान आयात भी साल भर पहले मुकाबले 41.82 फीसदी बढकर 38.35 अरब डॉलर रहा। इस तरह अगस्त में व्यापार घाटा (आयात से निर्यातऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने जापान व चीन से आयात की जानेवाली इनर्ट या अक्रिय गैसों पर पांच साल के लिए एंटी-डंपिग शुल्क लगा दिया है। ये गैसें आमतौर पर घरेलू रेफ्रीजरेटर या वाहनों के एसी में इस्तेमाल की जाती हैं। इन पर लगाया गया एंडी-डंपिंग शुल्क 0.69 डॉलर से लेकर 1.41 डॉलर प्रति किलो होगा। वित्त मंत्रालय से संबद्ध राजस्व विभाग का कहना है कि यह शुल्क अगर किसी वजह से खत्म नहीं किया गया तो अगले पांचऔरऔर भी

मल्टी ब्रांड रिटेल को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए खोलने पर सचिवों की समिति की बैठक अगले हफ्ते शुक्रवार, 22 जुलाई को होने जा रही है। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में होनेवाली इस बैठक में मुख्य रूप से वाणिज्य, उद्योग, वित्त, खाद्य व उपभोक्ता और कृषि मंत्रालय के सचिव भाग लेंगे। यह समिति अपनी सिफारिशें औद्योगिक नीति व संवधर्न विभाग (डीआईपीपी) को सौंप देगी। इसके बाद डीआईपीपी इस मसले पर कैबिनेट तैयार करके सरकार को सौंपेगा।औरऔर भी

दुनिया के बाजारों में मांग बढ़ने से देश का निर्यात सालाना आधार पर मई महीने में 56.9 फीसदी बढ़कर 25.49 अरब डॉलर रहा। पिछले साल मई में यह 16.53 अरब डॉलर था। इसे अर्थव्यवस्था में मजबूती का संकेत का माना जा रहा है। निर्यात बढ़ने की रफ्तार यदि यही रही तो चालू वित्त वर्ष में 300 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात कारोबार हो सकता है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 के पहले दो महीने में अप्रैल-मई केऔरऔर भी

सरकार ने डीम्ड निर्यात नीति के दुरुपयोग को रोकने और इसमें जरुरी सुधार के लिए सभी संबद्ध पक्षों से सुझाव मांगे हैं। सरकार को इस नीति के दुरूपयोग की रिपोर्टें बराबर मिल रही हैं, विशेषकर ऊर्जा क्षेत्र में। डीम्ड निर्यात ऐसा कारोबार है जिसमें वस्तुओं को देश से बाहर नहीं भेजा जाता है, बल्कि इसका इस्तेमाल देश में ही होता है। इस प्रकार के सौदों के लिए भुगतान भी किसी भी मुद्रा में किया जा सकता है।औरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई है और 8 जनवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान यह 15.52 फीसदी पर आ गई है। हालांकि सब्जियों विशेषकर प्याज के दाम अभी भी ऊंचे बने हुए हैं। गुरुवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार दाल, गेहूं व आलू के दाम में कमी की वजह से खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले 1 जनवरी को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति 16.91 फीसदी थी,औरऔर भी

न रक्षा मंत्रालय ने इसकी मांग की, न कोई उद्योग संगठन इस हद तक गया। फिर भी हमारे वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय ने प्रस्ताव पेश कर दिया कि क्यों न रक्षा उत्पादन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 26 फीसदी के मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 74 फीसदी कर दी जाए। तर्क यह है कि हम आज भी अपना 70 फीसदी रक्षा साजोसामान विदेश से आयात करते हैं। 74 फीसदी एफडीआई से यही उत्पादन देश में होनेऔरऔर भी