मुझे पता है कि कुछ ट्रेडर्स इतने थक और पक गए हैं कि वे अब भारतीय इक्विटी को लेकर उतना गंभीर नहीं रहे। मैं गुजरात में करीब 10,000 निवेशकों से मिला और मुझे अहसास हुआ कि उनमें से ज्यादातर शेयर बाजार के पक्ष में नहीं है। बस ट्रेडिंग के लिए ट्रेडिंग करते हैं। यहां तक कि आज खरीदो, कल बेचो (बीटीएसटी) वाले खिलाड़ी भी थक गए हैं और लंबे समय से उन्होंने भी निफ्टी में शॉर्ट रहना,औरऔर भी

अमेरिकी बाजारों की गिरावट और हंगरी के संकट के बावजूद अगर बाजार (बीएसई सेंसेक्स) 431 अंक तक गिर गया और बंद हुआ करीब 337 अंक की गिरावट के साथ तो इसमें बहुत परेशान होने की बात नहीं है। एनएसई निफ्टी में इसी तरह का करेक्शन आया है। ध्यान दें कि ऐसे हर करेक्शन के बाद बाजार ने वापसी की है और एनएसई निफ्टी पूरी दृढ़ता के साथ 5000 और 5100 का स्तर पार कर गया है। आजऔरऔर भी

जी-20 के सम्मेलन तक में दुनिया भारत की ओर देख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति को लगा कि अब भारत के साथ रिश्ते मधुर बनाने का वक्त आ गया है क्योंकि भारत जिस रफ्तार से विकास कर रहा है, उससे वह एक दिन सारी दुनिया का चहेता बन जाएगा और विश्व अर्थव्यवस्था को मंदी से बाहर निकाल सकता है। यह भी बड़ी विचित्र बात है कि निवेशक और ट्रेडर बड़ी आसानी से चीन को किनारे कर रहे हैं।औरऔर भी

एक बार फिर यह बात साबित हो गई कि ज्यादातर ट्रेडर और निवेशक अपना दिमाग ही इस्तेमाल नहीं करते। वे बिजनेस चैनलों पर आनेवाले मुट्ठी भर एनालिस्टों की बातों पर यकीन करके गुमराह हो जाते हैं। असल में ये लोग ट्रेडरों और निवेशकों का एकदम ब्रेन-वॉश कर देते हैं। जब कंप्यूटर पर पंचिंग की एक गलती से रिलायंस को झटका लगा और बाजार (सेंसेक्स) 400 अंक गिर गया तो अधिकांश एनालिस्ट कहने लगे कि अब तो बाजारऔरऔर भी

बीएसई के बी ग्रुप की कंपनी स्टाइलम इंडस्ट्रीज का शेयर सुबह-सुबह 4.74 फीसदी बढ़कर 42 रुपए पर पहुंच गया। इसमें सर्किट लिमिट ऊपर में 48.10 रुपए की है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2009-10 में 64.79 करोड़ रुपए की आय पर 4.37 करोड़ का कर-पूर्व लाभ और 3 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। उसकी प्रति शेयर कमाई (ईपीएस) अभी 4.10 रुपए है। कंपनी ने इस साल कुल 15 फीसदी लाभांश दिया है। रिसर्च के आधार परऔरऔर भी

कल डाउ एस एंड पी ने वित्त वर्ष 2010-11 में आय का अनुमान 30 फीसदी बढ़ा दिया जो साफ तौर पर इस बात का संकेत है कि अमेरिकी बाजार में तेजी का दौर शुरू हो चुका है। यूरोप से तो विश्व अर्थव्यवस्था को कोई फर्क पड़नेवाला नहीं। भारत ने शानदार विकास के आंकड़े पेश कर दिए हैं। बड़े लोगों को ब्याज दर बढ़ने की आशंका सता रही है, जबकि यूरोप में क्या होगा, इससे हम परेशान होऔरऔर भी

कल मैंने लिखा कि आईएफसीआई को बेचकर मुनाफा कमा लें और आज सुबह देखा तो इसने ट्वेंटी-ट्वेंटी जैसी रफ्तार पकड़ रखी थी। असल में आईएफसीआई ऐसा भागनेवाला स्टॉक है जिसे ट्रेडर खट से पकड़ लेते हैं। कल इसके ओपन इंटरेस्ट में एक करोड़ शेयर बढ़ गए थे और मुझे अंदेशा था कि अगर बाजार नहीं गिरता तो यह 95 फीसदी की लिमिट में जा सकता था। इसीलिए मैंने मुनाफावसूली की सलाह दी थी। दरअसल, हम अपने बाजारोऔरऔर भी

ग्रीस के ऋण संकट जैसे कई मुद्दों के बीच से गुजरते हुए बाजार (निफ्टी) ने 4800 से 5088 तक का लंबा फासला तय कर लिया। ध्यान दें, ये मुद्दे रोलओवर के ठीक पहले उछाले गए और हल्ला मचाया गया कि अब सेंसेक्स 12,000 तक गिर जाएगा। क्या कहें, अपने यहां यह बराबर का चक्कर बन गया है क्योंकि बाजार को चलाने व नचाने वाले लोग अच्छी तरह जानते हैं कि हमारे स्टॉक एक्सचेंज ऐसे खिलाड़ियों से भरेऔरऔर भी

मैं भी दुनिया के दूसरे विशेषज्ञों से इत्तेफाक रखता हूं कि मंदड़ियों की रैली तेजड़ियों की रैली से ज्यादा दमदार होती है। लेकिन मैं उनकी इस बात से सहमत नहीं हूं कि बाजार अभी मंदड़ियों की गिरफ्त में है। मैं यूरोपीय संकट, अमेरिकी बाजार, भारतीय बाजार और इनको संचालित करनेवाले मूल कारकों से भलीभांति वाकिफ हूं। और, सब कुछ देखने-परखने के बाद भी इस बात पर कायम हूं कि बाजार अभी नई ऊंचाई पर जाएगा। हालांकि यहऔरऔर भी

राठी बार्स को जब हमने 14 अप्रैल को खरीदने की सलाह दी थी, तब बीएसई में उसका भाव 16.15 रुपए था। आज 28 मई को उसका भाव चल रहा है 21.65 रुपए। इस तरह जिन्होंने उस समय इसके शेयर खरीदे होंगे, उन्हें 33 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न मिल रहा है। ऐसे में आप चाहें तो इससे बेचकर निकल सकते हैं क्योंकि डेढ़ महीने में इतना रिटर्न बहुत होता है। हालांकि आप चाहें तो अब भी इसमेंऔरऔर भी