भयंकर उतार-चढ़ाव से भरे एक और हफ्ते का आखिरी दिन, शुक्रवार। बाजार गिरा जरूर है। लेकिन यह कहीं से भी काला शुक्रवार नहीं है। आज बाजार बंद होने के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज दिसंबर तिमाही के नतीजे घोषित करनेवाली है। सोमवार को यही नतीजे बाजार की दशा-दिशा तय करेंगे। वैसे, इस बार के डेरिवेटिव सेटलमेंट के खत्म होने या एक्सपाइरी में केवल तीन दिन बचे हैं, जबकि अभी तक महज 9000 करोड़ रुपए के रोलओवर हुए हैं। इससेऔरऔर भी

मंत्रालयों के फेरबदल ने बाजार को कुछ संदेश दिए हैं। यह जानामाना सच है कि उद्योगपति मंत्रालय व मंत्रियों के साथ रिश्ते बना लेते हैं जिनकी बदौलत उन्हें सरकारी नीतियों के बारे में पहले से पता चल जाता है और इसका इस्तेमाल वे अपने धंधे में करते हैं। इसलिए मंत्रालय में मंत्री बदल जाने से कभी-कभी कंपनियों का नसीब भी इधर से उधर हो जाता है। शरद पवार को कृषि मंत्री बनाए रखना सत्तारूढ़ पार्टी की राजनीतिकऔरऔर भी

बाजार के रुख और रवैये का बदलना अब इतना आसान नहीं रह गया है क्योंकि ट्रेडरों का बहुमत मानता है कि हम निफ्टी में 5500 व 4700 की तरफ जा रहे हैं। वे मानते हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री को पद छोड़ना पड़ेगा और इससे बाजार की स्थितियां जटिल हो जाएंगी। ऐसा हो भी सकता है और नहीं भी। हालांकि उनके तर्क में दम नहीं नजर आता, लेकिन उनकी हरकतें पूरी तरह उनकी सोच के अनुरूप हैं। 100औरऔर भी

बाजार में जिस तरह बड़े पैमाने पर चालबाजी व जोड़तोड़ चल रही है, भावों को सायास गिराया-उठाया जा रहा है, उसके रहते सही रुझान का पता लगाना बहुत मुश्किल है। फिर भी यह तो साफ दिख रहा है कि बाजार ने ऊपर की यात्रा तो फिर से शुरू कर दी है। बीएसई सेंसेक्स जहां 209.80 अंक (1.11 फीसदी) की बढ़त लेकर 19092.05 पर बंद हुआ है, वहीं एनएसई निफ्टी 69.30 अंक (1.23 फीसदी) बढ़कर 5724.05 पर पहुंचऔरऔर भी

क्या आनेवाले दिनों में बाज़ार में बिकवाली का दबाव बढ़ेगा क्योंकि निफ्टी 5690 का समर्थन स्तर तोड़कर नीचे जा चुका है? ये सवाल हर किसी के दिमाग में नाच रहा है। बहुत से लोग इसका जवाब हाँ मानते हैं। लेकिन इससे निचले स्तरों पर खरीद के अवसर बढ़ गए हैं। ऐसा माननेवालों में से बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके पास 25 से 50 फीसदी कैश है। इसलिए उनकी राय को अनुचित नहीं माना जा सकता। 5368औरऔर भी

एक तो शुक्रवार, ऊपर से 13 तारीख। पश्चिम देशों के निवेशक इसे बडा अपशगुनी संयोग मानते हैं। इसलिए वे उस दिन घर से निकले ही नहीं। भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार, 13 जनवरी का दिन कतई अच्छा नहीं रहा। बीता हफ्ता करेक्शन के लिहाज से ही नहीं, उथल-पुथल के लिहाज से भी हमारे शेयर बाजार के लिए सबसे बुरा हफ्ता रहा। हम बाजार की गिरावट से ज्यादा चौंके नहीं क्योंकि हमारा मानता है कि निफ्टी मेंऔरऔर भी

बाजार डांवाडोल है। कभी इधर तो कभी उधर भाग रहा है। यह 2008 में लेहमान के संकट के बाद की स्थिति का दोहराव है। उस वक्त भी सारे पंटर और बाजार के पुरोधा कह रहे थे कि सेंसेक्स 6000 तक चला जाएगा। अक्सर लोगबाग टीवी स्क्रीम पर आ रही कयासबाजी देखते हैं और मान बैठते हैं कि जैसा कहा जा रहा है, वैसा ही होगा। लेकिन वे एनालिस्टों की चालाकी पर गौर नहीं करते हैं जो कहतेऔरऔर भी

बाजार में कल 337 अंक के तेज सुधार के बाद मंदड़ियों की तरफ से बिकवाली का आना लाजिमी था। फिर इनफोसिस के नतीजे भी चौंकानेवाले नहीं निकले। 30-32 के पी/ई अनुपात पर अगर आप इनफोसिस द्वारा बाजार को पीछे छोड़ देने की बात सोचते हैं तो यह भारत की दूसरे नबंर की आईटी कंपनी से वाकई कुछ ज्यादा ही अपेक्षा करना हो जाएगा। हालांकि निवेशकों का एक वर्ग इस स्टॉक को तब तक पसंद करता रहेगा जबऔरऔर भी

भारतीय शेयर बाजार में बाजार के शातिर उस्तादों और राजनेताओं का क्या खेल हो सकता है? उनके बीच क्या कोई दुरभिसंधि है? वह भी तब जब पूरा बाजार, खासकर डेरिवेटिव सेगमेंट बेहद खोखले आधार पर खड़ा है? शेयर बाजार में होनेवाले कुल 1,70,000 करोड़ रुपए के कारोबार में से बमुश्किल 15,000 करोड़ कैश सेगमेंट से आता है। इस कैश सेगमेंट से अरबों डॉलर का बाजार पूंजीकरण एक झटके में उड़ जाता है, जबकि वास्तविक स्थिति यह हैऔरऔर भी

कल भारी वोल्यूम के साथ निफ्टी के 5800 अंक से नीचे चले जाने के साथ बाजार ने ट्रेडरों और निवेशकों के विश्वास को डिगाकर रख दिया है। मुझे उम्मीद थी कि निफ्टी 5820 के बाद वापस उठेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका कारण मुद्रास्फीति और ब्याज दरों के बढ़ने का अंदेशा बताया जा रहा है। पर यह बाजार के इस तरह धराशाई हो जाने का असली कारण नहीं हो सकता। जब वित्त मंत्री ऑन रिकॉर्ड कह रहेऔरऔर भी