दिल्ली मेट्रो से सफर करनेवाले मध्यम आयवर्ग के 59 फीसदी लोग और गुड़गांव से रोजाना अप-डाउन करनेवाले 78 फीसदी लोगों को अगर मौका मिले तो वे साइकिल से ही यात्रा करना पसंद करेंगे। यह नतीजा है एक ताजा बाजार सर्वेक्षण का। इन लोगों को कहना है कि अगर साइकिल के लिए अलग लेन, पार्किंग की सुविधा और अन्य बाकी तंत्र हो तो उनकी पहली पंसद साइकिल से चलना होगा। इस सर्वेक्षण के निष्कर्षों के साथ बीजेपी सांसदऔरऔर भी

देश में कच्चे तेल की रिफाइनिंग क्षमता 2013 तक 22 फीसदी बढ़कर 23.8 करोड़ टन हो जाएगी। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री आरपीएन सिंह ने सोमवार को यह जानकारी दी। बता दें कि राज्यमंत्री इसलिए खुलकर बोल रहे हैं क्योंकि कैबिनेट मंत्री जयपाल रेड्डी इस समय 20वीं विश्व पेट्रोलियम कांग्रेस में भाग लेने के लिए दोहा (कतर) गए हुए हैं। आरपीएन सिंह ने राजधानी दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि देश की रिफाइनिंग क्षमता फिलहाल 19.4 करोड़औरऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई है कि बुधवार को जब चार दिन के अंतराल के बाद संसद की बैठक होगी तो कार्यवाही सामान्य तरीके से चलेगी। सोमवार को राजधानी दिल्ली में नौसेना दिवस पर आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री से यह उम्मीद जताई। यह भी माना रहा है कि वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी उसी दिन सर्वदलीय बैठक के बाद संसद में औपचारिक घोषणा कर देंगे कि मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) काऔरऔर भी

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सफाई दी है कि सरकार रुपए को गिरने से बचाने के लिए विदेशी मुद्रा की आवाजाही पर कोई नियंत्रण नहीं लगाने जा रही है। इससे पहले इस तरह की खबरें आई थीं कि रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव की अध्यक्षता में वित्तीय स्थायित्व विकास परिषद (एफएसडीसी) की गुरुवार, 8 दिसंबर को होनेवाली बैठक में भारतीय कंपनियों के विदेशी निवेश और बाहरी ऋणों की पूर्व अदायगी पर बंदिश लगाई जाऔरऔर भी

बहुत सारी कंपनियां बहुत सारी वजहों से इल्लिक्विड हो जाती हैं। लेकिन बी ग्रुप की किसी अच्छी-खासी कंपनी में अगर बिना किसी वजह के दिन भर में केवल एक शेयर की खरीद-फरोख्त हो तो हमारे पूंजी बाजार नियामक, सेबी को जरूर सोचना चाहिए कि बाजार में ऐसा सन्नाटा क्यों है भाई? यहां बुरे का बोलबाला, अच्छे का मुंह काला क्यों है? दक्षिण भारत की कंपनी श्रीराम सिटी यूनियन फाइनेंस के साथ बीते हफ्ते यही हुआ। शुक्रवार, 2औरऔर भी

कितना अजीब है कि जो भावनाओं से हीन हैं, वे हम सबकी भावनाओं से खेलते हैं। नेता से अभिनेता और कॉपीराइटर तक। पर जो भावनाओं से भरे हैं, उनमें शहादत का भाव तो लबालब है, सीखने का सब्र नहीं।और भीऔर भी

अनुभूति पहले आती है। शब्द बाद में आते है। शब्दों के खो जाने के बाद भी अनुभूति बची रहती है क्योंकि वही मूल है, शब्द तो छाया हैं। दोनों में द्वंद्व है समाज और व्यक्ति का, इतिहास और वर्तमान का।और भीऔर भी

अक्सर बहुत सारी बातें सिद्धांत में बड़ी सतरंगी होती हैं, लेकिन व्यवहार में बड़ी बदरंग होती हैं। सिद्धांततः माना जाता है कि शेयरधारक अपने हिस्सेदारी की हद तक कंपनी का मालिक होता है। लेकिन सच्चाई में ऐसा बस मन का धन है। सौ-दो सौ या हजार-दो हजार शेयर रखनेवालों की तो बात छोड़ दीजिए, 10-15 फीसदी हिस्सेदारी रखनेवाले संस्थागत निवेशकों (एफआईआई, म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां) तक का कोई योगदान कंपनी के फैसलों में नहीं होता है। पब्लिकऔरऔर भी

चीजें वही, लोग भी वही रहते हैं। लेकिन जान-पहचान होते ही उनका पूरा स्वरूप बदल जाता है। पूर्वाग्रह छंट जाते हैं। असली छवि सामने आ जाती है। इसलिए दूर के नहीं, पास के रिश्ते बनाने जरूरी हैं।और भीऔर भी

सरकार ने सभी पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्शन से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बनाने को मंजूरी दे दी है। इस नेटवर्क की शुरुआती अनुमानित लागत 20,000 करोड़ रुपए है। फिलहाल राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) से कहा गया कि वह बीएसएनएल, रेल टेल व पावर ग्रिड जैसे तमाम दूरसंचार ऑपरेटरों के मौजूदा ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क की जीआईएस मैपिंग करे ताकि पता लगाया जा सके कि सभी 2.50 लाख पंचायतों को जोड़ने के लिए कुलऔरऔर भी