डेरिवेटिव सौदों में कैश सेटलमेंट के चलते बाजार कैसे हिल जाता है, इसके लिए मुझे नहीं लगता कि आपको अब किसी और प्रमाण की जरूरत है। जो बाजार पिछले सेटलमेंट में ज़रा-सा झुकने को तैयार नहीं था, वह नए सेटलमेंट के दूसरे ही दिन ताश के पत्तों की तरह ढह गया। निफ्टी गिरने लगा तो गिरते-गिरते अंत में 2.26 फीसदी की गिरावट के साथ 5087.30 पर बंद हुआ। यूं तो अभी और भी बहुत कुछ होना है।औरऔर भी

आज, शुक्रवार को डॉलर की विनिमय दर दोपहर ढाई बजे के आसपास 49.44 रुपए तक चली गई। याद कीजिए कि दिसंबर 2011 में मैंने रुपए के बारे में क्या कहा था। मैंने कहा था कि रुपया जनवरी में ही डॉलर के सापेक्ष 50 से नीचे चला जाएगा, जबकि दिग्गज लोग लिखित रिपोर्ट जारी कर रहे थे कि वो 58 रुपए पर पहुंच जाएगा। यह सच महज रुपए पर ही नहीं, तमाम स्टॉक्स पर भी लागू हो जाताऔरऔर भी

ज्यादातर रोल्स कल से होना शुरू हो गए हैं। यूं तो रोलओवर का सच बाजार के और बढ़ने की इजाजत नहीं देता। लेकिन बाजार बढ़ा जा रहा है। तमाम कंपनियों के नतीजे मिले-जुले रहे हैं। बहुत से स्टॉक्स दिसंबर तिमाही के खराब नतीजों के बावजूद नहीं गिर रहे हैं। इसका मतलब यही हुआ कि बाजार खुद को जमा रहा है। यह लंबे समय के लिए बड़ा शुभ लक्षण है। रिजर्व बैंक ने उम्मीद के मुताबिक ब्याज दरोंऔरऔर भी

उम्मीद के मुताबिक 5050 पर पहुंचकर निफ्टी की सांस फूलती नजर आई। जाने को वह सवा तीन बजे के आसपास ऊपर में 5064.15 तक चला गया। पर बंद हुआ 0.60 फीसदी की बढ़त के साथ 5048.60 पर। वैसे, यह अब भी 5140 तक जा सकता है। लेकिन अगर यह सीधे-सीधे वहां तक चला गया तो बाजार में लांग बने रहने का कोई तुक नहीं रहेगा क्योंकि करेक्शन के बिना कोई अच्छी चीज टिकती नहीं है। मेरा तर्कऔरऔर भी

ब्लूमबर्ग ने स्टोरी चलाई है कि अमेरिकी शेयर बाजार से संबद्ध स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड पी) सूचकांक में तेजी आ रही है। यह विश्लेषण के आधार पर निकला निष्कर्ष है जो मीडिया अब पेश कर रहा है, जबकि हम तो आपको 2008 से ही समय-समय पर एस एंड पी में लक्ष्य देते रहे है। हमने अनुमान जताया था कि 1250 को पार करते ही एस एंड पी भागने लगेगा। अब ऐसा हो रहा है और हरऔरऔर भी

बाजार चंद ऑपरेटरों की मुठ्ठी में कैद है और विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) इन्हीं ऑपरेटरों की मिलीभगत से काम करते हें। इस बात को आधार बनाकर हमने जो कॉल्स पेश की हैं, उन पर एक नजर डालने से ही इसकी सत्यता साबित हो जाती है। एक तरफ एफआईआई ब्रोकरेज हाउस सार्वजनिक तौर पर कहते रहे कि बाजार सेंसेक्स को 13,000 की दिशा में लिए जा रहा है। दूसरी तरफ उनके निशाने पर चढ़े तमाम स्टॉक्स कैश सेटलमेंटऔरऔर भी

जब सारे लोग यूरोपीय देशों के डाउनग्रेड के असर और एफआईआई ब्रोकरेज हाउसों की तरफ से लगातार घटाई जा रही रेटिंग के परेशान थे और इनके आधार पर निफ्टी के 4000 तक गिरने का निष्कर्ष निकाल रहे हैं जिसका साथ मीडिया के तमाम विश्लेषक भी दे रहे थे, तब इकलौता एक शख्स था जिसका मानना था कि जनवरी में ऐसा कतई नहीं होगा। और, वह शख्स था मैं। मैंने आपको बताया था कि मेरे आकलन के हिसाबऔरऔर भी

फ्रांस के डाउनग्रेड के बाद बाजार में एक बार फिर हल्की-सी सिहरन दौड़ गई। लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के सुधरते मूलाधार यूरोपीय कारकों को बेअसर करने के लिए काफी हैं। दिसंबर में मुद्रास्फीति की दर 7.47 फीसदी पर आ चुकी है। यह साफ संकेत इस बात का है कि ब्याज दरों में कटौती अब ज्यादा दूर नहीं है। मुद्रास्फीति की दर पर हमारा अनुमान 7.5 फीसदी से 8 फीसदी का था। वास्तविक आंकड़े का इससे कम रहना बाजारऔरऔर भी

बाजार में ज्यादा गिरने की गुंजाइश अब बची नहीं है। लेकिन हमारा बाजार इतना खोखला है कि यहां डेरिवेटिव्स के जरिए कृत्रिम स्तर बना दिए जाते हैं। यूं तो इस हफ्ते निफ्टी 4742.80 से शुरू होकर आज 4866 पर बंद हुआ। लेकिन सारी अच्छी खबरों के बावजूद इसे गिराकर 4400 से 4000 तक पहुंचा दिया जाए तो मुझे कोई अचंभा नहीं होगा। असल में अपने यहां पिछले 12 महीनों में निचले स्तरों, निफ्टी के औसतन 5000 केऔरऔर भी

अजीब खींचतान का शिकार रहा बाजार। आईटी सेक्टर नीचे खींच रहा था तो बैंकिंग सेक्टर ऊपर। इनफोसिस ने भविष्य के अनुमान का झटका दिया तो एचडीएफसी के नतीजे बाजार की सोच से कमतर रहे। इस ऊंच-नीच और खींचतान में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की अप्रत्याशित वृद्धि भी बाजार का मूड उठा नहीं सकी। निफ्टी दिन में 11 बजे के आसपास 4869.20 तक उठ गया। लेकिन सवा घंटे के भीतर ही 4803.90 तक गोता लगा गया। अंत में बंदऔरऔर भी