बीएसई व एनएसई में मिलाकर हर दिन करीब तीन हजार कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग होती है। इनमें से सैकड़ों शेयर हर दिन बढ़ते हैं। ऐसे में कोई चुनना चाहे तो हर दिन बढ़नेवाले दो-चार शेयर छांटना मुश्किल नहीं है। लेकिन हर दिन की बढ़त पर निगाह ट्रेडरों की रहती है जो दिन के दिन अपनी कमाई कर घर निकल लेते हैं। हमें तो ऐसे शेयर चुनने हैं जो छह महीने साल भर में एफडी से ज्यादाऔरऔर भी

नाम है तिलकनगर इंडस्ट्रीज, धंधा है दारू का। कुछ लोगों को परहेज हो सकता है कि शराब, सिगरेट व गुटखा जैसी नशीली चीजें बनानेवाली कंपनियों में निवेश नहीं करेंगे। अच्छी बात है। हालांकि धंधा तो धंधा होता है और हमें यही देखना है कि हमारी पूंजी कहां बढ़ सकती है। महाभारत खत्म होने पर श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को धर्म की शिक्षा लेने के लिए एक कसाई के पास भेजा था। खैर, तिलकनगर इंडस्ट्रीज (बीएसई – 507205,औरऔर भी

कंसोलिडेटेड कंस्ट्रक्शन कंसोर्टियम लिमिटेड (सीसीसीएल) का शेयर पिछले एक महीने में 72 रुपए से 15 फीसदी से भी ज्यादा गिरकर 61 रुपए पर आ चुका है। इस दरम्यान वह 26 नवंबर को 60 रुपए तक चला गया है जो 52 हफ्तों का उसका न्यूनतम स्तर है। इस शेयर की बुक वैल्यू 33.52 रुपए है, जबकि उसका ठीक पिछले बारह महीनों का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 4.88 रुपए है। इस तरह कल बीएसई (कोड – 532902) में 60.90औरऔर भी

प्लेथिको फार्मास्यूटिकल्स जड़ी-बूटी पर आधारित फॉर्मूलेशन, पोषण से जुड़े उत्पाद और एलोपैथिक दवाएं बनाती है। जड़ी-बूटी व पोषण सेगमेंट में उसके प्रमुख ब्रांड हैं ट्राविसिल, माउंटेन हर्ब्स व कोच फॉर्मूला, जबकि एलोपैथिक दवाओं के उसके खास ब्रांड हैं थेरासिल और इफरटैब। लेकिन स्टॉक के लिहाज से इसमें सबसे खास बात यह लगती है कि प्रवर्तक इससे एकदम चिपके हुए हैं। उन्होंने कंपनी की 34.07 करोड़ रुपए की इक्विटी का 87.01 फीसदी अपने पास रख रखा है। एफआईआईऔरऔर भी

गैमन इंडिया का शेयर (बीएसई – 509550, एनएसई – GAMMONIND) तीन हफ्ते पहले 29 नवंबर को 150.55 रुपए का न्यूनतम स्तर छूने के बाद उठता जा रहा है। यह 2 दिसंबर को ऊपर में 187 रुपए तक जा चुका है। हालांकि कल यह पिछले भाव से 0.56 फीसदी गिरकर 170 रुपए पर बंद हुआ है। लेकिन यकीन मानिए, इस कंपनी में दम है और इसका शेयर 52 हफ्ते के अपने उच्चतम स्तर 276 रुपए (20 जनवरी 2010)औरऔर भी

पुंज लॉयड का शेयर (बीएसई – 532693, एनएसई – PUNJLLOY) दो महीने पहले 15 अक्टूबर को ऊपर में 134.20 रुपए तक गया था। इसके बाद गिरते-गिरते 26 नवंबर को 81 रुपए की तलहटी पर चला गया। अब बीते हफ्ते 16 दिसंबर तक ऊपर की दिशा पकड़कर 106.30 रुपए पर पहुंच गया। उसमें बढ़त का ताजा सिलसिला 10 दिसंबर को शुरू हुआ है। उसी दिन उसने थाईलैंड की कंपनी पीटीटी पब्लिक लिमिटेड से 1292 करोड़ और भारत कीऔरऔर भी

महाराष्ट्र सीमलेस (बीएसई – 500265, एनएसई – MAHSEAMLES) का नाम सुनकर लगता है कि जैसे यह महाराष्ट्र के किसी उद्योगपति की कंपनी हो। लेकिन यह हरियाणा के डी पी जिंदल समूह की कंपनी है। असल में देश में जिंदल नाम के तीन समूह है और तीनों का मूल परिवार एक है। पहला, ओ पी जिंदल समूह जिसकी मुख्य कंपनियां हैं – जिंदल स्टेनलेस, जिंदल सॉ, जेएसडब्ल्यू स्टील और जिंदल स्टील एंड पावर। दूसरा, एस एस जिंदल समूहऔरऔर भी

फर्स्टसोर्स सोल्यूशंस (एनएसई–FSL, बीएसई–532809) आईसीआईसीआई बैंक द्वारा प्रवर्तित कंपनी है। दुनिया की तमाम कंपनियों को हेल्थकेयर, टेलिकॉम व मीडिया और बैंकिंग व वित्तीय सेवाओं से जुड़ी बीपीओ सेवाएं उपलब्ध कराती है। फॉर्च्यून-500, फुटसी-100 और निफ्टी-50 में शामिल कई कंपनियां उसकी ग्राहक हैं। वह अपने कामकाज का संचालन भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन और फिलीपींस से करती है। इन सभी केंद्रों में उसके कुल कर्मचारियों की संख्या लगभग 25,000 है। इसका शेयर 10 दिसंबर, शुक्रवार को 19.40 रुपएऔरऔर भी

कभी-कभी शेयर बाजार से आ रही खबरों को देखकर लगता है कि यहां चालबाजों और संस्थाओं का ही खेल चलता है। चालबाज भावों के साथ खेलते हैं और देशी-विदेशी संस्थाओं का अपना जोड़तोड़ है। लेकिन यही पूरा सच नहीं है। शेयर बाजार में वाजिब निवेशक भी है और उनकी खरीद भी समझदारी भरी होती है। ऐसे निवेशक इस समय बॉटम फिशिंग या तलहटी पर पहुंचे मजबूत शेयरों को खरीदने में जुट गए हैं। इसका छोटा-सा अंदाज इससेऔरऔर भी

नवीन फ्लूवोरीन इंटरनेशनल (बीएसई – 532504, एनएसई – NAVINFLUOR) शुक्रवार को 52 हफ्ते के न्यूनतम स्तर 253 रुपए तक गिरने के बाद 261.05 रुपए पर बंद हुआ है। पिछले एक महीने में यह 25 फीसदी से ज्यादा टूटा है। 12 नवंबर को ऊपर में 340 रुपए तक चला गया था और 10 दिसंबर तो 253 रुपए तक नीचे चला गया। अगर यह गिरावट आनी ही थी तो 19 अक्टूबर के आसपास आनी चाहिए थी क्योंकि उस दिनऔरऔर भी