शेयर बाज़ार का बम-बम करना अर्थव्यवस्था का मजबूत स्थिति का पर्याय नहीं है। जो कोई शेयर बाज़ार की तेज़ी को अर्थव्यवस्था की मजबूती मानता या बताता है, वो या तो महामूर्ख है या महाधूर्त। अक्सर आर्थिक नीतियों में फिसड्डी साबित हो चुकी सरकारें ही बाज़ार की तेज़ी दिखाकर अपनी नाकामी पर परदा डालती हैं। दरअसल, अभी अपने यहां बाज़ार में जैसी तेज़ी चल रही है, वह सेटीमेंट की वजह से है और सेंटीमेंट तब बनता है जबऔरऔर भी