हर चीज की काट
इस जहां में सिर्फ एक चीज है जिस पर इंसान का वश नहीं है। वो है समय और उसी से संचालित होता जीवन-मरण का चक्र। बाकी किसी भी चीज की काट नियमों को समझकर निकाली जा सकती है।और भीऔर भी
इस जहां में सिर्फ एक चीज है जिस पर इंसान का वश नहीं है। वो है समय और उसी से संचालित होता जीवन-मरण का चक्र। बाकी किसी भी चीज की काट नियमों को समझकर निकाली जा सकती है।और भीऔर भी
हम किस आशय/भाव से कोई बात कहते हैं, इसका कोई महत्व नहीं। महत्व इसका है कि उससे संदेश क्या गया, संप्रेषित क्या हुआ। सो, बोलने से पहले सामनेवाले की स्थिति पर गौर कर लेना चाहिए।और भीऔर भी
दुनिया ही नहीं, इस सृष्टि की हर चीज हर पल बदलती रहती है। लेकिन परिवर्तन का यह नियम अगर आप किसी आम किसान से पूछेंगे तो वो कहेगा कि ऐसा नहीं है क्योंकि उसकी दुनिया तो कभी बदलती ही नहीं। सूरज के निकलने से लेकर डूबने तक का वही चक्र। न सावन हरे, न भादो सूखे। देश के आम आदमी से पूछेंगे तो वह भी कहेगा कि हां, चीजें बदलती जरूर हैं, लेकिन बेहतर नहीं, बदतर हीऔरऔर भी
कहीं एक तारा टूटकर डूब गया। देखा आपने? कहीं एक कोंपल पेड़ की अकाल मौत से कुम्हला कर सूख गई। देखा आपने? आपके अंदर का इंसान निर्वासित हो गया। अजीब हैं! कुछ भी क्यों नहीं देखते आप?और भीऔर भी
यूरोपीय देशों का कोई साझा यूरो बांड नहीं जारी किया जाएगा। ऋण संकट का तात्कालिक तौर पर मुकाबला करने के लिए यूरोपीय संघ के देश अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को 200 अरब यूरो मुहैया कराएंगे। इसके अलावा यूरोपीय स्थायित्व प्रणाली (ईएसएम) 2013 के बजाय 2012 के मध्य तक लागू कर दी जाएगी। ये कुछ ऐसे फैसले हैं जिन्हें जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ब्रसेल्स में हुए दो दिन के यूरोपीय शिखर सम्मेलन से मनवाने में कामयाब हो गईं। यूरोपीयऔरऔर भी
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने दुनिया में एक और आर्थिक सुस्ती की आशंका जताई है। उन्होंने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में तीसरे भारत-अफ्रीका हाइड्रोकार्बन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “आज विश्व की अर्थव्यवस्था अनिश्चितता का सामना कर रही है। हालांकि इसमें कुछ सुधार के संकेत मिले हैं। लेकिन इसके बावजूद एक और आर्थिक सुस्ती की आशंका दिख रही है। पश्चिम एशियाई देशों के संकट ने भी अनिश्चितता में योगदान किया है, खासतौर से अंतरराष्ट्रीय बाजार मेंऔरऔर भी
इस साल नवंबर में अप्रत्यक्ष करों का संग्रह पिछले नवंबर की तुलना में 6.36 फीसदी बढ़कर 31,082 करोड़ रुपए रहा है। लेकिन पेट्रोलियम पदार्थों पर शुल्क घटाए जाने के कारण उत्पाद शुल्क या एक्साइज ड्यूटी के रूप में 6.5 फीसदी कम, 11,761 करोड़ रुपए का ही टैक्स मिला है। नवंबर में सर्विस टैक्स से सरकार को 7200 करोड़ रुपए मिले हैं। बता दें कि अप्रत्यक्ष करों में मुख्य रूप से कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क), एक्साइज ड्यूटी औरऔरऔर भी
नवंबर महीने में देश का निर्यात साल भर पहले की तुलना में 17.99 फीसदी बढ़ा है। इस साल नवंबर में हमारा निर्यात 22.3 अरब डॉलर रहा है, जबकि नवंबर 2010 में यह 18.9 अरब डॉलर रहा था। लेकिन चालू वित्त वर्ष 2011-12 के पहले छह महीनों की तेज रफ्तार के कारण अप्रैल से नवंबर तक के आठ महीनों में निर्यात की वृद्धि दर 33.2 फीसदी रही है। इस निर्यात वृद्धि में मुख्य योगदान पेट्रोलियम पदार्थों का रहाऔरऔर भी
सरकार ने अपने अनुमानों को जमीनी हकीकत से मिलाने की कोशिश की है। उसने अर्थव्यवस्था की छमाही समीक्षा में चालू वित्त वर्ष 2011-12 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के बढ़ने का अनुमान 7.25 फीसदी से 7.50 फीसदी कर दिया है। फरवरी में बजट पेश करते वक्त इसके 9 फीसदी बढ़ने का अनुमान लगाया गया था। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को संसद में देश के आर्थिक हालात की मध्य-वार्षिक समीक्षा पेश की। इस समीक्षा रिपोर्ट मेंऔरऔर भी
कंपनियों के सामने चुनौती होती है साल दर साल ही नहीं, हर तिमाही लगातार बढ़ते रहने की। कभी 15 तो कभी 20 फीसदी या इससे भी ज्यादा तो और भी अच्छा। किसी तिमाही झटका लगा तो हम-आप मुंह बनाने लगते हैं कि कैसी कंपनी है जो बढ़ती नहीं। निरंतर विकास की इसी जरूरत को पूरा करने के लिए वित्तीय बाजार, खासकर शेयर बाजार अस्तित्व में आया। लेकिन धीरे-धीरे यह लोगों की बचत को खींचने का नहीं, लूटनेऔरऔर भी
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