क्या हम-आप जैसे सामान्य निवेशक सही स्टॉक्स के चयन में लंबी-चौड़ी टीम के साथ काम कर रहे किसी म्यूचुअल फंड के कम से कम एमबीए पढ़े फंड मैनेजर की बराबरी कर सकते हैं? शायद नहीं। लेकिन म्यूचुअल फंड में होने के नाते उसकी जो मजबूरियां हैं, हम उनसे मुक्त भी हैं। स्कीम का एनएवी (शुद्ध आस्ति मूल्य) बराबर बनाकर रखना। निवेश निकालने वाले कॉरपोरेट निकायों व बड़े निवेशकों की मांग पूरी करना। सबसे बड़ी मुश्किल म्यूचुअल फंडऔरऔर भी

वीएसटी इंडस्ट्रीज देश की प्रमुख सिगरेट निर्माता कंपनी है। 1930 में हैदराबाद शहर में उसका गठन हुआ था तो नाम वज़ीर सुल्तान टोबैको कंपनी हुआ करता था। चार्म्स, चारमीनार और मोमेंट्स उसी के ब्रांड हैं। यूं तो सिगरेट के बाजार में विल्स और गोल्ड फ्लैक जैसे ब्रांड़ों के साथ आईटीसी का कमोबेश एकाधिकार है। लेकिन ब्रोकरेज फर्म आईसीआईसीआई सिक्यूरिटीज का कहना है कि सस्ते सिगरेटों के बाजार में वीएसटी का दबदबा है और कंपनी को लोगों कीऔरऔर भी

स्ट्राइड्स आर्कोलैब है तो 1990 में बनी और बैंगलोर में जमी भारतीय फार्मा कंपनी, लेकिन इसका तंत्र विश्व स्तर पर फैला हुआ है। अमेरिका, ब्राजील, मेक्सिको, इटली, पोलैंड व सिंगापुर में उत्पादन संयंत्र हैं तो करीब 70 देशों में मार्केटिंग नेटवर्क। देश में इसकी उत्पादन इकाइयां बैंगलोर, मैंगलोर, भरुच (गुजरात) और बोइसर (ठाणे, महाराष्ट्र) में हैं। बनाती तो जेनेरिक से लेकर ब्रांडेड फार्मा उत्पाद है। लेकिन ज़ोर स्टेराइल इंजेक्टेबल्स पर है। वह दुनिया के सबसे बड़ी सॉफ्टऔरऔर भी

आईएसएमटी की कहानी तीन दशक से ज्यादा पुरानी है। असैनिक एयरक्राफ्ट बनानेवाली कंपनी तनेजा एयरोस्पेस के प्रवर्तक बलदेव राज तनेजा इसके कर्ताधर्ता हैं। 1980 में बनी तो नाम इंडियन सीमलेस मेटल ट्यूब्स था। बीस बाद साल 2000 अपनी एक प्रतिद्वंद्वी कंपनी कल्याणी सीमलेस ट्यूब्स का अधिग्रहण कर लिया। 2005 में अपनी ही इकाई को मिलाने के बाद आईएमएमटी का नाम धर लिया। 2007 में उसने स्वीडन की बेहद पुरानी कंपनी स्ट्रक्टो हाइड्रॉलिक्स का अधिग्रहण कर लिया। कंपनीऔरऔर भी

आप सभी को चैत्र शुक्‍ल पक्ष प्रतिपदा यानी, नव संवत्सर के पहले दिन गुड़ी पडवा के साथ ही उगाड़ी, चेटीचंद, नवरेह और साजिबू चेइराओबा पर्व की बहुत-बहुत बधाइयां। वाकई, अपने देश की इतनी विविधता देख मन मगन हो जाता है। लेकिन आज का दिन थोड़े दुख का दिन भी है। आज भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत का दिन है। यूं तो शहीदों का बलिदान दिवस दुख मनाने का नहीं, बल्ले-बल्ले करने का होता है। लेकिनऔरऔर भी

स्वीडन से निकले और ब्रिटेन में जमे ईसाब समूह की भारतीय सब्सडियरी ईसाब इंडिया के बारे में हमने सबसे पहले यहां करीब तेरह महीने 16 फरवरी 2011 को लिखा था। तब इसका दस रुपए अंकित मूल्य का शेयर 480.30 रुपए तक चल रहा था। करीब सात महीने बाद 14 सितंबर 2011 को यह 591.30 रुपए तक चला गया। सात महीने में 23 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न। लेकिन उसके बाद गिरते-गिरते 20 दिसंबर 2011 को 422 रुपएऔरऔर भी

गिरते हैं घुड़सवार ही मैदाने जंग में। किरण मजूमदार-शॉ की कंपनी बायोकॉन को करीब हफ्ते भर पहले तगड़ा झटका लगा, जब फाइज़र ने उसके बनाए इंसूलिन उत्पादों को अमेरिका में बेचने का करार रद्द कर दिया। दोनों की तरफ से जारी साझा बयान में कहा गया, “बायोसिमिलर बिजनेस में अपनी अलग प्राथमिकताओं के चलते कंपनियां इस नतीजे पर पहुंची हैं कि स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने में ही उनका सर्वोपरि हित है।” धंधे में रिश्ते बनते हैं,औरऔर भी

ट्रेडिंग के लिए हम ऐसे स्टॉक्स चुनते हैं जो खरीद-फरोख्त के असर से घट-बढ़ सकते हैं, जबकि निवेश में हम ऐसी कंपनियों को चुनते हैं जिनका धंधा पुख्ता आधार पर खड़ा हो और जिसमें बढ़ने की भरपूर गुंजाइश हो। दिक्कत है कि हममें से 99 फीसदी लोग ट्रेडिंग की मानसिकता रखते हैं। छाया के पीछे भागते हैं और माया गंवाते रहते हैं। यह रुख न तो देश की अर्थव्यवस्था और न ही हमारे दीर्घकालिक आर्थिक स्वास्थ्य केऔरऔर भी

हमें इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि सेल मार्केटिंग की एक बाजीगरी है जिसके चलिए उपभोक्ताओं की मानसिकता को भुनाया जाता है। शेयर बाजार में भी हर साल इस तरह की ‘क्लियरेंस’ सेल तीन बार लगती है, जिसमें बेचनेवाले अपना माल निकालते हैं। पहली बजट के आसपास, दूसरी दीवाली पर और तीसरी नई साल की शुरुआत पर। सेल में लोगबाग टूटकर भाग लेते हैं। जब उन्हें कोई रोक नहीं सकता तो आपको कोईऔरऔर भी

वित्त मंत्री ने अपने हिसाब से शेयर बाजार को लुभाने की बहुत कोशिश की। एसटीटी (सिक्यूरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) घटा दिया। ग्राहकों की तंगी से त्रस्त बाजार में नए रिटेल निवेशकों को खींचकर लाने के लिए एकदम तरोताजा, राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम शुरू कर दी। आईपीओ लाने की प्रक्रिया आसान कर दी। इसकी लागत घटा दी। कंपनियों को छोटे शहरों के और ज्यादा निवेशकों तक पहुंचने में मदद की। दस करोड़ रुपए से ज्यादा के आईपीओ कोऔरऔर भी