मुद्रास्फीति ऐसा गंभीर और संवेदनशील मुद्दा है कि इस पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी और वित्त राज्यमंत्री नमो नारायण मीणा तक बड़ी विनम्रता से बोलते हैं। लेकिन कृषि मंत्री शरद पवार इतने मुंह-फट हो गए हैं कि लगता ही नहीं कि उन्हें जनता या सरकार किसी की भी प्रतिक्रिया की कोई परवाह है। मंगलवार को पवार ने कहा कि सरकार फल और सब्जियों की कीमतों से कोई लेनादेना नहीं है और वहऔरऔर भी

अगले हफ्ते सोमवार को पेश होनेवाले आम बजट में बीमा से लेकर रक्षा और मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर कुछ सकारात्मक घोषणाएं हो सकती हैं। इस बात का स्पष्ट संकेत सोमवार को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने बजट सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने कहा, ‘‘हमें निवेश के लिए वातावरण को अनुकूल बनाने की जरूरत है। सार्वजनिक व निजी निवेश के साथऔरऔर भी

महाराष्ट्र सरकार ने रिलायंस के रायगढ़ जिले में स्थित महा मुंबई विशेष आर्थिक ज़ोन  (एसईजेड या सेज) को खत्म करने के संकेत देते हुए कहा कि किसान अपनी भूमि का मनमाफिक इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र हैं। समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट के अनुसार राज्य सरकार के एक अधिकारी का कहना है कि सरकार ने भूमि दस्तावेज में से सेज के लिए आरक्षित संकेत संख्या सात बटा बारह को हटाने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि यहऔरऔर भी

सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि वह 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित कर सकती है। लेकिन उसने अन्य मामलों को इसके दायरे में लाने की संभावना से इनकार कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने सोमवार, 21 फरवरी से शुरू होकर तीन महीने चलनेवाले संसद के बजट सत्र से पूर्व शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में इस प्रकार का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि जेपीसी गठित करनेऔरऔर भी

सरकार ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और एंट्रिक्स व निजी फर्म देवास मल्टीमीडिया के बीच हुए एस-बैंड स्पेक्ट्रम के विवादास्पद करार को रद्द कर दिया है। आज, गुरुवार को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक में यह फैसला लिया गया। यह फैसला अंतरिक्ष आयोग की संस्तुति के आधार पर किया गया है। गुरुवार को सीसीएस की बैठक खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई। प्रधानमंत्री ने कल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के संपादकों से साथऔरऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दावा किया है कि सरकार ने आर्थिक नीतियों में सुधार का रास्ता नहीं छोड़ा है और 2011-12 के बजट में और सुधारों की घोषणा की जाएगी। हालांकि उन्होंने महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में पेश किए जाने में देरी के लिये विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया। प्रधानमंत्री ने इलेक्ट्रानिक मीडिया के संपादकों के साथ बातचीत में कहा, ‘‘नहीं, हमने सुधार नहीं छोड़ा है। मुझे उम्मीद है कि आगामी बजट में हम सुधार एजेंडे कीऔरऔर भी

अभी कल तक बड़े-बड़े विद्वान कह रहे थे कि जनवरी माह में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 8.5 फीसदी रहेगी। लेकिन, आज सोमवार को घोषित दर 8.23 फीसदी रही है जो इससे पहले के महीने दिसंबर की मुद्रास्फीति दर 8.43 फीसदी से कम है। अर्थशास्त्री कह रहे थे कि खाने-पीने की चीजों के ज्यादा दाम और पेट्रोल के महंगा होने से मुद्रास्फीति बढ़ जाएगी। लेकिन हकीकत में गेहूं, दाल व चीनी जैसे जिंसों केऔरऔर भी

दिसंबर 2010 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों को देखें तो दिसंबर 2009 की तुलना में यह केवल 1.6 फीसदी बढ़ा है। यह पिछले बीस महीनों में औद्योगिक उत्पादन में हुई सबसे कम वृद्धि दर है। लेकिन अगर अप्रैल-दिसंबर 2010 के नौ महीनों की बात करें तो औद्योगिक विकास दर पिछले वित्त वर्ष 2009-10 की समान अवधि के बराबर 8.6 फीसदी है। रेटिंग एजेंसी केयर का कहना है कि इस दिसंबर में आईआईपी में कम वृद्धिऔरऔर भी

शेयर बाजार को सायास गिराने में लगे लोग भले ही यह बात न मानें। लेकिन सच यही है कि अर्थव्यवस्था से सकारात्मक संकेत आने शुरू हो गए हैं। सबसे बड़ा संकेत यह है कि खाद्य वस्तुओं के थोक मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 29 जनवरी को समाप्त सप्ताह में करीब चार फीसदी की भारी गिरावट के साथ 13.07 फीसदी पर आ गयी है। ठीक इससे पहले के सप्ताह यह 17.05 फीसदी थी। सात हफ्ते में खाद्यऔरऔर भी

बुधवार को बिना किसी ठोस वजह के अफवाहों के दम पर अनिल अंबानी समूह की सभी कंपनियों के शेयरों पर जबरदस्त हमला किया गया। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर को एक समय 25.14 फीसदी गिराकर साल के नए न्यूनतम स्तर 492.85 रुपए पर पहुंचा दिया गया। हालांकि वो बंद हुआ 18.79 फीसदी की गिरावट के साथ 534.70 रुपए पर। अभी कल मंगलवार तक यह शेयर 658.40 रुपए पर था और आज दिन में ऊपर 666 रुपए तक चला गया था।औरऔर भी