रहने लायक देश
देश यकीनन वहां रहनेवालों से बनता है। लेकिन उसे रहने लायक बनाती हैं स्थानीय से लेकर राज्य व राष्ट्रीय सरकारें। अगर हर तरफ गंदगी, कदाचार व भ्रष्टाचार है तो पूरा सरकारी तंत्र ही देशद्रोही है।और भीऔर भी
देश यकीनन वहां रहनेवालों से बनता है। लेकिन उसे रहने लायक बनाती हैं स्थानीय से लेकर राज्य व राष्ट्रीय सरकारें। अगर हर तरफ गंदगी, कदाचार व भ्रष्टाचार है तो पूरा सरकारी तंत्र ही देशद्रोही है।और भीऔर भी
76% भारतीय कंपनियां रिश्वत व भ्रष्टाचार की परवाह नहीं करतीं और उन्हें लगता है कि अपना काम चलाने व वजूद बनाए रखने के लिए ऐसा करना जरूरी है। वैश्विक सलाहकार फर्म प्राइस वॉटरहाउस कूपर्स के वैश्विक आर्थिक अपराध सर्वे 2011 में यह बात उजागर हुई है। सर्वे के अनुसार भारत में आर्थिक अपराधों की सूचना देने वाली कंपनियों की संख्या केवल 24% है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 34% का है। इससे लगता है कि 76%औरऔर भी
अभी आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन समारोह को बीते दो दिन ही हुए हैं कि कांग्रेस आलाकमान और नेहरू परिवार की मुखिया सोनिया गांधी के खासमखास केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के लिए नेहरू द्वारा अपनाई गई नीतियों को जिम्मेदार ठहरा दिया। श्री मुखर्जी ने बुधवार को भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी या कैग) के 150वें वर्ष के समारोह की समाप्ति पर अपने संबोधन में कहा,औरऔर भी
अण्णा हज़ारे उन्नीस दिनों का मौन व्रत तोड़ने के बाद शुक्रवार को फिर सरकार पर बीस पड़ते नजर आए। उन्होंने खुलकर कहा कि वे जनलोकपाल बिल न पारित होने पर वे कांग्रेस के खिलाफ चुनाव प्रचार करेंगे। कांग्रेस व बीजेपी के बारे में भी उन्होंने दो-टूक अंदाज में कहा कि एक भ्रष्टाचार में डॉक्टरेट कर ली है तो दूसरा इस मामले में पीएचडी हैं। शुक्रवार को सुबह राजधानी दिल्ली में महात्मी गांधी की समाधि राजघाट का दर्शनऔरऔर भी
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उधर फ्रांस के कान शहर में हो रहे जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन में मशगूल हैं। इधर यूपीए सरकार के हमलों से आहत सामाजिक कार्यकर्ता और टीम अण्णा के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल ने उन्हें एक करारा खत लिखा है। इस खत के साथ उन्होंने सरकार की तरफ से दावा किए गए 9 लाख 27 हज़ार 787 रुपए का चेक भी भेज दिया है। लेकिन कहा है कि उन्हें अभी तक अपनी गलती नहींऔरऔर भी
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुद्रास्फीति को काबू में रखकर ऊंची विकास दर को बराबर बनाए रखना है। यह मानना है कि हमारे अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का। उन्होंने रविवार को राजधानी दिल्ली में राज्यपालों के सम्मेलन में कहा कि हाल के महीनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों का बढ़ना चिंता का मसला है। उन्होंने कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति को कम करने के लिए वित्तीय और मौद्रिक उपाय जारी रखेंगे। रिजर्व बैंक मार्चऔरऔर भी
अभी तक केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) जैसी संस्थाएं ही खुद को लोकपाल के अधीन लाए जाने का विरोध कर रही थी। लेकिन अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी साफ कर दिया है कि लोकपाल का गठन हो जाने के बाद भी सीबीआई स्वतंत्र रूप से काम करती रहेगी। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में सीबीआई और राज्यों के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के 18वें द्विवार्षिक सम्मेलन में कहा, “हमें आशा है किऔरऔर भी
भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में गठित मंत्री समूह (जीओएम) ने प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन पर चावला समिति की कई सिफारिशों को मानने को कहा है। पूर्व वित्त सचिव अशोक की अध्यक्षता में इस समिति का गठन जनवरी 2011 में किया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट 31 मर्इ 2011 को सरकार को सौप दी थी। समिति को सरकार द्वारा आवंटित किए जा रहे मुख्य प्राकृतिक संसाधनों की पहचान, आवंटनऔरऔर भी
कॉरपोरेट जगत की प्रमुख हस्तियों ने देश के कर्णधारों को एक और खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में कहा गया है कि बड़े स्तर का भ्रष्टाचार तो नया लोकपाल बिल सुलझा सकता है। लेकिन उस भ्रष्टाचार का क्या होगा, जिससे आम आदमी को रोज-ब-रोज के जीवन में झेलना पड़ता है। तीन पन्नों का यह खुला पत्र उद्योग जगत के 14 दिग्गजों की तरफ से लिखा गया है। इसे 3 अक्टूबर को भी भेजा गया था। लेकिनऔरऔर भी
जो कश्मीर आतंकवादियों की पनाहगाह बना हुआ है, वहां अगर हमारी सेना के कुछ अफसर ही एयरफोर्स समेत रक्षा विभाग की जमीन गलत तरीके से बेचने लग जाएं तो दो बातें साफ हो जाती हैं। एक यह कि इन अफसरों का देशभक्ति की भावना से कोई लेनादेना नहीं है। और, दो यह कि देश में भ्रष्टाचार इतना सर्वग्रासी हो गया है कि सेना तक उससे अछूती नहीं रह गई है। रक्षा मंत्रालय ने अपनी जांच में पायाऔरऔर भी
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