ईमानदार अर्थव्यवस्था में लोग पूरा दम लगाकर कठिन कठोर मेहनत करते हैं क्योंकि उन्हें मेहनत का फल पाने का यकीन होता है। वे अपनी तरफ से कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते। जोखिम उठाते हैं। मौकों को हाथ से नहीं जाने देते। अंततः कुछ अपने उत्पाद और सेवा के दम पर कामयाब होते हैं तो कुछ किस्मत के दम पर। लेकिन कामयाबी और नाकामी में एक पैटर्न होता है। एक तरह की सच्चाई होती है। वहीं, जब अर्थव्यवस्था परऔरऔर भी

कपास से लेकर चीन तक के निर्यात पर मचे हॉचपॉच को सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने खास-खास मंत्रियों की बैठक अगले सोमवार 30 अप्रैल को बुलाई है। इसमें कृषि मंत्री शरद पवार खाद्य मंत्री, खाद्य मंत्री के वी थॉमस, वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी शामिल होंगे। यह जानकारी कृषि मंत्री शरद पवार ने आज, सोमवार को राजधानी दिल्ली में मीडिया को दी। उन्होंने कहा कि हमें कृषि उत्पादों के निर्यातऔरऔर भी

मल्टी ब्रांड रिटेल को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए खोलने पर सचिवों की समिति की बैठक अगले हफ्ते शुक्रवार, 22 जुलाई को होने जा रही है। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में होनेवाली इस बैठक में मुख्य रूप से वाणिज्य, उद्योग, वित्त, खाद्य व उपभोक्ता और कृषि मंत्रालय के सचिव भाग लेंगे। यह समिति अपनी सिफारिशें औद्योगिक नीति व संवधर्न विभाग (डीआईपीपी) को सौंप देगी। इसके बाद डीआईपीपी इस मसले पर कैबिनेट तैयार करके सरकार को सौंपेगा।औरऔर भी

आर्थिक सलाहकार कितने बिके हुए हो सकते हैं इसका नमूना पेश कर दिया है वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने। कौशिक बसु अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) के चेयरमैन भी हैं। इस समूह का कहना है कि महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए मल्टी-ब्रांड रिटेल में विदेशी निवेश को मंजूरी दे देनी चाहिए। समूह ने कृषि विपणन कानून में बदलाव का भी सुझाव दिया है। यह सीधे-सीधे वॉलमार्ट जैसे विदेशी रिटेल स्टोरों की लॉबीइंग के सिवाऔरऔर भी

पिछले कुछ दिनों से देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के खिलाफ आ रही खबरों पर शुक्रवार को तब विराम लग गया जब बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) के चेयरमैन जे हरिनारायण ने उसे क्लीनचिट दे दी। कह दिया कि एलआईसी ने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया है और पहले 14,000 करोड़ रुपए की कमी की जो बात कही गई थी, वह असल में मौजूदा बीमांकन अनुमान की तुलना में बताईऔरऔर भी

लॉबीइंग और रिलायंस समूह का रिश्ता बहुत पुराना रहा है। यह काम धीरूभाई के जमाने से चला रहा है। लेकिन उनके छोटे बेटे अनिल अंबानी ने लगता है, इसे देश की सरहदों से बाहर पहुंचा दिया है। अमेरिका के पर्यावरण प्रेमी संगठनों ने आरोप लगाया है कि रिलायंस पावर ने मध्य प्रदेश में 3960 मेगावॉट की सासन बिजली परियोजना के लिए अमेरिकी एक्सपोर्ट इम्पोर्ट बैंक (यूएस एक्जिम बैंक) से 60 करोड़ डॉलर की ऋण गारंटी जबरदस्त लॉबीइंगऔरऔर भी