यूं ही नहीं 95% रिटेल ट्रेडर खाते रहते घाटा!
इधर बाज़ार में रिटेल निवेशकों की सक्रियता बढ़ने से डिलावरी आधारित सौदे ज्यादा हो रहे हैं। वे भले ही कम मात्रा में खरीदें, लेकिन ऐसे लाखों निवेशकों की खरीद से शेयरों के भाव चढ़ जा रहे हैं। नतीजतन, फ्चूचर्स के भावों को कैश सेगमेंट के भावों से पीछे दौड़ना पड़ता है। लेकिन यह सिलसिला आखिर कब तक चलेगा। रिटेल ट्रेडरों/निवेशकों की रीत है कि वे अमूमन चोटी पर खरीदते और तलहटी पर बेचते हैं। यही वजह हैऔरऔर भी
रिटेल बना कैश-डेरिवेटिव के बीच चकरघिन्नी
रिटेल ट्रेडर टिप्स और भावों के पीछे भागता है। सलाहकार और ब्रोकर अक्सर उसे वही स्टॉक्स खरीदने को कहते हैं जो पहले से चढ़ चुके होते हैं। लेकिन काश, शेयर बाज़ार में भावों की गति इतनी आसान होती! यकीनन, कैश व डेरिवेटिव सेगमेंट आपस में गुंथे हुए हैं और डेरिवेटिव्स कैश में चल रहे भावों की छाया होते हैं। लेकिन डेरिवेटिव सेगमेंट अब इतना बड़ा व स्वतंत्र हो गया है कि पलटकर कैश सेगमेंट को नचाने लगाऔरऔर भी
तेज़ी जब चरम पर, तब एंट्री रिटेल ट्रेडरों की
रिटेल ट्रेडरों के साथ सबसे बड़ी दिक्कत है कि वे लालच की भावना में डूबकर बाज़ार में उतरते हैं और बिकवाली की स्थिति में फौरन घबराकर बेचने लगते हैं। कंपनियों के 100, 200 या 300 शेयर खरीदते हैं और तब खरीदते हैं जब बाज़ार अपने उफान पर होता है। जब समझदार निवेशक, संस्थाएं, प्रोफेशनल ट्रेडर खरीद चुके हैं तब रिटेल ट्रेडरों की एंट्री होती है। तब अखबार व पत्रिकाओं से लेकर बिजनेस चैनल और ब्रोकरों की टिप्सऔरऔर भी
लौ पर पतंगों की तरह बाज़ार में रिटेल ट्रेडर
इधर हमारा शेयर बाज़ार जिस कदर बेतहाशा बढ़ रहा है, उसकी एक वजह रिटेल निवेशकों का पतंगों की तरह उमड़ना भी हो सकता है। इसका संकेत बाजार में बढ़ते वोल्यूम से मिलता है। अमूमन कैश सेगमेंट में 65,000 से 75,000 करोड़ रुपए का वोल्यूम होता था। लेकिन 29 जनवरी को यह 85000 करोड़, बजट के दिन 87,600 करोड़ और 2 फरवरी को तो 1,00,470 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। 4 फरवरी को यह 90,288 करोड़ था, जिसमेंऔरऔर भी
अभी निवेश नहीं, लालच की संस्कृति छाई है
अपने यहां आम लोगों में शेयर बाज़ार से जुड़ी इक्विटी या निवेश की नहीं, बल्कि लालच की संस्कृति छाई है। उनकी इसी लालच की टपकती लार का दोहन करने के लिए अधिकांश म्यूचुअल फंडों से लेकर ब्रोकर, निवेश सलाहकर व यूलिप स्कीमें ला रहीं बीमा कंपनियां तक लगी हुई है। लोग टिप्स खोजते हैं, शेयर बाज़ार में लिस्टेड अच्छा बिजनेस करनेवाली कंपनियां नहीं। नहीं समझते कि 60% निवेश लार्जकैप, 30% निवेश मिडकैप, 15% निवेश स्मॉलकैप और 5%औरऔर भी






