आपको शेयर बाज़ार का प्रोफेशनल ट्रेडर बनना है तो बेहद अनुशासित व वैज्ञानिक सोच वाला बनना पड़ेगा। किसी की नकल से यहां अकल नहीं आ सकती। आपको अपनी विशेषताओं को समझकर उसी हिसाब से खुद का ट्रेडिंग सिस्टम विकसित करना होगा। भावनाओं के संवेग को हमेशा किनारे रखना होगा। शतरंज के खिलाड़ी की तरह हमेशा बुद्धि पर भरोसा रखना होगा। रिटेल ग्राहक की झपट्टामार प्रवृत्ति के बजाय थोक व्यापारी की सोच रखनी होगी। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

देश के गृहमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जोड़ीदार अमित शाह ने 8 दिसंबर को किसान नेताओं के साथ हुई बैठक में कहा था कि अगर सरकार सभी घोषित 23 फसलों को एमएसपी पर खरीदने लग जाए तो उसे हर साल 17 लाख करोड़ रुपए देने पड़ेंगे। अगर ऐसी बात है तो क्या एमएसपी केवल दिखाने के लिए है, देने के लिए नहीं। हाथी के दांत दिखाने के और, खाने के और? सवाल उठता है कि आखिरऔरऔर भी

आपका मुकाबला लाखों हुनरमंद, अनुभवी व सुविधा-सम्पन्न ट्रेडरों से है। इस बाज़ार में जो उन्नीस पर बीस पड़ेगा,  वही कमाएगा। अगर आपको लगता है कि यूं ही टहलते हुए जाएंगे और इन्ट्यूशन या किसी टिप्स की बदौलत उस्ताद शेर के जबड़े से शिकार छीन लेंगे तो यह आपकी गलतफहमी है। तय करें कि शेयर बाज़ार के किस हिस्से में आप दूसरों पर भारी पड़ सकते हैं और उसके अनुरूप अपनी धार विकसित करें। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में लाखों सुलझे और अनुभवी ट्रेडर हैं। सबके पास कंप्यूटर, स्मार्ट-फोन व टैबलेट जैसे टूल्स हैं। अच्छी स्पीड का इंटरनेट कनेक्शन। चार्टिंग का बेहतरीन सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर का बड़ा-सा स्क्रीन। राकेश झुनझुनवाला ने तो पूरा कमरा ही बनवा रखा है जहां दीवार पर बड़ी-बड़ी स्क्रीन पर तमाम शेयरों की लाइव चाल दिखती रहती है। अल्गोरिदम का खेल भी ट्रेडरों का पता होता है। सभी दूसरे का धन खींचने में लगे हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

इंसान के हाथों में इतनी बरकत है कि वह मिट्टी को सोना और पत्थर को हीरा बना सकता है। यही नहीं, अरबों साल पहले वह बंदर से इंसान बनना ही तब शुरू हुआ, जब उसने औजार बनाए, उन्हें इस्तेमाल करने का हुनर विकसित किया और आपसी संवाद के लिए भाषा ईजाद की। आज भी उसे हुनर, औजार या साधन दे दिए जाएं और उसकी भाषा में उससे सही संवाद किया जाए, महज लफ्फाज़ी न की जाए तो वह सब कुछ हासिल कर सकता है जो उसे चाहिए। फिर गरीबी क्या चीज़ है! आखिर कौन गरीब रहना चाहता है? वैसे भी गरीबी नैसर्गिक नहीं, बल्कि समाज की देन है। इंसान को हुनर, अवसर, साधन व काम करने की आज़ादी मिले तो गरीबी किसी दिन इतिहासऔर भी

शेयर बाज़ार के लिए यह संधि-सप्ताह है। चार दिन साल 2020 के। एक दिन साल 2021 का। चाहें तो पुरानी गलतियां पुराने साल में छोड़कर नए साल की नई शुरुआत इसी हफ्ते कर सकते हैं। याद रखें कि शेयर बाज़ार ऐसी जगह है जहां न्यूटन जैसे वैज्ञानिक भी गच्चा खाते रहे हैं। इसलिए ज़रूरी है कि हम न तो अपने भीतर हीनता-भाव रखें और न ही खुद के सर्वज्ञ होने का गुमान पालें। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी