न भूतो न भविष्यते…रोलओवर के दौरान सागर में जैसा चमकता मोती? बाजार के आखिरी आधे घंटे ने यकीनन मुझे गलत साबित कर दिया। ऐसा नियोजित और सटीक खेल खेला गया जो मेरे लिए एकदम नया था और जिसका अनुमान लगाना वाकई नामुमकिन था। मैं यह बात दिल से स्वीकार करता हूं। कितना विकसित और प्रोफेशनली नियमित है हमारा भारतीय पूंजी बाजार! जिन्होंने इस बाजार की व्यवस्थाएं बनाई हैं, उन्हें बधाई दी जानी चाहिए और सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कारऔरऔर भी

बाजार रोलओवर की पीड़ा से गुजर रहा है। अभी तक केवल 74,000 करोड़ रुपए के ओपन इंटरेस्ट अगले सेटलमेंट में ले जाए गए हैं और ज्यादातर सौदों का वारा-न्यारा करना बाकी है। असल में मंदड़िए रोलओवर करने को तैयार नहीं हैं। इसीलिए बाजार में इतने ऊंच-नीच की हालत है। लेकिन गांठ बांध लें कि बाजार एकदम अच्छी तरह सुधरेगा और बहुत जल्द ही वह (निफ्टी) 6500 की मंजिल का रुख कर लेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत निफ्टीऔरऔर भी

केंद्र सरकार जल्दी ही देश के लगभग पांच करोड़ परिवारों के वित्तीय समावेश का नया राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम स्वाभिमान शुरू करने जा रही है। यह जानकारी खुद वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आर्थिक संपादकों के सम्मेलन में दी। सरकार की इस पहल की अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि इस समय अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की 85,292 शाखाओं में से करीब 38 फीसदी शाखाएं ही ग्रामीण इलाकों में हैं। देश की महज 40 फीसदी आबादी के पास बैंक खातेऔरऔर भी

शेयर बाजार में आज का दिन एकदम ठंडा रहा क्योंकि ज्यादातर खिलाड़ी इसी में लगे रहे कि रोलओवर में क्या शॉर्ट और क्या लांग करना है, मतलब डेरिवेटिव्स में बिक्री और खरीद के किन सौदों को अगले सेटलमेंट में ले जाना है। कल तक केवल 24,000 करोड़ रुपए के सौदों का रोलओवर हुआ था और अब यह सेटलमेंट खत्म होने में दो दिन ही बचे हैं। मुझे लगता है कि कल जमकर रोलओवर होंगे क्योंकि आखिरी दिनऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने बीमा कंपनियों के पूंजी बाजार में उतरने की राह खोल दी है। लेकिन उसके बोर्ड ने सोमवार को अपनी बैठक में कुछ ऐसी शर्तें तय कर दीं जिन्हें बीमा कंपनियों को अलग से पूरा करना होगा। साथ ही बोर्ड ने किसी भी आईपीओ (प्रारंभिक पब्लिक ऑफर) में रिटेल निवेशकों के लिए अब तक चली आ रही एक लाख रुपए निवेश की सीमा को बढ़ाकर दो लाख रुपए कर दिया है। इसकेऔरऔर भी

हमारी दृढ़ धारणा नहीं बदल सकती। हमारा मानना था कि निफ्टी के 6200 के आपपास पहुंचने पर बिकवाली का थोड़ा दबाव आ सकता है और हमने लगभग दिन के सर्वोच्च स्तर 6178 पर मुनाफावसूली की। आपने पहली बार देखा होगा कि निफ्टी में पूरे सत्र के दौरान खरीद की कोई कॉल नहीं थी। हम कल का रुझान कल तय करेंगे। अभी तो हमारा मानना है कि इस सेटलमेंट में निफ्टी 6290 के ऊपर नहीं जाएगा। लेकिन वोऔरऔर भी

मैं कह चुका हूं कि इस समय रीयल्टी सेक्टर मेरा पसंदीदा निवेश लक्ष्य है। लेकिन रीयल्टी में भी कौन? नई या पुरानी कंपनियां? इंडिया बुल्स रीयल एस्टेट, एचसीसी, एचडीआईएल, ओबेरॉय, लोढ़ा, ऑरबिट व शोभा डेवलपर्स बेहतर हैं या सेंचुरी, मफतलाल, बॉम्बे डाईंग, गल्फ ऑयल, वालचंदनगर व बीएफ यूटिलिटीज जिनके पास पुश्तैनी जमीन ढेर सारी है। साफ कर दूं कि यूं तो पूरा रीयल्टी सेक्टर निवेश के लिए इस समय अच्छा है। लेकिन इसमें भी पुश्तैनी जमीन रखनवालीऔरऔर भी

कल और आज कुल मिलाकर महज 10,000 करोड़ रुपए के ही सौदों का रोलओवर हुआ है। ऑपरेटर अपनी पोजिशन आगे ले जाने के मूड में नहीं है। कल निफ्टी में 6100 के ऊपर बहुत से खिलाड़ी टेक्निकल चार्टों से निकले यकीन के आधार पर लांग हो गए, यानी उन्होंने खरीद के सौदे कर लिए। लेकिन इस बार तकनीकी गलती की वजह से बाजार ने उन्हें अपनी राय बदलने को बाध्य कर दिया। इतना तय है कि 6050औरऔर भी

रिटेल निवेशक कब तक टेक्निकल एनालिस्टों के चार्टों की धुन पर, सपेरों की बीन पर सांप की तरह नाचते रहेंगे? यह एक बड़ा सवाल है और इसका जवाब रिटेल निवेशक ही दे सकते हैं। अभी तक वे ब्रांड-भक्त बने हुए हैं और अपने ही ब्रोकरों का कहा सुनते हैं। लेकिन इन ब्रोकरों का सरोकार तो अपने धंधे-पानी से ज्यादा और रिटेल निवेशकों की जेब से कम होता है। जैसी कि उम्मीद थी, चार्टवाले राग अलापने लगे किऔरऔर भी

कहा जा रहा है कि बाजार गिरावट का शिकार हो गया क्योंकि चीन के ब्याज दरें बढ़ाने से अमेरिका व यूरोप के साथ-साथ एशिया के भी बाजारों को भी चोट लगी है। लेकिन असली वजह यह नहीं है। अगर ऐसा होता तो बाजार बिना आपको कोई मौका दिए हुए सीधे 300 अंकों की गिरावट के साथ खुलता। लेकिन बाजार तो कमोबेश सपाट स्तर पर खुला। ज्यादा समय बढ़त की स्थिति में रहा और सारी बिकवाली कारोबार केऔरऔर भी