बजट का शोर थम चुका है। विदेशी निवेशकों को जो सफाई वित्त मंत्री से चाहिए थी, वे उसे पा चुके हैं। अब शांत हैं। निश्चिंत हैं। बाकी, अर्थशास्त्रियों का ढोल-मजीरा तो बजता ही रहेगा। वे संदेह करते रहेंगे और चालू खाते का घाटा, राजकोषीय घाटा, सब्सिडी, सरकार की उधारी, ब्याज दर, मुद्रास्फीति जैसे शब्दों को बार-बार फेटते रहेंगे। उनकी खास परेशानी यह है कि धीमे आर्थिक विकास के दौर में वित्त मंत्री जीडीपी के आंकड़े को 13.4औरऔर भी

जिस देश के खज़ाना मंत्री को यह न पता हो कि उसके 125 करोड़ निवासियों में से कितने करोड़पति हैं और वो इसके लिए अमीरों की सत्यवादिता पर भरोसा करता हो, उस देश के खज़ाने का भगवान ही मालिक है और तय है कि कर्ज पर उस देश की निर्भरता बढ़ती चली जानी है। दूसरे शब्दों में उसका राजकोषीय घाटा बढ़ते ही जाना है। फिर भी हमारे वित्त मंत्री या खज़ाना मंत्री पी चिदंबरम दावा करते हैंऔरऔर भी

अगर वित्त वर्ष 2013-14 के बजट प्रावधानों को सरसरी निगाह से भी देखा जाए तो एक बात साफ हो जाती है कि यह बजट देश के लोगों या आम मतदाताओं को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि विदेशी निवेशकों और रेटिंग एजेंसियों को लुभाने के लिए लाया गया है। प्रमुख रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड पी) ने कई महीनों से दबाव बना रखा था कि अगर सरकार ने अपने वित्तीय प्रबंधन को दुरुस्त नहीं किया तोऔरऔर भी

नए साल के बजट में तमाम टैक्सों में घटबढ़ हो सकती है। टैक्स का आधार बढ़ाने की कोशिश भी हो सकती है। लेकिन एक बात तय है कि वित्त मंत्री पलनियप्पन चिदंबरम किसानों या कृषि आय पर कोई टैक्स नहीं लगाएंगे। वैसे, बीजेपी की तरफ से अगर यशवंत सिन्हा वित्त मंत्री बने होते तो वे भी यह जोखिम नहीं उठाते। फिर भी टैक्स आधार बढ़ाने की बड़ी-बड़ी बातों से कोई भी वित्त मंत्री बाज़ नहीं आता। दिक्कतऔरऔर भी

स्पेन की सरकार का ऋण इस साल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 79.8 फीसदी पर पहुंच जाएगा जो 1990 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। स्पेन के बजट मंत्री क्रिस्टोबल मोनटोरो ने मंगलवार को मैड्रिड में संवाददाता सम्मेलन में दौरान बताया कि साल 2012 में सरकार को 186.1 अरब यूरो (248 अरब डॉलर) का ऋण लेना पड़ेगा। इससे सरकार के ऋण व जीडीपी का अनुपात 79.8 फीसदी हो जाएगा, जबकि साल 2011 में यह 68.5 फीसदीऔरऔर भी

हमने निफ्टी में सारी लांग कॉल्स शुक्रवार को ही बंद कर दी थीं क्योंकि हमें अच्छी तरह पता था कि पी-नोट का मसला सप्ताहांत पर उछाला जाएगा। ऑपरेटर 65 लाख पुट यानी बेचने के ऑप्शंस सौदे कर चुके थे। इसलिए बाजार को कमजोरी के साथ ही खुलना था। निफ्टी साढ़े दस बजते-बजते 5195 तक चला गया जो 200 दिनों के मूविंग औसत (डीएमए) के बेहद करीब है। फिर बड़े स्टॉप लॉस लग गए और जो लोग लांगऔरऔर भी

चुनाव न होते तो बजट का रहस्य 16 दिन पहले ही खुल जाता। चलिए, इससे वित्त मंत्री और उनके अमले को अपने प्रस्तावों को ठोंक-बजाकर दुरुस्त करने के लिए ज्यादा वक्त मिल गया। लेकिन हम तो उन्हीं के भरोसे हैं तो हमें क्या वक्त मिलना और क्या न मिलना! इतना तय है कि बजट की एक-एक लाइन किसी न किसी रूप में कंपनियों के धंधे पर असर डालती है और इसका सीधा असर उनके शेयरों पर पड़ेगा।औरऔर भी

बाजार आज तकरीबन पांच मिनट को छोड़कर बाकी दिन भर ऊपर बना रहा। सेंसेक्स 0.48 फीसदी की बढ़त लेकर 17,587.67 और निफ्टी 0.49 फीसदी की बढ़त के साथ 5359.55 पर बंद हुआ। लेकिन एमसीएक्स नीचे में 1214 रुपए तक चला गया। यह मेरी उस धारणा की पुष्टि करता है कि आईपीओ में ओवर-सब्सक्रिप्शन ऊपर से कराया गया था, मैनेज किया गया था और जो भी मांग दिखाई गई, वह बनावटी थी। यही वजह है कि जिन लोगोंऔरऔर भी

इस समय देश में व्यक्तिगत आयकर देनेवाले लोग कुल तीन करोड़ हैं। इनमें से 2.02 करोड़ की सालाना आय दो लाख रुपए तक है। 56.73 लाख लोगों की सालाना आय दो से चार लाख रुपए है। चार से दस लाख रुपए तक सालाना आय के करदाता 36.07 लाख हैं। दस से बीस लाख कमानेवालों की संख्या 3.35 लाख है। साल में 20 लाख रुपए से ज्यादा कमानेवालों की संख्या केवल 1.85 लाख है। इन्होंने बीते वित्त वर्षऔरऔर भी

ये सरकार भी बड़ी जालिम चीज़ है! कहने को सबकी संरक्षक है, पालनहार है। मगर जब कंगाली में फंसते हो तो पूछती तक नहीं और जैसे ही आप कहीं से कमाई कर लेते हो, फौरन टैक्स वसूलने आ जाती है।और भीऔर भी