वित्त वर्ष 2019-20 में अर्थव्यवस्था मात्र 4% बढ़ी। यह 11 सालों की न्यूनतम दर है। बीता वित्त वर्ष 2020-21 कोरोना की भेंट चढ़ गया। नतीजतन, अर्थव्यवस्था 7% सिकुड़ सकती है। फिर भी पांच साल में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और नए वित्त वर्ष में 11% विकास दर का सब्ज़बाग! राजनीति में ऐसी झांकी चलती है, मगर अर्थनीति में नहीं। 11% नहीं, 12% बढ़ जाए, तब भी नए साल में अर्थव्यवस्था 2019-20 की तुलना में 4.16% ही बढेगी, जबकि बीच का एक साल स्वाहा। अब तथास्तु में आज की कंपनी…और भी

बजट से इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को कोई खास उम्मीद नहीं। बीएसई इंफास्ट्रक्चर सूचकांक का पी/ई अनुपात फिलहाल 15.32 है, जबकि सेंसेक्स का पी/ई अनुपात 31.96 पर। तम्बाकू, सिगरेट व शराब कंपनियों पर हर बजट में टैक्स बढ़ता है तो उनके शेयर घबराए-घबराए चल रहे हैं। साथ ही आम लोगों को 80-सी के तहत टैक्स राहत बढ़ने की उम्मीद है तो जीवन व स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के स्टॉक्स इधर मुस्करा रहे हैं। वैसे भी, इधर वर्क-टू-होम से घरेलू बचत बढ़ गई है। सोमवार को आ रहा है बजट। फिलहाल शुक्रवार का अभ्यास…और भी

बजट से कुछ खास पाने की उम्मीद में रीयल एस्टेट कंपनियों के शेयर भी पिछले दिनों बढ़ते गए हैं। कभी इंडियाबुल्स रीयल एस्टेट 12% बढ़ गया तो कभी ओबेरॉय रियल्टी और गोदरेज प्रॉपर्टीज़ 7-8% बढ़ गए। किसानों का मुद्दा गरम है तो उन्हें शांत करने के बहाने फर्टिलाइजर सब्सिडी बढ़ाई जा सकती है। इसी उम्मीद में कभी ग्रासिम बढ़ता है तो कभी कोरोमंडल इंटरनेशनल। फार्मा व हेल्थकेयर स्टॉक्स तो पिछले कई महीनों से बढ़े जा रहे हैं। जेरनिक दवा कंपनियों को बजट से विशेष उम्मीद है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…और भी

ऑक्सफैम की रिपोर्ट बताती है कि कोरोना प्रकोप के बीच मार्च 2020 में लॉकडाउन लगने के बाद देश के शीर्ष 100 अरबपतियों की आय 12,97,822 लाख करोड़ रुपए बढ़ गई। जब उद्योग व सेवा क्षेत्र की सारी गतिविधियां ठप थीं, तब आखिर इतना धन उनके पास आया कहां से, जिससे 13.8 करोड़ निर्धनतम भारतीयों को 94,045 रुपए का चेक मुफ्त में दिया जा सकता है? इस दौरान एफएमसीजी, दवा और ऑनलाइन रिटेल के अलावा केवल शेयर बाज़ार ही चल रहा था! कितना कमाया होगा बाज़ार से? अब बुधवार की बुद्धि…और भी