बजट के ठीक पहले से तुलना करें तो पिछले चार दिनों में बीएसई का इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर सूचकांक 12.68% और कैपिटल गुड्स सूचकांक 11.99% बढ़ चुका है। वहीं, इस दौरान खुद बीएसई सेंसेक्स 9.35% बढ़ा है। मतलब साफ है कि फंडामेंटल्स की समझ और संभावना पर चलनेवाले निवेशकों ने बजट में की गई घोषणाओं को गंभीरता से लिया है। वैसे, इस समय इंफ्रास्ट्रक्चर सूचकांक 17.42 के पी/ई पर ट्रेड हो रहा है, जबकि कैपिटल गुड्स सूचकांक 105.85 केऔरऔर भी

शेयर बाज़ार का बम-बम करना अर्थव्यवस्था का मजबूत स्थिति का पर्याय नहीं है। जो कोई शेयर बाज़ार की तेज़ी को अर्थव्यवस्था की मजबूती मानता या बताता है, वो या तो महामूर्ख है या महाधूर्त। अक्सर आर्थिक नीतियों में फिसड्डी साबित हो चुकी सरकारें ही बाज़ार की तेज़ी दिखाकर अपनी नाकामी पर परदा डालती हैं। दरअसल, अभी अपने यहां बाज़ार में जैसी तेज़ी चल रही है, वह सेटीमेंट की वजह से है और सेंटीमेंट तब बनता है जबऔरऔर भी

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने हमारे शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट में बजट के दिन 10,168.32 करोड़ रुपए और कल 13,585.57 करोड़ रुपए (दो दिन में 23,753.89 करोड़ रुपए) झोंके हैं। उन्होंने यह धन लगभग शून्य ब्याज पर उठाया है। वित्त मंत्री सीतारमण का नया बजट भी भरपूर उधारी पर टिका है। वित्त वर्ष 2021-22 में सरकार बाज़ार से 12 लाख करोड़ रुपए का भारी-भरकम उधार लेने जा रही है, जबकि टैक्स से 15.45 लाख करोड़ रुपए औरऔरऔर भी

बजट ने शेयर बाज़ार में जबरदस्त उन्माद पैदा कर दिया। सेंसेक्स 5% उछल गया। आखिर इस उन्माद का आधार क्या है? बजट का मूल स्वर तो राजनीति में बाज़ी मारने का है। जिन राज्यों में अगले साल तक चुनाव होने हैं, उनके लिए खास घोषणाएं की गई हैं। वित्त मंत्री के बजट भाषण में स्वास्थ्य पर खर्च 137% बढ़ाकर 2,23,846 करोड़ रुपए कर देने का दावा किया गया है। लेकिन बजट दस्तावेज में खर्च 82,445 करोड़ रुपए से घटाकर 74,602 करोड़ रुपए कर दिया गया है। अब मंगलवार की दृष्टि…और भी