शत-प्रतिशत फोकस ट्रेडिंग पर नहीं रहा और मन-बुद्धि को नेटफ्लिक्स, अमेजॉन प्राइम या टीवी चैनलों की सनसनी पर दौड़ाते रहे तो शेयर बाज़ार इसकी पूरी कीमत वसूल लेगा। याद रखें कि यह परीक्षा नहीं, स्पर्धा है। वैसे भी अब 99% पर ही कट-ऑफ लिस्ट बनने का ज़माना है। रत्ती भर भी पीछे तो कोई दूसरा बाज़ी मार ले जाएगा। फिर शेयर बाज़ार तो 100% ही मागता है। इसमें 99% से काम नहीं चलता। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी