सारा कुछ दस साल में, पहले था सन्नाटा!
युद्ध में बढ़-चढ़कर दावे किए जाते हैं और सतर्क से सतर्क मीडिया तक के पास कोई साधन नहीं होता कि वो पक्के तौर पर कह सके कि किसके दावे सहीं हैं और किसके गलत। लेकिन अपने यहां तो विचित्र स्थिति है। यहां तो लगता है कि खुद भारत सरकार ही देश की सैन्य स्थिति पर भारत की जनता के साथ युद्ध लड़ रही है और हमारे पास दीदा फाड़कर देखने के अलावा कोई चारा नहीं है। ऑपरेशनऔरऔर भी
