हंस की धवलता
लोग आपको बारंबार कौआ साबित करने की कोशिश करेंगे। लेकिन आप हंस हो तो उसकी उज्ज्वल ठसक के साथ रहो। किसी का कहा दिल पर लोगे तो जमाने की ठगी का शिकार बन जाओगे और पछताओगे।और भीऔर भी
लोग आपको बारंबार कौआ साबित करने की कोशिश करेंगे। लेकिन आप हंस हो तो उसकी उज्ज्वल ठसक के साथ रहो। किसी का कहा दिल पर लोगे तो जमाने की ठगी का शिकार बन जाओगे और पछताओगे।और भीऔर भी
रिजर्व बैंक देश के बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त तरलता सुनिश्चित करने के लिए सारे उपाय करेगा। रिजर्व बैंक के गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव ने यह दावा किया है। लेकिन उन्होंने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कटौती की संभावना के बारे में कोई भी टिप्पणी करने के इनकार कर दिया। सुब्बाराव गुरुवार को कोलकाता में रिजर्व बैंक के निदेशक बोर्ड की बैठक के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, “सिस्टम में या कुछ बैंकों के साथऔरऔर भी
अगले पांच सालों में पर्यटन मंत्रालय अपना ‘हुनर से रोजगार तक’ कार्यक्रम देश के सभी राज्यों तक पहुंचा देगा। केन्द्रीय पर्यटन मंत्री सुबोधकांत सहाय ने बुधवार शाम अपने मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में यह घोषणा की। यह कार्यक्रम अभी तक नौ राज्यों तक पहुंच चुका है। मंत्री महोदय ने बताया कि शुरू में इस कार्यक्रम के तहत केवल खाद्य उत्पादन और खाद्य व पेय पदार्थों से जुड़ी सेवाओं के लिए प्रशिक्षण दिया जाता था।औरऔर भी
हर देशवासी को उसकी उंगलियों के निशान से लेकर पुतलियों की अलग बुनावट के आधार पर अलग नबंर देने की आधार परियोजना अधर में लटक गई है। वित्त मंत्रालय की संसदीय स्थाई समिति ने नेशनल आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया बिल को खारिज कर दिया है। इस समिति के अध्यक्ष बीजेपी नेता व पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा हैं। यूं तो सरकार के लिए इस समिति की सिफारिशों को मानना जरूरी नहीं है। लेकिन अभी-अभी रिटेल में एफडीआईऔरऔर भी
बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ का शिखर सम्मेलन गुरुवार से शुरू हो गया। यह शुक्रवार तक चलेगा। इसमें यूरो को बचाने पर चर्चा होगी। इस बीच जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने कहा है कि वे कोई घटिया समझौता करने को तैयार नहीं हैं। वे यूरोपीय संघ की संधि में संशोधन की मांग पर अड़ी हुई हैं। मुश्किल यह भी है कि सारी दुनिया में निराशा छा गई है कि सम्मेलन से कुछ खास निकलनेवाला नहींऔरऔर भी
खाद्य मुद्रास्फीति की दर 39 महीनों के न्यूनतम स्तर पर आ गई है। गुरुवार को आए इन आंकड़ों से वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी इतने उत्साहित हुए कि उन्होंने संसद में महंगाई पर बहस में विपक्ष को ललकारते हुए दावा किया कि गेहूं, चावल व दाल समेत विभिन्न खाद्य वस्तुओं की कीमतें दो साल पहले की तुलना में कम हुई हैं। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य मुद्रास्फीति की दरऔरऔर भी
शेयरों के भाव किस हद तक ग्लोबल और किस हद तक लोकल कारकों से प्रभावित होते है, इसका तो ठीकठाक कोई पैमाना नहीं है, लेकिन इतना तय है कि आज के जमाने में कंपनियों के धंधे पर दोनों कारकों का भरपूर असर पड़ता है। इसीलिए शायद अंग्रेजी के इन दोनों शब्दों को मिलाकर नया शब्द ‘ग्लोकल’ चला दिया गया है। ये ग्लोकल असर कैसे कंपनी को कस लेते हैं, इसका एक उदाहरण है भारत की सबसे बड़ीऔरऔर भी
लोकतंत्र में फैसले लेना बड़ा आसान है क्योंकि बहुमत की राय आसानी से जानी जा सकती है। फैसलों में मुश्किल तब आती है कि कोई सरकार बहुमत के नाम पर अल्पमत का हित सब पर थोपना चाहती है।और भीऔर भी
76% भारतीय कंपनियां रिश्वत व भ्रष्टाचार की परवाह नहीं करतीं और उन्हें लगता है कि अपना काम चलाने व वजूद बनाए रखने के लिए ऐसा करना जरूरी है। वैश्विक सलाहकार फर्म प्राइस वॉटरहाउस कूपर्स के वैश्विक आर्थिक अपराध सर्वे 2011 में यह बात उजागर हुई है। सर्वे के अनुसार भारत में आर्थिक अपराधों की सूचना देने वाली कंपनियों की संख्या केवल 24% है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 34% का है। इससे लगता है कि 76%औरऔर भी
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने यह तो माना है कि देश की अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से गुजर रही है, लेकिन उनका कहना है कि अब भी हालत इतनी खराब नहीं है कि हमारे सामने ‘छिपकली खाने’ की नौबत आ गई हो। वित्त मंत्री अंग्रेजी में ही बोलते हैं तो उनका असली कहा पेश है। उन्होंने बुधवार को लोकसभा में 2011-12 के बजट की अनूपूरक मांगों का प्रस्ताव पेश करते हुए लोकसभा में कहा: The economy is inऔरऔर भी
© 2010-2025 Arthkaam ... {Disclaimer} ... क्योंकि जानकारी ही पैसा है! ... Spreading Financial Freedom