जिस तरह रेटिंग एजेंसी मूडीज ने देश के सबसे बैंक एसबीआई को डाउनग्रेड किया है, उससे उसकी निष्पक्षता पर सवालिया निशान लग गया है। मूडीज ने कहा है कि एसबीआई का एनपीए (गैर-निष्पादित आस्तियां) या डूबत ऋण 12 फीसदी हो सकता है, लेकिन रिजर्व बैंक के नियमों के तरह भारत में किसी बैंक का एनपीए कभी भी इतना हो नहीं सकता। इस समय जून 2011 की तिमाही के नतीजों के मुताबिक एसबीआई का एनपीए कुल ऋणों काऔरऔर भी

शेयर बाजार में चल रही मायूसी ने पूंजी बाजार के दूसरे हिस्से प्राइमरी बाजार में भी सन्नाटा फैला दिया है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 में पूंजी बाजार में उतरनेवाली 22 कंपनियों ने आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) लाने का इरादा ही छोड़ दिया है। इसके साथ ही बड़े निवेशकों को सीधे खींचनेवाले क्यूआईपी (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट) बाजार में भी एकदम मुर्दनी छा गई है। ब्रोकरेज फर्म एसएमसी ग्लोबल सिक्यूरिटीज के ताजा अध्ययन के मुताबिक जिन 22 कंपनियों नेऔरऔर भी

अनिल अंबानी समूह से जुड़ा रिलायंस म्यूचुअल फंड बीते वित्त वर्ष 2010-11 में देश का सबसे ज्यादा मुनाफा कमानेवाला म्यूचुअल फंड बन गया है। अभी तक यह गौरव एचडीएफसी म्यूचुअल फंड को हासिल था। म्यूचुअल फंडों के शीर्ष संगठन एम्फी (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) के आंकड़ों के मुताबिक 2010-11 में रिलायंस म्यूचुअल फंड का शुद्ध लाभ 261 करोड़ रुपए रहा है, जबकि एचडीएफसी म्यूचुअल फंड का शुद्ध लाभ इससे कम 242 करोड़ रुपए दर्ज कियाऔरऔर भी

स्पीक एशिया अब भी खुद को एशिया में संप्रभु उपभोक्ताओं का सबसे बड़ा समुदाय बताती है, लेकिन धीरे-धीरे वह खुद को रोजमर्रा के इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बेचनेवाली फर्म के रूप में पेश करने लगी है। इस बीच यह भी खुलासा हुआ है कि घोषित तौर सर्वे के जिस काम से वह कमाई कर रही थी, वह असल में कभी था ही नहीं। वह तो बस लोगों को फंसाने का एक बहाना था और वह मल्टी लेवलऔरऔर भी

जिस तरह ज्यादातर कंपनियों के आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) कुछ ही समय बाद अपने इश्यू मूल्य से बहुत नीचे खिसक जाते हैं और लिस्टिंग के दिन में उनमे जबरदस्त ऊंच-नीच होती है, उसने पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी को आखिरकार कुछ ठोस कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। सेबी ने आईपीओ के मूल्य में मर्चेंट बैंकरों की जवाबदेही तय करने के लिए उनके द्वारा संचालित पुराने आईपीओ का हाल बताना जरूरी कर दिया है। इस सिलसिले मेंऔरऔर भी

भारत की कंपनियां विदेशी निवेशकों के बीच अपनी साख खोती जा रही हैं। इसकी खास वजह है कि साल 2010 में भारतीय कंपनियों द्वारा लाए गए 85 फीसदी जीडीआर (ग्लोबल डिपॉजिटरी रसीद) अपने इश्यू मूल्य से नीचे चल रहे हैं। इनमें निवेशकों का औसत नुकसान 52 फीसदी का है, जबकि इसी दौरान एस एंड पी सीएनएक्स 500 सूचकांक में 7 फीसदी ही गिरावट आई है। प्रमुख रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिसर्च शाखा ने अपने एक विश्लेषण मेंऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने हर तरफ कुकुरमुत्तों की तरह उगते जा रहे वित्तीय सलाहकारों पर फिर से अंकुश लगाने की कोशिश शुरू की है। ठीक चार साल पहले उसने इस बाबत बाकायदा एक प्रारूप रेगुलेशन जारी किया था जिस पर 31 अक्टूबर 2007 तक सबसे राय मांगी गई थी। इस बार उसने एक बहस पत्र जारी किया है, जिस पर सभी संबंधित पक्षों से 31 अक्टूबर 2011 तक प्रतिक्रियाएं मांगी गई हैं। सबसे अहम बातऔरऔर भी

भारतीय डाक ने वित्तीय जागरूकता के प्रचार-प्रसार के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के साथ खास करार किया है। इसके तहत वह देश भर के चुनिंदा डाकघरों में एलसीडी टीवी स्क्रीन लगाकर शेयर बाजार की रोजमर्रा की गतिविधियों को दिखाएगा। सोमवार को राजधानी दिल्ली में भारतीय डाक व एनएसई के बीच इस आशय के एमओयू या सहमति पत्र पर भारतीय डाक की महाप्रबंधक अलका झा और एनएसई के वाइस प्रेसिडेंट टी वेंकटराव ने हस्ताक्षर किए। इस करारऔरऔर भी

यूरो ज़ोन में चल रहे संकट, खासकर ग्रीस सरकार द्वारा ऋण लौटाने में चूक के घहराते खतरे के चलते दुनिया के निवेशक कैश समेटने के चक्कर में पड़ गए है। वे कमोडिटी बाजार से खटाखट निकल रहे हैं। इसी का असर है कि सोना सोमवार को मिलाकर लगातार तीन दिन ऐसा गिरा है जितना वो पिछले 28 सालों में कभी नहीं गिरा था। बीते तीन दिनों में सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में 10 फीसदी से ज्यादा गिर चुकाऔरऔर भी