बेहद आश्चर्य की बात है कि देश के जिस मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की हालत पस्त है, भाजपा-नीत एनडीए के बारह सालों के शासन में जिसे बड़ी-बड़ी बातों के बावजूद अपने हाल पर छोड़ दिया गया, उसने राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने के लिए बने चुनावी ट्रस्टों को सबसे ज्यादा धन दिया है और इन ट्रस्टों ने सबसे ज्यादा चंदा भाजपा को दिया है। यह तथ्य एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के ताज़ा अध्ययन से उजागर हुआ है। आखिर इसऔरऔर भी

राष्ट्रवाद एक ऐसी पवित्र भावना व धारणा है जिसमें देश की अस्मिता, संप्रभुता, भूभाग, आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक हितों की रक्षा के लिए सब कुछ बलिदान कर दिया जाता है। फिर खुद को सबसे बड़ा राष्ट्रवादी बतानेवाली भाजपा, उसके सबसे ताकतवर व यशस्वी कहे जाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार का यह कर्म कैसे व क्यों कि जब चीन गलवान घाटी में घुसपैठ कर भारत की हज़ारों किलोमीटर ज़मीन कब्जा कर लेता है तो मोदी बयानऔरऔर भी

अमेरिका की शर्तों पर व्यापार संधि करने की यह कैसी मजबूरी है कि खुद को राष्ट्रवादी बताने वाली मोदी सरकार देश के कानूनों को भी धता बताने में जुट गई है। वो पिछली गली से अमेरिका की जीएम फसलों को गुपचुप भारत में घुसा रही है। भारत में बीटी कॉटन के अलावा कोई भी जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम) फसल आयात नहीं की जा सकती है। अमेरिका में भुट्टे व मक्के से लेकर सोयाबीन तक प्रमुख जीएम फसलें हैंऔरऔर भी

मोदी सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बाद झूठ व स्वांग के तीसरे सरदार हैं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान। अमेरिका-भारत व्यापार पर अंतरिम सहमति से पहले फ्रेमवर्क की एकतरफा घोषणा के बाद ही चौहान ने कह डाला, “कृषि मंत्री के तौर पर मैं गर्व से कह सकता हूं कि हमारे किसानों के हितों की पूरी तरह सुरक्षित हैं। किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद। उनके नेतृत्वऔरऔर भी

इतिहास गवाह है कि दुनिया का कोई भी देश मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ाए बिना समृद्ध नहीं बन सका है। चाहे वो अमेरिका हो, जापान हो, दक्षिण कोरिया हो या चीन। भारत इसका अपवाद नहीं हो सकता। लेकिन मोदी सरकार मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ाने के लिए केवल जुबानी जमाखर्च कर रही है। देश के जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र का योगदान बारह सालों से 15-16% पर अटका हुआ है। पहले यूरोपीय संघ के साथ हुई संधि को वाणिज्य मंत्रीऔरऔर भी

देश के सीने पर बारह साल से चढ़कर बैठी मोदी सरकार में हांकने वालों की कोई कमी नहीं। वैसे, लम्बी फेंकने व हांकने में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई सानी नहीं। लेकिन उनको किनारे रख दें, तब भी इनके मंत्री परिषद में एक से एक नमूने भरे पड़े हैं। वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ऐसे ही एक नगीना हैं। उनका दावा है कि यूरोपीय संघ के साथ की गई व्यापार संधि व्यापार ही नहीं, भारतऔरऔर भी

ऐसा नहीं है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एकदम बौडम और महामूर्ख हैं। ऐसा भी नहीं कि देश-विदेश में विशेषज्ञों की कोई कमी है। लेकिन असली समस्या यह है कि सरकार की नीयत में भयंकर खोट है। बजट में कहा गया है कि किसानों की आमदनी बढ़ाने का लक्ष्य उत्पादकता और उद्यमशीलता बढ़ाकर हासिल किया जाएगा। लघु व सीमांत (2.5 एकड़ से पांच एकड़ जोत वाले) किसानों पर खास ध्यान दिया जाएगा। सरकार ने इसके लिए भारत-विस्तारऔरऔर भी

हम एक ऐसे दौर में रह रहे हैं, जब हर देशवासी को हमारे राष्ट्रीय हितों को ठीक से जानना व समझना ज़रूरी है। नहीं तो केंद्र की सत्ता में बैठी सरकार कभी भी राष्ट्रीय हितों का नाम लेकर देश को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। बजट में बड़ी मासूमियत से कहा गया कि डेटा केंद्रों में निवेश बढ़ाने और ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत को देखते हुए भारत में डेटा सेंटर की सेवाओं को इस्तेमाल करते हुए दुनियाऔरऔर भी

कितनी विडम्बना है कि इस सरकार को अपने और अपनों के अलावा किसी का स्वार्थ नहीं दिखता। इन्हीं निजी स्वार्थों को वो देश का हित बनाकर प्रोजेक्ट कर रही है। इसका एक छोटा-सा प्रमाण है मुंबई का इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज। इसे फिक्की और सीआईआई जैसे देश के शीर्ष उद्योग संगठनों ने भारत सरकार के सूचना व प्रसारण मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर प्रमोट किया है। इसे देश में एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट, गेमिंग वऔरऔर भी

बजट में एक तरफ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दावा किया कि उनकी सरकार ने एक दशक तक चले सतत व सुधार-उन्मुख प्रयासों से लगभग 25 करोड़ लोगों को बहु-आयामी गरीबी से बाहर निकाल लिया। दूसरी तरफ देश के 81.35 करोड़ गरीबों को महीने में पांच किलो मुफ्त राशन देने की प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के लिए बजट प्रावधान ₹2.03 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹2.27 लाख करोड़ कर दिया गया। साथ ही उर्वर भूमि को जहरीली बनाऔरऔर भी